सरकार ने राज्यसभा में तोड़ा विपक्ष का वर्चस्व, RTI विधेयक हुआ पारित

नई दिल्ली। सोलहवीं लोकसभा में सरकारी विधेयकों के लिए बड़ी बाधा रही राज्यसभा में गुरुवार को सरकार ने विपक्षी एकजुटता का तानाबाना तोड़ दिया। एक दिन पहले ही कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने आरटीआई, तीन तलाक सहित सात विधेयकों का रास्ता रोकने की रणनीति तैयार की थी। लेकिन जब वक्त आया तो रणनीति ध्वस्त हो गई।

बीजेडी और टीआरएस ने सरकार का साथ देकर आरटीआइ संशोधन विधेयक पारित करा दिया। इसके साथ ही अब यह अटकल तेज हो गई है कि तीन तलाक सहित कुछ दूसरे विधेयकों पर भी विपक्ष का अब तक का बहुमत अल्पमत में बदल सकता है।

एक दिन पहले ही विपक्ष की रणनीति तय हुई थी और उसमें हस्ताक्षर करनेवालों में बीजेडी और टीआरएस भी था। अपुष्ट सूत्रों के अनुसार संभवत: प्रधानमंत्री ने ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से बात की और फिर बीजेडी का रुख बदल गया। दो दिन पहले लोकसभा में दोनों दलों ने विधेयक का विरोध किया था। राज्यसभा में विधेयक के समर्थन में 117 मत पड़े, जबकि विरोध में सिर्फ 75 मत पड़े।

हालांकि कांग्रेस सहित दूसरे विपक्षी दलों ने इस बीच हंगामे का कोई मौका नहीं छोड़ा। वोटिंग के बाद भी हार देख वह सदन से वाकआउट कर गए। लेकिन यह कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है। अब तीन तलाक विधेयक राज्यसभा में आना है।

जदयू इसके विरोध में है लेकिन बीजेडी समर्थन में। देखना होगा कि सरकार उस विधेयक पर विपक्ष की रणनीति को कैसे तोड़ेगी। ध्यान रहे कि राज्यसभा में फिलहाल राजग और विपक्ष के संख्याबल में बहुत कम अंतर रह गया है और थोड़े बदलाव से ही पूरा परिदृश्य बदल जाएगा।

इससे पहले सरकार ने आरटीआइ विधेयक को लेकर विपक्ष की सारी आशंकाओं का एक-एक करके जवाब दिया और कहा कि इस संशोधन के जरिए सिर्फ सेवा शर्तो और वेतन-भत्तों में बदलाव किया जा रहा है।

साथ ही यह भी स्पष्ट किया जा रहा है, कि मुख्य सूचना आयुक्त का दर्जा सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश या मुख्य चुनाव आयुक्त जैसा नहीं है। मौजूदा कानून के तहत मुख्य सूचना आयुक्त का दर्जा सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के बराबर रखा गया था।

केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि इस संशोधन से आरटीआई की स्वायत्ता और अधिकारों में किसी भी तरह की कोई आंच नहीं आएगी।

राज्यसभा में कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद ने सरकार को लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाया और कहा कि वह संसद को भी सरकार की तरह चलाना चाहते है। उन्होंने कहा कि ऐसी सरकार से उन्हें कोई भरोसा नहीं है। कांग्रेस इस पूरे मामले पर इसलिए भी नाखुश थी, क्योंकि वह विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजने को लेकर अड़ी हुई थी, पर सरकार ने उसकी बात नहीं मानी।

लोकसभा में सूचना का अधिकार विधेयक पहले ही पारित हो चुका है। ऐसे में यह इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। जहां से मंजूरी मिलने के बाद कानून का रूप ले लेगा।

सरकार ने राज्यसभा में तोड़ा विपक्ष का वर्चस्व, RTI विधेयक हुआ पारित