Breaking: घाटी में बड़े आतंकी हमले की आशंका के बाद अलर्ट, अमरनाथ यात्रा को रोका गया

श्रीनगर। जम्मू कश्मीर में आतंकी हमले की आशंका के मद्देनजर श्री अमरनाथ यात्रा को 13 दिन पहले ही रोक दिया गया है। गृह विभाग ने एक आदेश जारी करते हुए कश्मीर में आए श्री अमरनाथ के श्रद्धालुओं और पर्यटकों से कहा है कि वह मौजूदा कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द वापस अपने घरों को लौट जाए। ताजा जानकारी के मुताबिक, यात्रा मार्ग पर पाकिस्तानी बारूदी सुरंग और स्नाइपर मिलने के बाद यह कदम उठाया गया है। आपको बता दें कि श्री अमरनाथ यात्रा 15 अगस्त यानी रक्षाबंधन तक चलनी थी, लेकिन जहां पहले मौसम के कारण और अब आतंकवादी हमले की आशंका में यह रोक दी गई।

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर एक आदेश जारी करते हुए आतंकवादी अटैक की संभावना जताई है। ये इंटेलिजेंस इनपुट अमरनाथ यात्रा को लेकर जारी किया गया है। खुफिया इनपुट के बाद कश्मीर घाटी में आए सभी पर्यटकों और यात्रा में शामिल होने जा रहे सभी श्रद्धालुओं को पुलिस ने अर्लट कर दिया है। वहीं, अमरनाथ यात्रा रोक दी गई है और घुमने आए पर्यटकों को जल्द से जल्द वापस घर लौटेने के आदेश जारी किए गए है।

हालांकि, अब यह यात्रा फिर से कब शुरू की जाएगी इसे लेकर कोई अधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन संबधित अधिकारियों ने बताया है कि श्री अमरनाथ की वार्षिक तीर्थयात्रा को अगले आदेश तक बंद किया जा रह है।

राज्य में सभी प्रमुख विभागों को सिक्योरिटी एडवाइजरी जारी कर दिया गया है। जम्मू-कश्मीर गवर्नर, जम्मू-कश्मीर DGP और टूरिज्म डिपार्टमेंट को भी इसे लेकर जानकारी दी गई है।

बता दें कि श्री अमरनाथ की वार्षिक तीर्थयात्रा को जम्मू से करीब चार दिन पहले ही स्थगित कर दिया गया था जबकि बाल्टाल और पहलगाम के रास्ते से आज श्रद्धालुओं को कथित तौर पर आगे नहीं जाने दिया गया है।

पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला उमर अब्दुल्ला ने राज्य गृह विभाग द्वारा श्री अमरनाथ श्रद्धालुओं और पर्यटकों के नाम जारी एडवाइजरी पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह आदेश श्री अमरनाथ की यात्रा और पर्यटकों पर हमले के डर को ही नहीं बल्कि कश्मीर घाटी में पहले से जारी डर व खौफ के माहौल को भी बढ़ाएगा।

गौरतलब है कि कश्मीर घाटी में बीते एक सप्ताह के दौरान करीब 40 हजार अतिरिक्त केंद्रीय अर्धसैनिकबलों के आगमन से वादी में विभिन्न अफवाहों का दौर शुरु हो चुका है। इससे वादी में विभिन्न प्रकार की अटकलें जारी हैं।

केंद्रीय गृहमंत्रालय ने राज्य के विशेष दर्जे को भंग किए जाने की अफवाहों को बार बार निराधार बताते हुए कहा कि वादी में पहले से तैनात सुरक्षाबलों को हटाने की प्रक्रिया के तहत ही नए अर्धसैनिकबल भेजे जा रहे हैं।

इसके अलावा यह प्रक्रिया कानून व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखने और आतंकरोधी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए ही है। अलबत्ता, आज राज्य पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह और कश्मीर स्थित सेना की 15 कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने एक संयुक्त प्रैस वार्ता में श्री अमरनाथ की वार्षिक तीर्थयात्रा पर आतंकी हमलों के मंसूबों का खुलासा किया गया।

उन्होंने बताया था कि खुफिया सूचनाओं के आधार पर यात्रा मार्ग पर चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान एक आतंकी ठिकाने से सुरक्षाबलों ने पाकिस्तान में निर्मित बारुदी सुरंग, दो आइ्रईडी व अन्य हथियारों के अलावा अमरीका में निर्मित एम-24 स्नाईपर राइफल भी बरामद की गई।

वहीं, जिस समयस पुलिस महानिदेशक और कोर कमांडर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे, उस समय यात्रा मार्ग पर बालटाल से पवित्र गुफा तक सुरक्षा क्वच से सीआरपीएफ को हटाते हुए उसके स्थान पर बीएसएफ व एसएसबी के जवानों की तैनाती की प्रक्रिया शुरु कर दी गई थी।

चारों तरफ से हो रही थी फायरिंग लेकिन नहीं रोकी बस
अमरनाथ यात्रा 2019 पर मंडरा रहे आतंकी हमले ने 2017 अमरनाथ यात्रा के दौरान यात्रियों की बस पर बरसाई गई गोलियों का मनजर याद दिला दिया। 2017 में जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में अमरनाथ यात्रियों की बस पर हुए आतंकी हमले में 7 यात्रियों की मौत हो गई थी और 19 से ज्यादा घायल हुए थे। उस समय सिर्फ एक सलीम नामक ड्रायवर ने हिम्मत ना दिखाई होती तो मंजर और ज्यादा भयावह हो सकता था।

हमले को याद करते हुए ड्रायवर सलीम ने बताया था कि चारों तरफ से फायरिंग हो रही थी। खुदा ने हिम्मत दी और मैं बस चलाता रहा। हमले के बाद बस में सवार यात्रियों के बयान के अनुसार उनकी बस अनंतनाग से 2 किमी दूर पंचर हो गई थी जिसे बनाने में देर हो गई। जैसे ही बस निकली आतंकियों ने हमला कर दिया।

बस के एक यात्री के अनुसार वो लोग 5-6 की संख्या में थे और ताबड़तोड़ गोलियां बरसा रहे थे। हमने ड्रायवर से कहा की बस भगाता रह। वहीं एक अन्य यात्री योगेश के अनुसार बस निकलते ही अचानक गोलियां बरसनी शुरू हो गई और हमारे ड्रायवर सलीम ने हिम्मत दिखाते हुए बस नहीं रोकी। आतंकी मिलिट्री कैंप तक बस पर गोलियां दागते रहे। यह चमत्कार ही है कि इतने लोगों में से 7 लोगों की मौत हुई और बाकि बच गए।

पहले भी बाधित हुई यात्रा, एक नजर इनपर भी

  • आतंकवादियों की धमकी के कारण 1991 से 1995 तक यह वार्षिक तीर्थयात्रा बंद रही।
  • 2000 में कश्मीरी अलगाववादियों द्वारा तीर्थयात्रा पर अंधाधुंध गोलीबारी की गई, जिनमें 21 निहत्थे हिंदू तीर्थयात्री, 7 निहत्थे मुस्लिम नागरिक और 3 सुरक्षा बल अधिकारी सहित कुल 32 लोगों की जान चली गई थी।
  • 20 जुलाई 2001 को, एक आतंकवादी ने अमरनाथ मंदिर के पास शेषनाग में तीर्थयात्री शिविर पर ग्रेनेड फेंका, जिसमें दो विस्फोटों में 3 महिलाओं सहित कम से कम 13 लोग मारे गए। गोलीबारी भी की गई, इसमें 15 लोग घायल भी हो गए थे।
  • 30 जुलाई और 6 अगस्त 2002 को लश्कर-ए-तैयबा के एक समूह अल मंसूरियान के आतंकवादियों ने दो अलग-अलग घटनाओं को अंजाम दिया।