बड़ी खबर: VIDEO-सीमेंट उद्योगों को देने की बजाय डेम में बहा रहे फ्लाईएश, कहीं अवैध वसूली के चक्कर में ऊपर से तो नहीं बनाया जा रहा दबाव?

कटनी। (राजा दुबे) कैमोर स्थित एसीसी प्लांट सहित भदनपुर स्थित मैहर सीमेंट एवं रिलायंस सीमेंट उद्योगों को अनुबंध के बावजूद उमरिया जिले के नरसिंहपुर पाली स्थित संजय गांधी थर्मल पॉवर प्लांट से फ्लाईएश की आपूर्ति नहीं की जा रही, जबकि इन सीमेंट उद्योगों द्वारा पॉवर प्लांट को 130 रूपये प्रति टन के हिसाब से फ्लाईएश का भुगतान किया जाता है।

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सीमेंट उद्योगों को देने के बजाय फ्लाईएश पाईप लाइन के जरिए पॉवर प्लांट से लगे डेम में बहाकर पर्यावरण को व्यापक पैमाने पर क्षति पहुंचाई जा रही है। आर्थिक नुकसान सहते हुए फ्लाईएश सीमेंंट उद्योगों को देने के बजाय डेम में क्यों बहाया जा रहा है, इस संबंध में पॉवर प्लांट के अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं। इधर दूसरी ओर फ्लाईएश की आपूर्ति न होने से इन उद्योगों में न केवल सीमेंट उत्पादन प्रभावित हो रह वरन फ्लाईएश का परिवहन करने वाले सैकड़ों बल्कर वाहनों के पहिये भी जाम हो गए हैं। परिवहन व्यापार से जुड़े सैकड़ों परिवारों के सामने आर्थिक संकट आ खड़ा हुआ है।


5 साल के लिए हुआ था अनुबंध

प्राप्त जानकारी के अनुसार एसीसी कैमोर सहित मैहर सीमेंट एवं रिलायंस सीमेंट का संजय गांधी थर्मल पॉवर प्लांट से फ्लाईएश आपूर्ति को लेकर 2015 में अनुबंध हुआ था जिसकी अवधि 2020 तक है। सीमेंट उद्योगो ंसे बाकायदा सुरक्षानिधि जमा कराई गई थी। उद्योगों द्वारा 130 रूपये प्रति टन के हिसाब से भुगतान भी पॉवर प्लांट को किया जा रहा है। इसके बाद भी पॉवर प्लांट अपने अनुबंध से मुकर गया। कुछ गैर अनुबंधित सीमेंट प्लांट जिनमें केजेएस और सतना का बिड़ला सीमेंट शामिल है इन्हें कुछ मात्रा में फ्लाईएश आपूर्ति की जा रही पर अनुबंधित सीमेंट उद्योगों को पिछले 4 अगस्त से फ्लाईएश की आपूर्ति पूरी तरह बंद कर दी गई है। उद्योगों को देने के बजाय इसे डेम में बहाया जा रहा है।
3 हजार टन फ्लाईएश बनती है रोज

बिरसिंहपुर पाली में 210-210 मेगावॉट क्षमता की 4 और 500 मेगावॉट क्षमता की एक यूनिट संचालित है। पांचों प्लांटों को मिलाकर 1340 मेगावॉट बिजली का उत्पादन प्रतिदिन होता है। इतनी बिजली बनाने में जितना कोयला जलता है उससे 3000 टन फ्लाईएश बायप्रोडक्ट के रूप में निकलता है। सीमेंट उद्योगों में यह फ्लाईएश रॉ मटेरियल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

यहां यह विशेषरूप से उल्लेखनीय है कि फ्लाईएश पर्यावरण एवं मानवजीवन के लिए बेहद हानिकारक माना जाता है। इसका किसी भी तरीके से विनष्टïीकरण नहीं होता। फ्लाईएश गिरने से खेत बंजर हो जाते हैं, जमीन की उर्वरा शक्ति नष्टï हो जाती है, नदियों, तालाबों का पानी दूषित और जहरीला हो जाता है।

फ्लाईएश से पर्यावरण एवं मानवजीवन को हो रही इस क्षति को देखते हुए ही लगभग ढाई दशक पहले वैज्ञानिकों ने फ्लाईएश को सीमेंट उद्योगों में खपाने की तकनीक खोजी थी तब से विश्व स्तर पर फ्लाईएश का उपयोग सीमेंट उद्योगों में रॉ मटेरियल के रूप में किया जा रहा पर संजय गांधी थर्मल पॉवर प्लांट के अधिकारी फ्लाईएश सीमेंट उद्योगों को देने के बजाय उसे डेम में बहाने के पुराने ढर्रे पर चल निकले हैं। उन्हें न तो प्लांट को होने वाले आर्थिक नुकसान की चिंता है न ही पर्यावरण और मानवजीवन पर मंडराते खतरे की फिक्र है।

कहीं कमीशन का चक्कर तो नहीं?

सूत्रों की मानें तो पॉवर प्लांट द्वारा अनुबंधित सीमेंंट उद्योगों को फ्लाईएश आपूर्ति किये जाने के पीछे कमीशन के चक्कर को लेकर ऊपर से पडऩे वाला दबाव कारण हो सकता है। सूत्रों के अनुसार सीमेंट उद्योगों और पॉवर प्लांट के बीच फ्लाईएश के डील में एक कड़ी ऊपर तक जुड़ी थी। भोपाल के एक एजेंट द्वारा ऊपर तक पहुंचाये जाने के नाम पर फ्लाईऐश में 30 रूपये प्रतिटन के हिसाब से कमीशन सीमेंंट उद्योगों से वसूल किया जाता था। प्लांट में प्रतिदिन औसतन 3000 टन फ्लाईएश निकलता है। इसका आधा भी प्रतिदिन उठाव माना जाये तो कमीशन की राशि 45 हजार प्रतिदिन लगभग साढ़े 5 लाख प्रतिमाह होती है। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद यह कड़ी टूट गई थी और कमीशन की वसूली भी बंद हो गई थी।

भोपाल में बैठे एजेंट ने नये निजाम से सैटिंग बिठाई और कमीशन के लिए राजी कर लिया। अब चर्चा है कि उद्योगों से 40 से 50 रूपये प्रतिटन कमीशन को लेकर दबाव बनाया जा रहा है। जिसके लिए सीमेंट उद्योग तैयार नहीं हो रहे हैं। कहीं इसी वजह से तो पॉवर प्लांट द्वारा अनुबंध का उल्लंघन करते हुए इन उद्योगों को फ्लाईएश की आपूर्ति नहीं रोक दी गई?

कल से नए एमडी संभालेंगे

पॉवर प्लांट से सीमेंंट उद्योगों को फ्लाईएश की आपूर्ति किये जाने की बजाय उसे डेम में क्यों बहाया जा रहा है यह जानने के लिए जब एमपी पॉवर मैनेजमेंट के एमडी सुखवीर सिंह आईएएस से उनके कार्यालय स्थित दूरभाष पर जबलपुर संपर्क किया गया तो बताया गया कि वे भोपाल कार्यालय में हैं। भोपाल कार्यालय में संपर्क करने पर जानकारी दी गई कि एमडी सुखवीर सिंह पॉवर मैनेजमेंट से कहीं और जा रहे उनकी जगह नीतेश व्यास नए एमडी होंगे जो कल 26 अगस्त से एमडी का प्रभार संभालेंगे। दो अन्य वरिष्ठï अधिकारियों वी. किरण गोपाल एवं अनूपकुमार नंदा से भी संपर्क का प्रयास किया गया पर लैंडलाइन नंबर पर इनसे भी संपर्क नहीं हो सका। बहरहाल थर्मल पॉवर प्लांट द्वारा फ्लाईएश अनुबंधित उद्योगों को न देकर डेम में बहाये जाने की प्रक्रिया सवालों के घेरे में है।