भ्रष्ट इंजीनियर के रिश्तेदारों की संपत्ति की होगी जांच

इंदौर। लोकायुक्त पुलिस लोक निर्माण विभाग के भ्रष्ट इंजीनियर (कार्यपालन यंत्री) धर्मेंद्र जायसवाल के परिजन की संपत्ति की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि पिछले 10 सालों में कोई संपत्ति खरीदी गई होगी तो जायसवाल के खिलाफ एक और केस दर्ज कराया जाएगा। इधर, अधिकारियों को जानकारी मिली है कि बुरहानपुर और दूसरी जगह पदस्थ रहे जायसवाल ने पैसा देकर अपना तबादला इंदौर करवाया है। इस बिंदु पर भी जांच की जा रही है।

लोकायुक्त पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि जायसवाल मूल रूप से सनावद का रहने वाला है। उसके भाई आज भी वहां पर खेती करते हैं। उसे सेवा में आए करीब 10 साल ही हुए हैं। हमने नगर निगम, रजिस्ट्रार कार्यालय, आईडीए, खरगोन रजिस्ट्रार के साथ बैंकों को भी पत्र लिखा है। उनसे जायसवाल, उसके पिता और भाइयों के नाम पर दर्ज संपत्ति के बारे में जानकारी मांगी गई है।

 

नौकरी की अवधि के दौरान संपत्ति खरीदी गई होगी तो जायसवाल के खिलाफ नया केस दर्ज कराया जाएगा। लोक निर्माण विभाग में पदस्थ लोकायुक्त के सूत्रों ने अफसरों का जानकारी दी है कि जायसवाल कार्यपालन यंत्री जैसी बड़ी पोस्ट पर भले ही तैनात था, लेकिन उसने भ्रष्टाचार के नए तरीके निकाल लिए थे। वह कई लोगों से यह भी कहता था कि उसने 35 लाख रुपए देकर इंदौर संभाग की यह बड़ी पोस्ट पर नियुक्ति पाई थी, इसलिए वह अपने हिसाब से काम करेगा। अधिकारी इस बिंदु पर भी जांच कर रहे हैं।

आत्महत्या की धमकी भी दी

 

सूत्रों ने बताया कि जब टीम जायसवाल के घर पहुंची तो वह टीम को लोकायुक्त में पदस्थ एक डीएसपी का नाम लेकर धमकाने लगा। इसके बाद टीम ने सख्ती की तो वह सामान्य हुआ। कुछ देर बाद जायसवाल बीमार हो गया था, देर रात उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। पकड़ाने के बाद वह टीम को आत्महत्या करने की धमकी भी दे रहा था।

कई बिंदुओं पर जांच चल रही है

 

ट्रेप के जिस मामले में शिकायत हुई थी, वह जायसवाल के पकड़ाने के साथ खत्म हो गया है। अब उसमें चालान पेश किया जाएगा। उसकी संपत्ति से जुड़े मामले की जांच की जा रही है। जरूरत पड़ने पर नया केस भी दर्ज किया जाएगा।