OMG: पिता ने छुड़वा दिया स्कूल ताकि बेटा खेल सके video games

Advertisements

सिडनी। दुनिया भर के माता-पिता इस बात को लेकर परेशान हैं कि उनके बच्चे फोर्टनाइट जैसे लोकप्रिय वीडियो गेम खेलने के लती हो गए हैं। वे काफी समय कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बिता रहे हैं और उन्हें इस लत से कैसे छुड़ाया जाए। मगर, कनाडा में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक पिता ने अपने बेटे जॉर्डन के ई-स्पोर्ट करियर को देखते हुए उसका स्कूल छुड़वा दिया है।

सूडबरी के रहने वाले 49 वर्षीय उद्यमी डेब हर्जोग के इस कदम से विवाद खड़ा हो गया है। उनका कहना है कि जॉर्डन ज्यादा से ज्यादा समय वीडियो गेम के लिए दे इसके लिए उसे समय की जरूरत थी, लिहाजा मैंने उसका स्कूल छुड़वा दिया है। खुद भी गेमर रहे डेव का दावा है कि जब जॉर्डन महज तीन साल का था, तो उसने अपने बेटे के हाथों में एक गेमिंग कंट्रोलर दिया और उसे यह दिखाने में देर नहीं लगी कि उसे गेमिंग के लिए एक सच्चा उपहार मिला है।

7 साल की उम्र में वह कुशल हेलो खिलाड़ी बन चुका था और 10 साल की उम्र में वह पहले से ही स्थानीय गेमर्स पर भारी पड़ने लगा था। मगर, जब जॉर्डन ने अपना पहला हेलो टूर्नामेंट जीता, जिसने बाद उसे 2,000 डॉलर मूल्य के गेमिंग परिधान मिले, तो मुझे एहसास हुआ कि मेरा बेटा इसमें से करियर बना सकता है। इसके बाद उसके जीतने का सिलसिला जारी रहा।

16 वर्षीय जॉर्डन पहले ही दुनिया के सबसे सफल फोर्टनाइट खिलाड़ियों में से एक है। इस साल उसने दुनिया भर के 200 अन्य खिलाड़ियों के साथ विश्व फोर्टनाइट चैम्पियनशिप के लिए क्वालीफाई करने के साथ ही 30 मिलियन डॉलर का इनाम साझा किया है। मगर, जब उनके पिता दावा करते हैं कि उनके पास गेमिंग के लिए प्रकृति से मिला सहज उपहार है, तो उनकी सफलता सिर्फ प्रतिभा से ही नहीं मिली है। जॉर्डन रोजाना 8 से 10 घंटे फोर्टनाइट खेलता है।

वह लंबे समय तक अपने कंप्यूटर के सामने बैठा रहता है और वहीं खाना खाता है, ताकि वह YouTube वीडियो देख सके और अपने साथियों के साथ बात कर सके, और ऑनलाइन स्कूल की कक्षाओं में भाग ले सके। लिहाजा, वह कीबोर्ड से बहुत दूर नहीं जाता है। इसे देखते हुए डेव ने पिछले साल जॉर्डन को स्कूल से निकाल लिया था, जिसका शुरुआत में उसकी मां ने विरोध किया था।

इस फैसले को लेकर काफी विरोध भी हुआ था। लोगों ने उन पर चाइल्ड एब्जूजिंग का आरोप भी लगाया, जिस पर डेव ने कहा कि यह सिर्फ नजरिये का मामला है। यदि यह कोई खेल होता, या पियानो बजाना होता, तो लोग इसे आराम से स्वीकार कर लेते। मगर, यह वीडियो गेम है, तो लोग कह रहे हैं कि यह बुराई है। मगर, डेव को अपने फैसले पर पछतावा नहीं है। उन्होंने जॉर्डन के पुराने स्कूल को ई-मेल लिखकर बताया कि डेव ने कितनी राशि जीती है।

Advertisements