Online Fraud : ऑनलाइन ठग्स से ग्वालियर ही नहीं पूरा हिंदुस्तान परेशान, हो जाएं सतर्क

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ग्वालियर। सोशल मीडिया का दखल तेजी से आम इंसान की जिंदगी में बढ़ रहा है, मगर वह ठगी का भी शिकार हो रहा है। क्योंकि जब वह अपने दैनिक कार्यों को पूरा करने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पहुंचता है तो उसके सामने ऐसी कई लिंक आ ही जाती है, जिनमें छिपे होते हैं ढेर सारे प्रलोभन भरे ऑफर। वह कम पैसे में जरूरत करने के लिए अपने लिए कुछ न कुछ ऑनलाइन मंगा तो लेता है, लेकिन जब डिलिवर हुए पैकेट को खोलकर देखता है तो या तो वह डिब्बा खाली होता है या फिर उसमें पॉलीथिन की कतरन या कागज के टुकड़े निकलते हैं।

इसके बाद परेशान खरीदार अपनी समस्या का निवारण पाने के लिए साइबर सेल अथवा उपभोक्ता फोरम में पहुंचता है। यहां भी उसे निराकरण कम समय में नहीं मिलता। इस मामले को लेकर जब ‘नईदुनिया लाइव ने विशेषज्ञों से बात की तो उन्होंने बताया ऑनलाइन धोखाधड़ी या फिर ठगी करने वाले व्यक्ति का कोई चेहरा नहीं होता है। वह पड़ोसी भी हो सकता है, सात समंदर पार का भी हो सकता है।

कोई भी व्यक्ति ठगी करने के लिए वेबसाइट डवलप करा सकता है। जिनसे बचने का तरीका है, सोशल साइट्स पर शो होने वाली लिंक को ओपन नहीं किया जाए और ऑनलाइन शॉपिंग भी भरोसेमंद साइट्स से ही की जाए। ठगी से सिर्फ ग्वालियर के लोग ही नहीं अन्य शहरों के रहवासी भी परेशान हैं।

ठगने के एक नहीं, कई हैं तरीके

कॉलेज स्टूडेंट (अमर परिवर्तित नाम) ने फूड सर्विस एप से फूड ऑर्डर किया था। ऑर्डर देने के साथ ऑनलाइन पेमेंट भी कर दिया था। लेकिन किसी वजह से ऑर्डर डिलिवर नहीं हुआ। उसके बाद अमर ने उसकी फूड सर्विस ऐप के कस्टमर केयर नंबर गूगल से लिया और कॉल किया। कॉल पर एक व्यक्ति से कहा कि आपको एक लिंक भेज रहा हूं। उस लिंक को ओपन कर अपनी डीटेल दे दीजिए। मयूर ने ओएलएक्स पर अपना सामान की पिक्चर बेचने के लिए डाली थी और डीटेल भी अपलोड की। ऐसे में ठग ने उन्हें कॉल किया और उनके सामान को ज्यादा पैसों में खरीदने को कहा। इससे मयूर लालच आ गया।

मयूर को ठग ने कहा कि मैं आपको एक लिंक भेज रहा हूं। उसके माध्यम से आपके पैसे आपके एकाउंट में पहंुच जाएंगे। ठग की बात को मानते हुए मयूर ने अपनी बैंक की सारी डीटेल लिंक ओपन करके फिल कर दी। रीना ब्यूटी पार्लर चलाती हैं। इनके पास एक व्यक्ति का कॉल आया उसने रीना से कहा कि मेरी पत्नी आपके पॉर्लर पर आ रही है। उसको जो चाहिए वो दे देना मैं आपके एकांउट में पैसे ट्रांसफर कर देता हूं। काम से पहले ही से डील रीना को ठीक लगी, उसने हां कर दिया। इसके बाद ठग ने रीना से कहा एक लिंक और भेज रहा हूं। आप अपनी डीटेल भेज दीजिए। मैं आपके एकांउट में पैसे डाल देता हूं।

ऐसे बच सकते हैं ठगों से

-जब कोई व्यक्ति फोन कर आपसे आपकी पर्सनल डीटेल मांगे तो बिल्कुल न दें। आरबीआई ने सभी बैंकरों को मना किया है कि वे किसी व्यक्ति से फोन पर बैंक संबंधी बात न करें।

– आप किसी एप्लीकेशन के माध्यम से कोई लिंक पर डिटेल भरते हैं तब कई अलर्ट और अन्य तरह के जानकारी वाले मैसेज आते हैं। उन्हें बिना पढ़ें ओके न करें।

– अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी हुई लिंक के इंस्ट्रक्शन फॉलो न करें।

– अक्सर ठग खुद को सही साबित करने के लिए आर्मीमेन, बैंकर, पुलिसमेन आदि सरकारी सर्विस मैन के आईडी कार्ड को दिखाकर गुमराह कर सकते हैं। इसलिए किसी भी तरह के आईडी कार्ड पर भरोसा न करें। अपनी समझदारी से काम लें।

तेजी से बढ़ रहे हैं धोखाधड़ी के मामले

2016 में ठगी के 110 केस राज्य साइबर पुलिस के पास गए। 2017 में ठगी के 260 केस राज्य साइबर पुलिस के पास गए। 2018 में ठगी के 75 केस राज्य साइबर पुलिस में दर्ज हुए

इनसे हो रहा फ्रॉड: लिंक, ओटीपी भेजकर, एटीएम लोन, गूगल पे, फोन पे, पेटीएम, टेक्स्ट मैसेज, कॉल आदि से ठगी हो रही है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

जैसे-जैसे टेक्नोलॉनी बढ़ रही है ऑनलाइन धोखाधड़ी के केसेस में वृद्धि हो रही है। यह समय लोगों के अवेयर हो का हो। धोखाधड़ी के लिए ठग ने अपना प्लेटफॉर्म फेसबुक को बना लिया है। वहां पर वह यूजर्स से दोस्ती करता है और उसे कई लालच देता है।

सुधीर अग्रवाल, पुलिस अधीक्षक राज्य साइबर पुलिस

नहीं होता निराकरण कुछ सालों से ऑनलाइन ठगी के मामलों में वृद्धि हुई है। इसका निराकरण होने में कम से कम तीन साल तक का समय लगता है। लंबी प्रक्रिया चलने से लोग ठगी को भूल जाते हैं। बेहतर है लोग शॉपिंग करते समय सावधानी बरतें। भरोसेमंद लिंक पर ही शॉपिंग के लिए क्लिक करें।

-मुकेश गुप्ता, अभिभाषक, उपभोक्ता फोरम

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