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VIDEO- कैमोर में समीप से उड़ रहे विमान को लेकर दहशत, जानिए क्‍या है पूरा मामला

कटनी, कैमोर। आकाश में काफी कम ऊचाई पर उड़ते हुए क्षेत्र के कई चक्कर लगाने वाला एक हवाई जहाज इन दिनों लोगों के आश्चर्य और कौतूहल का केंद्र बना हुआ है। सुबह 7 बजे के आस-पास से इस हवाई जहाज की गड़गड़ाहट लोगों को घरों के भीतर ही सुनाई देने लगती है और हवाई जहाज को देखने लोग घरों से बाहर निकल आते हैं। आस-पास के अनेक क्षेत्रों में यह हवाई जहाज पिछले चार-पांच दिनों से अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है।

कई बार तो हवाई जहाज जमीन के इतने करीब से गुजरता है कि उस पर लिखे शब्द भी नजर आने लगते हैं। शुरू-शुरू में इस हवाई जहाज की गतिविधियों ने लोगों के मन में हवाई हमले की आशंका भर दी थी पर अब यह आशंका खत्म हो गई है। अलबत्ता सुबह से ही कैमोर विजयराघवगढ़ और आस-पास के क्षेत्र में चक्कर लगाने वाला यह हवाई जहाज अभी भी लोगों के कौतूहल का विषय बना हुआ है।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार न केवल कटनी जिला बल्कि पड़ोसी सतना, रीवा, सीधी, सिंगरौली, पन्ना, शहडोल आदि जिलों में प्रचूर मात्रा में खनिजों का भंडार है। अनेक बेशकीमती खनिज धरा के गर्भ में विद्यमान है। लाइम स्टोन, आयरन ओर, बाक्साइड, मार्बल जैसे अनेक खनिजों की मौजूदगी के बाद इनका उत्खनन हो रहा है पर अभी भी ऐसे कई खनिज हैं जिनके बारे में पता नहीं लगा सका है। पूर्व में हुए सर्वे के दौरान कटनी और सीधी जिले में कुछ स्थानों पर स्वर्ण भंडार और कच्चा तेल जमीन के भीतर पाये जाने के संकेत मिले थे। अब इन्हीं संभावनाओं के आधार पर जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा इन जिलों में इस तरह के मूल्यवान खनिजों का पता लगाया जा रहा है। विशेष रूप से कच्चे तेल और स्वर्ण भंडार को लेकर भारतीय जियोलॉजिकल विभाग उत्सुक है और इनका पता लगाने का जिम्मा बैंगलोर की एक निजी कंपनी को सौंपा गया है।

रीवा के चोरहटा से उड़ान शुरू करता है विमान
बताया गया कि बैंगलोर की सर्वे करने वाली कंपनी के अधिकारियों ने इन दिनों रीवा को अपना ठिकाना बना रखा है। रीवा के चोरहटा हवाई पट्टी से इस कंपनी का एक छोटा विमान सुबह सुबह ही उड़ान भरता है जो पूरे क्षेत्र का चक्कर लगाता रहता है। जानकारी में यह भी बताया गया कि यह विमान जमीन के 80 मीटर ऊपर तक उड़ान भरने में सक्षम है। यह विमान जिस अत्याधुनिक टेक्रोलाजी से लैस है उससे जमीन के गर्भ में लगभग 8 किलोमीटर की गहराई तक उपलब्ध खनिजों का पता लगाया जा सकता है। उसकी तस्वीरें ली जा सकती हैं। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा देश के अन्य हिस्सों में भी इस तरह के सर्वे कराये गये हैं। वर्तमान में यह सर्वे मध्यप्रदेश के विंध्य क्षेत्र में किया जा रहा है। इसे मैग्रेटिक हवाई सर्वे के नाम से जाना जाता है।

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