Ayodhya Case: वहां पर ईदगाह थी तो इमाम के बैठने की जगह कहां – सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। अयोध्या मामले में एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) की खुदाई में विवादित ढांचे के नीचे पाई गई विशाल संरचना के खंडहरों को मंदिर की जगह ईदगाह के खंडहर बता रहे सुन्नी वक्फ बोर्ड एवं अन्य से सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि यदि वह ईदगाह थी तो वहां इमाम के बैठने की जगह कहां थी? हाई कोर्ट के आदेश पर विवादित स्थल की खुदाई करने के बाद दी गई रिपोर्ट में एएसआई ने कहा है कि विवादित ढांचे के नीचे विशाल संरचना मिली है जो उत्तर भारत के मंदिरों से मेल खाती है। गुरुवार को सुन्नी वक्फ बोर्ड एवं अन्य की ओर से पेश वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि एएसआई की खुदाई में जो बड़ी और मोटी दीवार मिली है वह दीवार ईदगाह की है। उन्होंने कहा कि यह कहना सही नहीं है कि वहां नीचे विशाल मंदिर था। उस जगह पर ईदगाह क्यों नहीं हो सकती जबकि इस्लाम के मुताबिक ईदगाह में एक बड़ी सी दीवार पश्चिम में होती है। अरोड़ा ने कहा कि दीवार में एक आला पाया गया है जो कि मस्जिद में होता है।

ईदगाह की दलीलों पर पीठ के न्यायाधीश जस्टिस एस. अब्दुल नजीर ने सवाल किया कि अगर वहां ईदगाह थी तो फिर वहां इमाम के बैठने की जगह कहां थी? अरोड़ा ने कहा कि खुदाई में पूरी दीवार कहां निकली है वहां रामलला के स्थान पर खुदाई नहीं हुई है।वहां पर सिर्फ 50 मीटर ही दीवार निकली है। इस पर जस्टिस नजीर ने जोर देकर कहा 50 मीटर यानी उनका इशारा ईदगाह की दीवार की इतनी अधिक लंबाई की ओर था जिस पर अरोड़ा ने कहा कि मंदिर की दीवार भी इतनी लंबी नहीं होती है।

अलग-अलग स्तर पर मिले 50 खंबों के आधार जब अरोड़ा ने एएसआई रिपोर्ट में ढांचे के नीचे मंदिर जैसी विशाल संरचना होने के निष्कर्ष का विरोध करते हुए कहा कि जिन 50 खंबों के आधार पर विशाल संरचना होने का दावा किया जा रहा है वास्तव में वे खंबे एक स्तर पर नहीं बल्कि अलग अलग स्तरों पर मिले हैं ऐसे में उसके सहारे विशाल मंदिर के होने की बात कैसे कही जा सकती है?

जस्टिस एसए बोबडे ने रिपोर्ट के अंश की ओर अरोड़ा का ध्यान खींचते हुए कहा कि इसमें लिखा है कि कुल 85 खंबे थे जिसमें से 50 खुदाई में मिले। दूसरे स्तर पर मिले 50 में से चार खंबों का आधार वह बड़ी दीवार थी। ऐसे में आप यह बताएं कि रिपोर्ट में कहां पर यह लिखा है कि इन चार के अलावा बाकी के 46 खंबे दूसरे स्तरों पर पाए गए हैं? अरोड़ा ने जब कोर्ट को दिखाया कि कुछ खंबे दूसरे स्तर पर और कुछ चौथे स्तर पर पाए गए हैं तो कोर्ट ने कहा कि एक स्तर से दूसरे की ऊंचाई मात्र एक मीटर है ऐसे में यह कैसे कह सकते हैं कि दोनों के बीच सालों का अंतर था।

जस्टिस अशोक भूषण ने कहा कि यहां हम 12वीं शताब्दी के निर्माण की चर्चा कर रहे हैं जबकि आज हम 21वीं शताब्दी में चल रहे हैं ऐसे मे हमें यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि उस समय भी निर्माण का एलाइनमेंट उतना ही समतल होगा जैसा आज है। कोर्ट से क्यों सवाल कर रहे हैं विशेषज्ञों से पूछते जब अरोड़ा ने एएसआई रिपोर्ट में युगल देवता शिव पार्वती की मूर्ति मिलने की बात पर कहा कि आखिर एएसआई उसे देवता की मूर्ति कैसे कह सकता है? उस पत्थर की खंडित प्रतिमा में कुछ साफ दिख भी नहीं रहा है। एएसआइ नीचे मिली संरचना को मंदिर कैसे मान सकता है? वहां किसी भी संस्कृति या समुदाय के लोग हो सकते हैं। वह अनुमान लगा रहे हैं।

इन सवालों पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि आप ये सवाल कोर्ट से क्यों पूछ रही हैं? आपको कानून के मुताबिक हाई कोर्ट में विशेषज्ञों से ये सवाल करने चाहिए थे। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने भी कहा कि रिपोर्ट के विपरीत अर्थ निकालने की जगह आपको विशेषज्ञों से जिरह करनी चाहिए थी। वहीं गुरुवार को राजीव धवन ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड एवं अन्य एएसआई रिपोर्ट के लेखक पर कोई सवाल नहीं उठा रहा है। न ही वह रिपोर्ट के निष्कर्ष पर कोई सवाल उठा रहा है। हम मानते हैं कि निष्कर्ष भी रिपोर्ट का हिस्सा है। इस मुद्दे पर बुधवार को उनकी ओर से हुई बहस में कोर्ट का जो समय बर्बाद हुआ है उसके लिए वह कोर्ट से क्षमा प्रार्थी हैं।

Enable referrer and click cookie to search for pro webber