रात 1.10 बजे से इसरो की वेबसाइट पर मिशन का वेबकास्ट होगा, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लाइव स्ट्रीमिंग

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नई दिल्ली. चंद्रयान-2 का लैंडर विक्रम शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात 1.30 से 2.30 बजे के बीच चांद के दक्षिण ध्रुव पर उतरेगा। विक्रम में से रोवर प्रज्ञान सुबह 5.30 से 6.30 के बीच बाहर आएगा। मिशन के आखिरी घंटों में इसरो चीफ के सिवन ने कहा कि अभी तक सबकुछ योजना के मुताबिक चल रहा है। इसरो के वैज्ञानिकों ने कहा कि यह ऐसा मिशन है, जैसे किसी बच्चे को पालने में रखना हो। इस पूरे मिशन को इसरो लाइव करेगा।

यहां पर दिखेगा लाइव 
चंद्रयान 2 भले ही देर रात चंद्रमा की सतह पर उतरेगा, लेकिन इसको लेकर लोगों में बड़ी उत्‍सुकता है। दुनिया भर के लोग इस नजारे को देखने के लिए उत्‍सुक हैं। इसके लिए लगातार वह सर्च कर रहे हैं। मुमकिन है कि आप भी इन्‍हीं मे से एक हों। लिहाजा हम आपकी जानकारी के लिए यह बता देते हैं कि चंद्रयान 2 की लैंडिंग का लाइव नजारा आप www.isro.gov.in या https://www.youtube.com/user/pibindia/featuredपर ले सकेंगे। आपको यहां पर ये भी बता दें कि पीएम मोदी समेत देश के 70 भाग्‍यशाली बच्‍चे भी इस पल का गवाह बनेंगे।इसके अलावा नेशनल जियोग्राफिक चंद्रयान 2 की लैंडिंग को ब्रॉडकास्ट करने वाला है। इसका मतलब अब यह ऐतिहासिक पल आप आपने घर बैठे देख पाएंगे। 6 सितम्बर को 1:30am-2:30am के बीच चंद्रयान 2 चांद पर लैंड करेगा। टीवी चैनल इस एक्सक्लूसिव लाइव शो में NASA के खगोलयात्री को लेकर आएंगे, जो अपने अनुभव इस शो में साझा करेंगे। यह शो नेशनल जियोग्राफिक और Hotstar पर 6 सितम्बर 2019 को 11:30PM लाइव ब्रॉडकास्ट किया जाएगा। यह Hotstar पर देखने के लिए उपलब्ध रहेगा।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए इसरो मुख्यालय में मौजूद रहेंगे। उनके साथ पिछले महीने साइंस क्विज जीतने वाले 60 बच्चे भी रहेंगे। प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील की है कि इस पल की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करें। रात 1.10 बजे इसरो की वेबसाइट पर इस मिशन का वेबकास्ट किया जाएगा। इसके अलावा फेसबुक, ट्विटर और यू ट्यूब पर इसकी लाइव स्ट्रीमिंग की जाएगी।

प्रज्ञान एक लूनर डे में कई प्रयोग करेगा
प्रज्ञान चंद्रमा की सतह पर एक लूनर डे (चांद का एक दिन) में ही कई प्रयोग करेगा। चांद का एक दिन धरती के 14 दिन के बराबर होता है। चंद्रमा की कक्षा में चक्कर लगा रहा ऑर्बिटर एक साल तक मिशन पर काम करता रहेगा। अगर लैंडर विक्रम चंद्रमा की ऐसी सतह पर उतरता है, जहां 12 डिग्री से ज्यादा का ढलान है तो उसके पलटने का खतरा रहेगा।

‘लैंडर की स्पीड कम होगी और सही जगह पहुंचकर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा’
इसरो के पूर्व प्रमुख जी माधवन नायर के मुताबिक- विक्रम ऑन बोर्ड कैमरों से सही स्थान का पता लगेगा। जब जगह मैच हो जाएगी, तो उसमें लगे 5 रॉकेट इंजनों की स्पीड 6 हजार किमी प्रति घंटा से शून्य हो जाएगी। लैंडर नियत जगह पर कुछ देर हवा में तैरेगा और धीमे से उतर जाएगा। लैंडर सही जगह उतरे, इसके लिए एल्टिट्यूड सेंसर भी मदद करेंगे। नायर ने यह भी बताया कि सॉफ्ट लैंडिंग कराने के लिए लैंडर में लेजर रेंजिंग सिस्टम, ऑन बोर्ड कम्प्यूटर्स और कई सॉफ्टवेयर लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह एक बेहद जटिल ऑपरेशन है। मुझे नहीं लगता कि किसी भी देश ने रियल टाइम तस्वीरें लेकर ऑन बोर्ड कम्प्यूटरों के जरिए किसी यान की चांद पर लैंडिंग कराई है।

लैंडर से रोवर को निकालने में कितना समय लगेगा?
लैंडर के अंदर ही रोवर (प्रज्ञान) रहेगा। यह प्रति 1 सेंटीमीटर/सेकंड की रफ्तार से लैंडर से बाहर निकलेगा। इसे निकलने में 4 घंटे लगेंगे। बाहर आने के बाद यह चांद की सतह पर 500 मीटर तक चलेगा। यह चंद्रमा पर 1 दिन (पृथ्वी के 14 दिन) काम करेगा। इसके साथ 2 पेलोड जा रहे हैं। इनका उद्देश्य लैंडिंग साइट के पास तत्वों की मौजूदगी और चांद की चट्टानों-मिट्टी की मौलिक संरचना का पता लगाना होगा। पेलोड के जरिए रोवर ये डेटा जुटाकर लैंडर को भेजेगा, जिसके बाद लैंडर यह डेटा इसरो तक पहुंचाएगा।

ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर क्या काम करेंगे?
चांद की कक्षा में पहुंचने के बाद ऑर्बिटर एक साल तक काम करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य पृथ्वी और लैंडर के बीच कम्युनिकेशन करना है। इसके साथ ही ऑर्बिटर चांद की सतह का नक्शा तैयार करेगा, ताकि चांद के अस्तित्व और विकास का पता लगाया जा सके। लैंडर यह जांचेगा कि चांद पर भूकंप आते हैं या नहीं। जबकि, रोवर चांद की सतह पर खनिज तत्वों की मौजूदगी का पता लगाएगा।

चांद की धूल से सुरक्षा अहम
वैज्ञानिकों के मुताबिक- चंद्रमा की धूल भी चिंता का विषय है, यह लैंडर को कवर कर उसकी कार्यप्रणाली को बाधित कर सकती है। इसके लिए लैंडिंग के दौरान चार प्रक्षेपक स्वत: बंद हो जाएंगे, केवल एक चालू रहेगा। इससे धूल के उड़ने और उसके लैंडर को कवर करने का खतरा कम हो जाएगा।

‘चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग के अब तक 38 प्रयास हुए, 52% ही सफल’
चांद को छूने की पहली कोशिश 1958 में अमेरिका और सोवियत संघ रूस ने की थी। अगस्त से दिसंबर 1968 के बीच दोनों देशों ने 4 पायनियर ऑर्बिटर (अमेरिका) और 3 लूना इंपैक्ट (सोवियन यूनियन) भेजे, लेकिन सभी असफल रहे। अब तक चंद्रमा पर दुनिया के सिर्फ 6 देशों या एजेंसियों ने सैटेलाइट यान भेजे हैं। कामयाबी सिर्फ 5 को मिली। अभी तक ऐसे 38 प्रयास किए गए, जिनमें से 52% सफल रहे। हालांकि इसरो को चंद्रयान-2 की सफलता का पूरा भरोसा है। माधवन नायर भी कहते हैं कि हम ऐतिहासिक पल के साक्षी होने जा रहे हैं। 100% सफलता मिलेगी।

कई देशों के मुकाबले हमारा मिशन सस्ता

यान लागत
चंद्रयान-2 978 करोड़ रुपए
बेरशीट (इजराइल) 1400 करोड़ रुपए
चांग’ई-4 (चीन) 1200 करोड़
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