IMA Ponzi Scam: मंसूर खान के खिलाफ चार्जशीट सहित 31 लोगों पर दर्ज हुई FIR

नई दिल्ली। इस्लामिक बैंकिंग और निवेश फर्मो से जुड़े कर्नाटक के IMA पोंजी घोटाले की जांच अपने हाथ में लेने के नौ दिन बाद सीबीआइ ने मास्टरमाइंड मंसूर खान और 24 अन्य के खिलाफ चार्जशीट दायर की है। कंपनी ने अधिक रिटर्न का वादा कर लाखों निवेशकों को चूना लगाया था। निवेशकों में मुस्लिमों की संख्या सबसे अधिक है।

अधिकारियों ने कहा कि जांच एजेंसी ने शनिवार को बेंगलुरु की विशेष सीबीआइ अदालत में चार्जशीट दाखिल की। माना जा रहा है कि एजेंसी जांच के लिए तय किए गए समय के अंदर और आरोप पत्र दाखिल कर सकती है। इस मामले में सीबीआइ ने आइ-मॉनेटरी एडवाइजरी (IMA) और उसकी छह सहयोगी कंपनियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के साथ ही 25 नामजद सहित कुल 31 लोगों के खिलाफ एफआइआर दर्ज की थी।

जिनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी, उनमें घोटाले के मास्टरमाइंड और कंपनी का प्रबंध निदेशक मुहम्मद मंसूर खान भी था। मंसूर पर 1500 करोड़ से अधिक रुपये ठगने का आरोप है। बता दें कि कर्नाटक सरकार के अनुरोध पर जांच एजेंसी ने मामला अपने हाथ में लिया था। इससे पहले मामले की जांच कर्नाटक सरकार द्वारा गठित एसआइटी कर रही थी।

जून में प्रकाश में आया मामला
यह मामला जून में तब प्रकाश में आया जब मंसूर खान एक वीडियो मैसेज छोड़कर दुबई भाग गया। मैसेज में खान ने कुछ राजनेताओं और गुंडों द्वारा कथित रूप से उत्पीड़न करने के कारण खुदकशी करने की धमकी दी थी। 21 जुलाई को दिल्ली एयरपोर्ट से प्रवर्तन निदेशालय ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। वर्तमान में वह न्यायिक हिरासत में है। सबसे पहले खलीद अहमद नाम के एक व्यक्ति की शिकायत पर खान और उनकी आइएमए कंपनी के खिलाफ बेंगलुरु में मामला दर्ज किया गया था।

कांग्रेस विधायक पर लगाया था 400 करोड़ लेने का आरोप
दुबई भागने से पहले मंसूर खान ने शिवाजी नगर के विधायक आर रोशन बेग पर 400 करोड़ रुपये लेने और बाद में उन पैसों को नहीं लौटाने का आरोप लगाया था। बेग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें झूठा और निराधार बताया था।

क्या है इस्लामिक बैंकिंग
यह शरीयत के कानूनों के अनुसार गठित किया गया एक बैंक होता है, जो अपने ग्राहकों के जमा पैसे पर न तो ब्याज देता है और न ही ग्राहकों को दिए गए किसी कर्ज पर ब्याज लेता है। इस्लाम में ब्याज पर पैसे देने की मनाही है, क्योंकि इसमें सूदखोरी को ‘हराम’ माना गया है। इस्लामिक बैंक अच्छे व्यवहार के आधार पर लोन देता है और कर्ज लेने वाले को सिर्फ मूलधन यानी जितनी रकम ली है उतनी ही लौटानी पड़ती है, अर्थात लोन पर ब्याज नहीं लिया जाता। इस्लामिक बैंकिंग में बैंक फंड के ट्रस्टी (रुपये की देखभाल करने वाला) की भूमिका निभाता है। बैंक में जो लोग पैसे जमा करते हैं, वे जब चाहें वहां से पैसे निकाल सकते हैं।