आतंक फैलाने लौट आया मसूद अज़हर का पुराना साथी, गृहमंत्री की बेटी का किया था अपहरण

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जम्मू।जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में हुए एक आतंकवादी हमले में सीआरपीएफ के 5 जवान शहीद हो गए. इस दौरान सुरक्षाबलों ने एक आतंकवादी को भी मार गिराया है. CRPF अधिकारियों के मुताबिक यह हमला केपी जनरल बस स्टैंड के पास हुआ. वाहन में बैठे आतंकवादी ने सुरक्षाबलों पर अचानक गोली चलानी शुरू कर दी. सीआरपीएफ के जवानों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ड्यूटी पर तैनात किया गया था. घायल जवानों को अस्पताल में भर्ती किया गया है
इस हमले में crpf के एएसआई नेहरू शर्मा, कॉन्सटेबल सतेन्द्र शर्मा, कॉन्सटेबल एमके कुशवाहा शहीद हो गए हैं. घायलों में एसएचओ अनंतनाग अरशद अहमद की हालत गंभीर बताई जा रही है. उन्हें उपचार के लिए श्रीनगर ले जाया गया है
जबकि केदार नाथ, राजेंद्र सिंह का अनंतनाग के जिला अस्पताल में उपचार चल रहा है. हमले में 18 वर्षीय एक स्थानीय महिला भी घायल हुई है, जिसकी पहचान सनोबर जैन के तौर पर हुई है. इस हमले की जिम्मेदारी अल-उमर-मुजाहिदीन आतंकी गुट ने ली है.

20 साल बाद मजबूत हुआ है अल-उमर-मुजाहिदीन का सरगना मुश्ताक अहमद जरगार
संगठन अल-उमर-मुजाहिदीन, जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट का ब्रेक अवे फैक्शन है जो कि 1989 में उससे अलग हुआ था. पिछले कई सालों से यह संगठन लगभग निष्क्रिय था और इस हमले का अब वह दावा कर रहा है. खुफिया एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक इस तरीके के हमले कर आतंकी अमरनाथ यात्रा से पहले घाटी में अपनी सशक्त मौजूदगी का दर्ज कराने की फिराक में है
कश्मीर न्यूज एजेंसी GNS के मुताबिक, अल उमर मुजाहिदीन आतंकी गुट का मुखिया मुश्ताक अहमद जरगार है. जरगार का आतंकी संगठन पाकिस्तान से रन करता है. छूटने के बाद से जरगार शांत था लेकिन 20 सालों बाद वह फिर से सक्रिय हो चुका है.

मसूद अज़हर का पुराना साथी है मुश्ताक
जिन आतंकियों को कंधार कांड के बाद भारत को रिहा करना पड़ा था, उनमें जरगार भी शामिल था. जरगार को भी मसूद अज़हर के साथ रिहा किया गया था. 1999 में एक भारतीय फ्लाइट IC 814 को हाईजैक करके अफगानिस्तान के कंधार ले जाया गया था और फ्लाइट के यात्रियों की रिहाई के बदले कई आतंकियों को रिहा करने की मांग की गई थी. 1999 में हुई इसी घटना को कंधार कांड के नाम से जाना जाता है

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