तो मप्र में स्टे के बाद भी 31 इंजिनियर्स की पदोन्नति

भोपाल। सुप्रीम कोर्ट की पदोन्न्ति को लेकर यथास्थिति (स्टेटस को) बहाल रखने के निर्देश के बाद भी पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने 31 इंजीनियरों को 12 सितंबर को पदोन्नत कर दिया।

इसके लिए अगस्त 2013 में हुई विभागीय पदोन्‍नति समिति की पुनर्विचार बैठक जुलाई 2019 में करके सहायक यंत्रियों को कार्यपालन यंत्री पद पर पदोन्न्त किया गया है। पदोन्नति 24 दिसंबर 2013 से दी गई है। पदोन्नति में काम नहीं-वेतन नहीं सिद्धांत का पालन किया गया है यानी इंजीनियरों को एरियर नहीं मिलेगा। पदोन्नति भी सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने पदोन्नति के लिए 12 जुलाई 2018 के हाईकोर्ट जबलपुर के आदेश को आधार बनाया है। उमेशकांत गोटिया विरुद्ध मध्यप्रदेश शासन के प्रकरण में कोर्ट ने पदोन्नति देने का निर्णय दिया था।

दरअसल, पदोन्नति नियम निरस्त होने से पहले यदि विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक हो चुकी है तो फिर पदोन्न्ति दी जा सकती है। इसके आधार पर कुछ विभागों ने सशर्त पदोन्नतियां की भी हैं। इसी आधार पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने 31 सहायक यंत्रियों को कार्यपालन यंत्री पद पर पदोन्न्त कर दिया है।

कार्यपालन यंत्री के असंवर्गीय पदों के विरुद्ध की गई यह पदोन्नतियां पद समाप्त होने, योजना पूरी होने या प्रतिनियुक्ति से अधिकारी की वापसी पर कनिष्ठतम क्रम पर दर्ज अधिकारी को पद के अभाव में पदावनत (डिमोशन) किया जाएगा। पदोन्न्ति सुप्रीम कोर्ट में चल रहे प्रकरण के अंतिम आदेश के अधीन रहेगी।

इन्हें मिली पदोन्नति

रविंद्र कुमार चौरे (सेवानिवृत्त), दिनेश कुमार कलरैया (स्वेच्छिक सेवानिवृत्त), एमएल विश्वकर्मा, महेश कुमार शर्मा, पवन कुमार बैरागी, राजेश श्रीवास्तव, संजय पंडित, ओमप्रकाश दसोरा, संजय शर्मा, अनिल कुमार जैन, विनित कुमार श्रीवास्तव, शंकरलाल निमले, उमेशकांत गोटिया, वीरेंद्र कुमार, ढाल सिंह चौधरी, सतीश कुमार तिवारी, महेंद्र सिंह ठाकुर, राजकुमार अवधिया, श्रीराम पांडे, आरजी चौकसे, प्रभात कुमार गुप्ता, राजेंद्र पंवार, अरविंद कुमार जैन, धर्मेंद्र सिंह चौधरी, केसी कोरी, धूरसिंह कोरी, अशोक कुमार आठिया, कृपाराम काकोरिया, एमआर महोबे, चंद्रमोहन अहिरवार और रामलाल कोकाटे।