Yashbharat Big News : घर-घर टीम भेजकर होगा गरीबी रेखा सूची का सत्यापन

कटनी। इसे विडम्बना ही कहा जाएगा कि जिले में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों की सूची में ऐसे लोग भी शामिल है, जो न तो गरीब हैं और न ही गरीबी रेखा की पात्रता रखते हैं। इसके बावजूद कतिपय अधिकारियों, कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से ऐसे हजारों लोगों के नाम गरीबी रेखा सूची में न केवल जोड़े गए हैं, बल्कि उन्हें हर तरह की सुख सुविधाएं भी मुहैया हो रही हैं। जिसका परिणाम यह हो रहा है कि गरीबों को उनका हक नहीं मिल पा रहा। यही कारण है कि मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में पहले विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस और अब भाजपा विधायकों ने अपात्रों की वजह से पात्रों को राशन नहीं मिलने का मुद्दा उठाया है। विधानसभा में यह मुद्दा उठने के बाद प्रदेश सरकार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने पूरे प्रदेश में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के दायरे में आने वाले 1 करोड़ 11 लाख परिवारों का घर-घर टीम भेजकर सत्यापन कराने का फैसला किया है। कलेक्टरों को 18 से 28 सितंबर तक घर-घर सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं। सत्यापन कराने के बाद अयोग्य पाए गए परिवारों का नाम बीपीएल सूची से काटा जाएगा। इस प्रक्रिया के लिए 29 अक्टूबर तक की मियाद तय की गई है। साथ ही पात्र परिवारों के नाम भी शामिल किए जाएंगे। गौरतलब है कि गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को राज्य सरकार द्वारा अनके सुख सुविधाएं प्रदान की जा रही है। जिसमे 1 रूपए प्रति किलो के भाव से गेहंू और चांवल मुख्य रूप से शामिल है। इसके अलावा शक्कर और मिट्टी का तेल भी गरीबी रेखा कार्ड पर दिया जाता है, साथ ही इस कार्ड के माध्यम राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का भी लाभ प्रदान किया जाता है। यही कारण है कि गरीबों के हक पर डाका डालने के लिए हर कोई तैयार हो जाता है, चाहे उसकी आय ज्यादा हो या कम। प्रदेश के अन्य जिलों की तरह कटनी जिले में भी कुछ ऐसा ही हुआ है। जिले में बड़ी संख्या में अपात्रों ने अपने नाम गरीबी रेखा सूची में जुड़वा लिए हैं। इसमे वार्डों से चुनकर आने वाले जनप्रतिनिधियों के परिवार तक शामिल हैं। इसके अलावा ऐसे लोगों के नाम गरीबी रेखा सूची में जोड़ दिये गए हैं, जिनके मकान तीन मंजिल हैं और उनकी आय गरीबी रेखी से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों से कई गुना अधिक है।
प्रदेश में 1 करोड़ 11 लाख परिवारों के 5 करोड़ से ज्यादा व्यक्ति शामिल
प्रदेश की कुल आबादी के 75 फीसदी लोगों को ही रियायती दर पर राशन दिया जा सकता है। प्रदेश में एक करोड़ 11 लाख परिवारों के 5 करोड़ से ज्यादा व्यक्तियों को एक रुपए किलोग्राम के हिसाब से गेहूं और चावल दिया जा रहा है। इसके बावजूद 6-7 लाख पात्र व्यक्ति अभी भी राशन से वंचित होने का दावा कर रहे हैं। बताया जाता है कि अपात्रों को योजना से बाहर निकालने के लिए आधार केंद्रित व्यवस्था लागू की गई है। 22 जिलों में पाइंट ऑफ सेल्स पीओएस मशीन के माध्यम से किसी भी दुकान से राशन लेने की सुविधा दी गई है। बाकी जिलों में भी यह व्यवस्था जल्द लागू की जा रही है। इसके अलावा अपात्रों की पहचान करने के लिए घर.घर सत्यापन का काम शुरू किया जा रहा है। आशंका जताई गई है कि जिस तरह संबल नया सवेरा योजना में मिलने वाली सुविधाओं के लिए अपात्रों को पात्र बनाकर फर्जीवाड़ा किया गया, वैसा ही रियायती दर के राशन के लिए भी हो सकता है। दरअसल बड़ी संख्या में ऐसे हितग्राहियों की पहचान हुई है, जिन्होंने बीते तीन माह से राशन ही नहीं लिया है।
प्रत्येक परिवार की पात्रता का होगा सत्यापन
खाद्य विभाग ने प्रत्येक परिवार की पात्रता का सत्यापन कराने का फैसला किया है। इसके लिए कलेक्टरों को दल बनाकर सत्यापन करने के निर्देश दिए हैं। दल ग्राम पंचायत और वार्डवार बनेंगे। इसमें कम से कम दो सदस्य होंगे। इनमें एक ग्राम सदस्य पंचायत का सचिव, रोजगार सहायक, पटवारी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता या नगरीय निकाय का कर्मचारी जरूर होगा। दल ठीक से सत्यापन का काम कर रहे हैं या नहीं, इसके लिए दस पंचायतों के ऊपर एक प्रभारी अधिकारी रहेगा। इस काम की निगरानी के लिए जिला नियंत्रण कक्ष भी बनाना होगा।
इस तरह किया जाएगा सत्यापन
मौके पर जाकर यह देखा जाएगा कि परिवार दर्शाए पते पर रहता है या नहीं। परिवार के जो सदस्य बताए गए हैं, वे वास्तव में हैं या नहीं। पात्रता पर्ची की श्रेणी संबंधी वैध दस्तावेज हैं या नहीं। परिवार को एक से ज्यादा पात्रता पर्ची तो नहीं मिल रही है। यदि परिवार नहीं मिलता है तो उसका पंचनामा तैयार करना होगा। सर्वे के दौरान परिवार के मुखिया या सदस्य के हस्ताक्षर या अंगूठे का निशान लिया जाएगा। स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी सत्यापन के दौरान पाई गई स्थितियों का ब्योरा लिया जाएगा।
बनेगी अपात्रों की सूची, फिर कटेंगे नाम
खाद्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सत्यापन में अपात्र पाए जाने वाले परिवारों की अलग से सूची बनाई जाएगी। जनपद पंचायत और नगरीय निकाय की बैठक में सूची को रखा जाएगा और जिले की वेबसाइट पर भी इसे प्रदर्शित किया जाएगा। अपात्र परिवारों के नाम सूची से हटाने के लिए कलेक्टर से अनुमोदन लेना होगा। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत बने पोर्टल से अपात्र परिवारों के नाम विलोपित करने पर आपत्ति की सुनवाई कलेक्टर करेंगे।
औसतन 30 से 40 प्रतिशत परिवार
एक जानकारी के मुताबिक नगर निगम कटनी सीमा के अंतर्गत आने वाले 45 वार्डों की गरीबी रेखा सूची में कई वार्ड ऐसे हैं, जहां औसतन 30 से 40 प्रतिशत परिवार गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। इसमे गंदी बस्ती उन्मूलन योजना के अंतर्गत आने वाले वार्ड नहीं बल्कि शहर के मध्य में स्थित वार्डों की संख्या अधिक है। अब ऐसा कैसे हुआ, यह तो नाम जुड़वाने वाले जानते हैं या फिर नाम जोड़ने वाले, लेकिन इससे गरीबों के हक में जरूर डाका डाला जा रहा है। यही कारण है कि जिले में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों की संख्या एक लाख के ऊपर पहुंच गई है। गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों की सूची में अमीरों के नाम काटना प्रशासन के लिए एक चुनौती है।
रद्दी की टोकरी में डाल दिये जाते हैं पात्रों के आवेदन
नगर निगम सीमा क्षेत्र की बात करें तो ऐसे अनेकों लोग होंगे, जो गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों की श्रेणी में आते हैं और उन्होंने इस सूची में अपने नाम जुड़वाने के लिए संबंधित कार्यालयों के साथ ही हर मंगलवार को होने वाली जनसुनवाई में अपने आवेदन भी दिये लेकिन अधिकारियों ने इन आवेदनों की तरफ कोई ध्यान नहीं देते हुए इनके आवेदनों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया। दरअसल इन आवेदनों के साथ कोई चढ़ोत्री न मिलने की वजह से ही ऐसा किया जाता है। जिससे आज भी हजारों की संख्या में ऐसे लोग हैं, जो गरीबी रेखा सूची में अपना नाम जुड़वाने के लिए कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन उनके नाम जोड़े जाने की तरफ प्रशासनिक अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
क्या-क्या सुविधाएं मिलती हैं गरीबी रेखा कार्ड में
यदि आप गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार की श्रेणी में आते हैं और यदि आपके पास गरीबी रेखा का कार्ड है तो ऐसे लोगों को उनके ग्राम या वार्ड में स्थित राशन दुकानों से 1 रूपए प्रति किलो गेहंू और चांवल दिये जाने का प्रावधान है। इसके अलावा शक्कर और मिट्टी का तेल भी गरीबी रेखा कार्ड पर दिया जाता है। साथ ही इस कार्ड के माध्यम से सरकारी अस्पताल में निःशुल्क इलाज, निःशुल्क दवाईयां और मकान बनाने के लिए विभिन्न विभागों से कर्ज भी दिया जाता है। इसके अलावा गरीबी रेखा कार्डधारी व्यक्ति विभिन्न शासकीय विभागों से बिना कोई शुल्क के कोई भी गोपनीय जानकारी निकलवा सकता है।