आर्टिकल 370 हटाने के फैसले को SC में शेहला राशिद ने दी चुनौती

वेब डेस्‍क। पूर्व आईएएस शाह फैसल की पार्टी से जुड़ीं शेहला राशिद ने सोमवार को ट्वीट कर जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का ऐलान किया है.जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के फैसले को SC में चुनौती, समझें कहां फंसा है पेंच वकील मनोहर लाल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है.

नरेंद्र मोदी सरकार ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर को स्पेशल स्टेटस देने वाले संविधान का आर्टिकल 370 और 35A खत्म कर दिया है. लेकिन, इस बिल को लागू करने में फिलहाल अड़चनें हैं, क्योंकि आर्टिकल 370 हटाने के सरकार के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. वकील मनोहर लाल शर्मा ने कोर्ट में याचिका दायर की है. फिलहाल इस याचिका पर सुनवाई की तारीफ मुकर्रर नहीं की गई है.

वकील मनोहर लाल शर्मा ने अपनी याचिका में कहा है कि आर्टिकल 370 को हटाने के लिए सरकार ने आर्टिकल 367 में जो संशोधन किया है, वह असंवैधानिक है. सरकार ने मनमाने और असंवैधानिक ढंग से ये बदलाव किया. इसलिए सुप्रीम कोर्ट से अपील की गई है कि इस अधिसूचना को असंवैधानिक घोषित कर रद्द किया जाए.

वहीं, पूर्व आईएएस शाह फैसल की पार्टी से जुड़ीं शेहला राशिद ने सोमवार को ट्वीट कर इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का ऐलान किया है. शेहला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर सरकार को गवर्नर से और संविधान सभा को विधानसभा से बदलकर यह कदम उठाया गया है, जो संविधान के साथ धोखा है. उन्होंने इसे लेकर दूसरी पार्टियों से एकजुटता की अपील भी की.

क्या था आर्टिकल 370 और जम्मू-कश्मीर से इसके हटने के बाद क्या होगा असर!

क्या है प्रावधान?

>संविधान के आर्टिकल 370 (3) के मुताबिक, 370 को बदलने के लिए जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा की परमिशन जरूरी है. राज्य की संविधान सभा को साल 1956 में भंग कर दिया गया था. इसके ज्यादातर सदस्य भी अब जिंदा नही हैं.

>इसके अलावा संविधान सभा के भंग होने से पहले सेक्शन 370 के बारे में स्थिति भी साफ नहीं की गई थी. इसलिए ये स्पष्ट नहीं है कि जम्मू-कश्मीर आर्टिकल 370 स्थायी होगा या इसे बाद में खत्म किया जा सकता है.
>संविधान के जानकारों का कहना है कि सरकार आर्टिकल 370 पर कोई बदलाव जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा की सहमति से ही ले सकती है, चूंकि संविधान सभा भंग कर दी गई है. ऐसे में राज्य में चुनी हुई सरकार के अधिकार गवर्नर के पास होते हैं, लेकिन गवर्नर की सिफारिश पर राष्ट्रपति ने ये प्रावधान खत्म किया है.

>इस आर्टिकल के हटने का विरोध करने वाले इस प्रावधान का हवाला दे रहे हैं. उनकी दलील है कि क्या विधानसभा और संविधान सभा में कोई फर्क नहीं है? क्या गवर्नर का आदेश ही राज्य सरकार का आदेश माना जाएगा?

article 370 ये बिल राज्यसभा में पारित भी हो गया.

जम्मू-कश्मीर में क्या हुआ?
बता दें कि केंद्र सरकार ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 को निष्प्रभावी कर दिया. इसके साथ ही राज्य के पुनर्गठन का रास्ता साफ हो गया. गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक भी पेश कर दिया, जिसके तहत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाएगा. विधेयक राज्यसभा से पास हो गया है. इसके पक्ष में 125 और विरोध में 61 वोट पड़े. आज लोकसभा में इस बिल पर चर्चा और वोटिंग होनी है.

सरकार ने ऐसे कसी आर्टिकल 370 पर लगाम, इन प्रावधानों में किया संशोधन

इस फैसले पर क्या बोला पाकिस्तान
पाकिस्तान ने आर्टिकल 370 पर मोदी सरकार के कदम का विरोध किया है. कोई भी एकतरफा कदम कश्मीर का ‘स्टेटस’ नहीं बदल सकता. इस बीच कश्मीर के मौजूदा हालात पर चर्चा के लिए पाकिस्तान असेंबली ने मंगलवार को ज्वॉइंट सेशन भी बुलाया है. पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी करते हुए कहा, ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में जम्मू-कश्मीर की स्थिति को विवादास्पद माना गया है. लिहाजा भारत सरकार का ये एकतरफा फैसला है और ये फैसला जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान के लोगों को स्वीकार नहीं है.’

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