जब बोले राहुल गांधी नहीं चाहिए कांग्रेस अध्यक्ष पद, कार्यकर्ताओं ने किया विरोध प्रदर्शन

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नई दिल्ली। कांग्रेस के अंदर से पड़ रहे चौतरफा दबावों को दरकिनार करते हुए राहुल गांधी ने पार्टी अध्यक्ष बने रहने के आग्रह को एक बार फिर ठुकरा दिया है। राहुल ने पार्टी को सार्वजनिक रूप से कह दिया है कि अध्यक्ष पद छोड़ने के अपने इरादे पर वे अडिग हैं। कांग्रेस कार्यसमिति में की गई इस्तीफे की पेशकश को महीने भर बाद दोहरा कर राहुल ने स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी को नये अध्यक्ष का विकल्प तलाशना ही होगा।

लोकसभा में कांग्रेस के सांसदों की बुधवार को हुई बैठक के दौरान राहुल के अलावा सभी 51 सांसदों ने उनसे अध्यक्ष पद पर बने रहने की अपील की। कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी की मौजूदगी में सुबह हुई इस बैठक के दौरान वरिष्ठ नेता शशि थरूर और मनीष तिवारी ने राहुल गांधी से अध्यक्ष पद पर बने रहने का आग्रह किया।

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इनका कहना था कि कांग्रेस के पास नेतृत्व के लिए इस वक्त राहुल गांधी से बेहतर चेहरा नहीं है। जहां तक लोकसभा चुनाव में हार की जिम्मेदारी का सवाल है तो यह अकेले उनकी नहीं बल्कि पार्टी के सभी लोगों की सामूहिक जिम्मेदारी है। ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना का निर्णय पार्टी के हित में नहीं है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार कांग्रेस अध्यक्ष से इस्तीफा का इरादा छोड़ने के थरूर और तिवारी के आग्रह के बाद सभी सांसदों ने एक सुर से राहुल से पद पर बने रहने की अपील की। इन सांसदों ने यह भी कहा कि कांग्रेस का शिखर नेतृत्व खासकर गांधी परिवार शुरू से भाजपा के निशाने पर रहा है।

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इसी रणनीति के तहत उनके खिलाफ राजनीतिक दुष्प्रचार किया गया है। ऐसे में राहुल अध्यक्ष पद छोड़ते हैं तो यह भाजपा के जाल में फंसने जैसा होगा। इस्तीफे का इरादा छोड़ने के सांसदों के बढ़ते दबाव को भांप राहुल गांधी ने तत्काल इस मुद्दे को यह कहते हुए थाम लिया कि लोकसभा सांसदों की यह बैठक इस पर चर्चा का उचित फोरम नहीं है।

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