Chandrayaan 2 moon landing live updates: दुनिया भर की मीडिया की नजर इसरो का ट्वीट “हम तैयार है”

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बेंगलुरु। भारत का महत्वाकांक्षी स्पेस मिशन चंद्रयान 2 के चांद पर कदम रखने में कुछ घंटे बाकी हैं। पूरे देश के साथ ही दुनिया की नजर भी भारत के मिशन चंद्रयान-2 पर टिकी हुई हैं। इसरो के मुताबिक चंद्रयान 2 विक्रम लैंडर की चंद्रमा के सतह पर लैंडिंग आज आधी रात सुबह 1.30 से सुबह 2.30 पर निर्धारित की गई है। इस बीच इसरो ने ट्वीट कर कहा ऐतिहासिक क्षण के लिये हम तैयार हैं।

 

लैंडिंग के बाद सुबह साढ़े 5 से साढ़े 6 बजे के बीच रोवर विक्रम से अलग होगा। देश का यह मिशन सफल होता है तो भारत चांद के साउथ पोल पर पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बन जाएगा। इस हिस्से पर अभी कोई और नहीं पहुंचा है। जानिए चंद्रयान की लैडिंग से जुड़ा हर अपडेट…

12.10 AM
चंद्रयान-2 के चंद्रमा की सतह पर उतरने की प्रक्रिया को देखने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रात करीब 1 बजे बेंगलुरू स्थित भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के मुख्यालय पहुंचेंगे। इस दौरान उनके साथ 70 छात्र भी मौजूद रहेंगे। पीएम मोदी रात सवा नौ बजे के करीब बेंगलुरु पहुंच गए हैं।

12.00 AM

इसरो के चेयरमैन सिवन बताया कि चांद पर विक्रम 1.53 AM पर उतरेगा। विक्रम के चांद पर उतरने के दौरान का 15 मिनट काफी मुश्किल समय होगा क्योंकि हम पहली बार इस ऑपरेशन को अंजाम दे रहे होंगे।

11.50PM
चंद्रयान-2 की लैंडिंग में तीन घंटे से भी कम का समय बचा है।

11.30PM
यहां देखें- चंद्रयान-2 की लाइव लैंडिंग

इसरो के अधिकारिक यूट्यूब चैनल पर चंद्रयान-2 की लाइव लैंडिंग को देखा जा सकता है। यूट्यूब चैनल 7 सितंबर की तारीख में रात के एक बजकर 10 मिनट पर लाइव हो जाएगा। दूरदर्शन भी इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने का मौका देगा। डीडी नेशनल चैनल पर रात के एक बजे से लाइव टेलिकास्ट होगा। इसके अलावा दूरदर्शन के अधिकारिक यूट्यूब चैनल पर भी लैंडिंग का लाइव प्रसारण होगा।

चांद पर चंद्रयान, जानें- क्या है वैज्ञानिकों का लक्ष्य
1-चांद की उत्पत्ति और क्रमिक विकास को समझना
2-चांद की जमीन पर खनिजों और ध्रुवीय क्षेत्र का मौप तैयार करना
3-बर्फ के रूप में मौजूद पानी के साक्ष्यों की पुष्टि करना
4-जमीन की ऊपरी सतह और वायुमंडल का अध्ययन करना


11.00PM
चांद की सतह पर काशी की छाप
चंद्रयान दो के साथ ही काशी की पहचान और निशान चांद की सतह तक जा पहुंचे हैं। इस पूरे मिशन में जो निशान चांद पर मौजूद होंगे उनमें से एक सारनाथ से लिए गए राष्ट्रीय प्रतीक अशोक की लाट में बने सिंहशीर्ष के भी हैं। दरअसल यह निशान रोवर प्रज्ञान के चंद्रमा पर चलते समय पहियों से बनेंगे। वैज्ञानिकों ने पहियों पर इसरो के प्रतीक और अशोक की लाट की आकृति बनाई है जो कदम दर कदम चंद्रमा की सतह पर बनते जाएंगे।

10.30 PM
बेंगलुरु पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेंगलुरु पहुंच गए हैं। वे चंद्रयान-2 की लैंडिंग के वक्त ISRO मुख्यालय में रहेंगे। बेंगलुरु पहुंचने पर एयरपोर्ट पर सीएम बीएस येदियुरप्पा ने उनका स्वागत किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशभर के करीब 70 छात्र-छात्राओं के साथ बैठकर चंद्रयान की लैंडिंग देखेंगे। पीएम ने देशवासियों से भी अपील की है कि वे इस मौके के साक्षी बनें और इस खास पल के फोटो सोशल मीडिया पर शेयर करें।

10.00 PM
देश-विदेश से जुटे सैकड़ों मीडियाकर्मी
इसरो के बेंगलुरु स्थित टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क सेंटर के बाहर दोपहर 1:45 बजे से ही लोगों की भीड़ जुट गई है। इस पूरे कार्यक्रम को कवर करने के लिए यहां देश-विदेश के सैकड़ों मीडियाकर्मी पहुंचे हुए हैं।

9.30 PM
पीएम मोदी के कारण चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा कड़ी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने की वजह से चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इसरो सेंटर के चारों तरफ करीब 2 किमी के इलाके में करीब 1000 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात हैं।

9.00PM
इसरो मुख्यालय में लाइव टेलिकास्टिंग के लिए विशेष व्यवस्था
चंद्रयान-2 की लाइव टेलीकास्टिंग दिखाने के लिए इसरो ने भी पूरी व्यवस्था कर रखी है। आईएसटीआरएसी के अंदर जर्मन टेक्नोलॉजी के स्क्रीन लगाए गए हैं, ताकि मीडिया और स्थानीय लोगों को पूरे इंवेट की लाइव अपडेट मिलती रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ISTRAC सेंटर के बगल में स्थित मिशन ऑपरेशंस कॉम्प्लेक्स से इस ऐतिहासिक घटना के गवाह बनेंगे। उनके साथ करीब 70 बच्चे भी चंद्रयान-2 की लैंडिंग को लाइव देखेंगे।

8.30 PM
जानें- कैसे काम करेगा प्रज्ञान
लैंडिंग के बाद सुबह साढ़े 5 से साढ़े 6 बजे के बीच विक्रम से प्रज्ञान अलग होगा। यह कैसे काम करता है? जानने के लिए पूरा वीडियो देखें!

23 दिन रहा धरती के इर्द-गिर्द
लांचिंग के बाद चंद्रयान-2 ने तीन हफ्ते तक धरती की परिक्रमा की। इस दौरान इसकी कक्षा में पांच बार बदलाव किया गया। सफर के 24वें दिन 14 अगस्त को छठे बदलाव के जरिये यान को लूनर ट्रांसफर ट्रेजेक्टरी (एलटीटी) पर पहुंचा दिया गया। इस पथ पर हफ्तेभर के सफर के बाद 20 अगस्त को यान ने चांद की कक्षा में प्रवेश किया था। एक सितंबर को इसे चांद की निकटतम कक्षा में पहुंचाया गया था।

यान के हैं तीन हिस्से
यान के तीन हिस्से हैं – ऑर्बिटर, लैंडर ‘विक्रम’ और रोवर ‘प्रज्ञान’। ऑर्बिटर सालभर चांद की परिक्रमा करते हुए जानकारियां जुटाएगा। वहीं लैंडर और रोवर को चांद की सतह पर प्रयोग करेंगे। लैंडर-रोवर को ऑर्बिटर से अलग करने की प्रक्रिया दो सितंबर को पूरी की गई थी। इसके बाद तीन और चार सितंबर को कक्षा कम करते हुए इन्हें चांद के नजदीक पहुंचाया गया था।

क्या-क्या होना बाकी?
-छह-सात सितंबर की दरम्यानी रात डेढ़ से ढाई बजे के बीच लैंडर को चांद पर उतारने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
-लैंडर पर लगे कैमरे की मदद से उसका कंप्यूटर-सॉफ्टवेयर खुद यह तय करेगा कि ठीक किस जगह पर उतरना है।
-लैंडर के उतरने के चार घंटे बाद रोवर ‘प्रज्ञान’ भी उससे बाहर निकल जाएगा।

उड़न तश्तरियों की तरह उतरेगा
इसरो प्रमुख के सिवन का कहना है कि लैंडर चांद पर कुछ उसी तरह उतरेगा, जैसे साइंस फिक्शन फिल्मों में उड़न तश्तरियों को उतरते हुए दिखाया जाता है।

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