अगर आप भी बन सकते हैं सेलिब्रिटी, 12 वीं के बाद मिल रहा है मौका

वेब डेस्‍क। वर्तमान दौर में मनोरंजन का व्यवसाय बहुत तेज गति से बढ़ रहा है। मनोरंजन की इसी बढ़ती मांग के कारण देश के शहरों एवं कस्बों में एफएम (फ्रिक्वेंसी मॉड्युलेशन) रेडियो स्टेशनों की बाढ़-सी आ गई है। इन रेडियो स्टेशनों पर अलग-अगल कार्यक्रमों के तहत चौबीस घंटे नए-पुराने गाने बजते रहते हैं। लेकिन हर कार्यक्रम का अपना एक अलग ही अंदाज होता है। उस कार्यक्रम को पेश करने वाले रेडियो जॉकी यानी आरजे कहलाते हैं।
रेडियो जॉकी एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें नाम, शोहरत और पैसा तीनों भरपूर हैं। यहां मौज मस्ती और ग्लैमर के साथ-साथ नाम रोशन करने का पूरा मौका मिलता है। इस क्षेत्र में मधुर आवाज और क्रिएटिव दिमाग रखने वालों की दरकार होती है। विश्व के पहले एफएम रेडियो स्टेशन डब्ल्यू. वन एक्स. ओजे की शुरुआत अमेरिकी में हुई। साफ आवाज, अच्छा प्रसारण और सुलभ सेवा की वजह से यह लोकप्रिय होता चला गया। भारत में एफएम क्रांति की शरुआत नब्बे के दशक में हुई। आरंभ में तो इसका प्रसारण चार महानगरों तक ही सीमित रहा परंतु वर्तमान में देश के सभी प्रमुख शहरों तथा कस्बों में निजी एफएम रेडियो स्टेशनों को सरकार द्वारा अनुमति प्रदान कर दी गई है। एक साथ कई एफएम रेडियो स्टेशन शुरू होने की घोषणा के साथ ही इस पेशे का ग्लैमर आसमान छूने लगा है। माय एफएम. रेड एफएम. बिग एफएम. रेडियो मिर्ची, डियो सिटी आदि एफएम रेडियो स्टेशनों के खुलने से रोजगार के असीमित अवसर पैदा हो रहे हैं।
इस पेशे की खासियत आवाज का वह जादू है, जो लोगों को दीवाना बना देता है। आरजे यानी रेडियो जॉकी का दायित्व सीधे-सीधे श्रोताओं से तारतम्य बैठाने का होता है। यही व्यक्ति सीधे तौर पर श्रोताओं से मुखाबित होता है। इसलिए इसे कार्यक्रम को खूबसूरत ढंग से प्रस्तुत करने का सलीका आना चाहिए। इस पद के लिए भी किसी विशेष या अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता की दरकार नहीं होती है। सामान्य अंग्रेजी व हिंदी भाषा का ज्ञान, मधुर आवाज व स्पष्ट उच्चारण इस पद के लिए प्राथमिक या आवश्यक गुण हैं क्योंकि इन्हीं के जरिये रेडियो जॉकी श्रोताओं को किसी कार्यक्रम से बांधे रखता है। संगीत की विभिन्न विधाओं व उसकी शाखाओं की जानकारी व ऑडियो सॉफ्टवेयर का ज्ञान भी उसे होना चाहिए। इसके अतिरिक्त रेडियो स्टेशन की स्थानीय परिस्थितियों एवं वहां प्रचलित परंपराओं, नवीन समसामयिक घटनाओं की जानकारी व स्थानीय भाषा का ज्ञान होना अच्छे रेडियो जॉकी के लिए बहुत जरूरी है। आजकल ऐसे कार्यक्रमों का काफी प्रचलन है, जिसमें उसे श्रोताओं से सीधे-सीधे बातचीत करनी होती है। कई बार तो प्रोग्राम लाइव होते हैं, इसलिए किसी भी रेडियो जॉकी में प्रत्युत्पन्नमति या क्विक रिस्पांस क्षमता का होना भी जरूरी है।

रेडियो जॉकी में अच्छा सेंस ऑफ ह्यूमर भी बहुत मायने रखता है, क्योंकि इसके द्वारा वह माहौल को हल्का-फुल्का बना देता है। रेडियों जॉकी का सबसे महत्वपूर्ण गुण है, उसकी आवाज का प्रस्तुतीकरण। शब्दों के अनरूप अपना में उतार-चढाव पैदा करने की कला और रोचक ढ़ग से बोलने का गुण भी उसमें होना चाहिए। वे लोग जो नियमित रूप से एफएम रेडियो सुनते हैं। वे जानते हैं कि हर एक रेडियो जॉकी की अपनी एक अलग स्टाइल होती है। इसलिए यदि बोलने की अलग स्टाइल डेवलप की जाए तो आप भीड़ में भी अलग दिखेंगे। एक ही शैली में बोलते रहेंगे। तो श्रोता बोर हो जाएंगे इसलिए आवाजें बदलकर बोलने की कला भी आपको आनी चाहिए। इससे आपको श्रोताओं का ज्यादा प्रतिसाद मिलेगा। पूरे प्रोग्राम की स्क्रिप्ट हो यह संभव नहीं इसलिए खुद अपने तरीके से लाइव कार्यक्रम का संचालन आना नितांत जरूरी है।
योग्यता :
रेडियो जॉकी बनने के लिए कोई विशेष शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य नहीं है। 12वीं पास कोई भी युवा इस क्षेत्र में अपनी किस्मत आजमा सकता है। देश में रेडियो जॉकी प्रशिक्षण पाठ्यक्रम मुहैया कराने वाले संस्थान कम ही हैं। हालांकि ब्रॉडकास्टिंग पाठ्यक्रम चलाने वाले संस्थानों की कमी नहीं है। जिन संस्थानों में इस तरह के पाठ्यक्रम चल रहे हैं, वहां एक सप्ताह के सर्टिफिकेट कोर्स से लेकर एक साल तक के पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कोर्स उपलब्ध हैं। इसके अलावा अल्प अवधि के क्रैश कोर्स भी उम्मीदवारों के लिए काफी उपयोगी होते हैं, जिसे करने के बाद इस क्षेत्र में पदार्पण किया जा सकता है। इस तरह की शिक्षा हासिल करते समय एक बात का विशेष ध्यान रखें कि प्रशिक्षण संस्थान में सिर्फ दाखिला मिल जाने या डिग्री हासिल कर लेने भर से रेडियो जॉकी नहीं बना जा सकता है। निरंतर अभ्यास और अनुभव से ही इस क्षेत्र में नाम और दाम कमाया जा सकता है।
प्रमुख संस्थान :
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू), नई दिल्ली
जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ ब्रॉडकास्टिंग, मुंबई
स्कूल ऑफ मीडिया एक्टिविटी रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी, पुणे –
मुंबई यूनिवर्सिटी, मुंबई
मुद्रा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, अहमदाबाद
स्कूल ऑफ ब्रॉडकास्टिंग एंड कम्युनिकेशन, मुंबई