दिग्विजय के खिलाफ साध्वी प्रज्ञा होंगी भाजपा प्रत्याशी, आज हो सकती है नाम की घोषणा

भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह को भोपाल सीट पर घेरने के लिए भाजपा साध्वी प्रज्ञा पर दांव खेल सकती है। चर्चा है कि साध्वी प्रज्ञा के नाम पर राष्ट्रीय नेतृत्व से लेकर प्रदेश स्तर तक सहमति दी जा चुकी है। इनके नाम की आधिकारिक घोषणा आज की जा सकती है।
साध्वी प्रज्ञा मालेगांव ब्लास्ट के बाद सुर्खियों में आई थीं। जिसके बाद उन्हें लंबी कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ा था। प्रज्ञा की उम्मीदवारी को लेकर पार्टी ने भोपाल के स्थानीय नेताओं को सूचना भी दे दी है।
प्रज्ञा के नाम पर सहमति बनाने में संघ की अहम भूमिका
कहा जा रहा है कि साध्वी प्रज्ञा के नाम पर सहमति बनाने में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अहम भूमिका निभाई। इसके लिए संघ ने पहले प्रदेश स्तर के सभी नेताओं को साधा। भोपाल सीट से शिवराज सिंह चौहान, उमा भारती, नरेंद्र सिंह तोमर, आलोक शर्मा और वीडी शर्मा का नाम भी प्रत्याशी के रूप में चर्चा में रहा था।

बता दें की भोपाल लोकसभा सीट पर 12 मई को मतदान होना है। इस सीट से वर्तमान सांसद भाजपा के आलोक संजर हैं। इसे भाजपा का गढ़ माना जाता है। 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट से वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के चुनाव लड़ने की चर्चा थी। लेकिन, बाद में आडवाणी ने गांधीनगर सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ा।
अबतक अनसुलझे हैं भोपाल के ये मुद्दे

अंतरराष्ट्रीय विमान सेवा
पिछले दिनों विमान यातायात के विस्तार की मांग करते हुए करीब 40 हजार लोगों ने एक प्रदर्शन रैली का आयोजन किया गया था। उनकी मांग थी कि भोपाल एयरपोर्ट से पुणे, चेन्नई और लखनऊ के अलावा अंतरराष्ट्रीय सेवाओं की भी शुरुआत की जाए। लंबे समय से यहां के लोग विकास के कई पैमानों से वंचित रहे हैं। भोपाल के दो बड़े और लोकप्रिय तालाब की शहर में अपनी पहचान है।
रोजगार
शहर में वहीं की कंपनी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड के कई कारखाने हैं। शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित इंडस्ट्रियल एरिया में प्रॉक्टर एंड गैंबल, ईचर एंड लुपिन जैसी कई बड़ी कंपनियों के कारखाने हैंं, जिससे लोगों के रोजगार की संभावनाएं बढ़ती हैं। भोपाल के विकास में 80 के दशक में यूनियन कार्बाईड फैक्ट्री में हुए गैस कांड ने गहरी चोट पहुंचाई। इस कांड के बाद भारी संख्या में लोगों की मौत और गंभीर बिमारियों के कारण शहर के विकास की गति धीमी हो गई।
औद्योगिक विकास
यहां के लोगों का कहना है कि मध्य प्रदेश की राजधानी होने के बावजूद यहां बड़े पैमाने पर औद्योगिक विकास नहीं है। जबकि इंदौर और उसके आसपास के इलाकों में लोगों के लिए बेहतर विकल्प और सुविधाएं हैं।