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MP: महाकौशल और विंध्य में बागियों ने किया BJP की नाक में दम

भोपाल। मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तरह लोकसभा चुनाव में भी भाजपा को बागियों और असंतुष्टों से जूझना पड़ रहा है। पार्टी के लिए चिंता की बात यह है कि संगठन द्वारा की जा रही मान-मनौव्वल की कोशिशें कामयाब नहीं हो पा रही हैं। बालाघाट-सिवनी संसदीय क्षेत्र में सांसद बोधसिंह भगत पार्टी से इस्तीफा देकर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में बतौर चुनाव मैदान में उतर गए। शहडोल संसदीय क्षेत्र में सांसद ज्ञानसिंह ने पर्चा तो नहीं भरा लेकिन भाजपा प्रत्याशी हिमाद्री सिंह के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है। सीधी, सतना में भी असंतुष्ट पार्टी के लिए परेशानी बने हुए हैं। यहां असंतुष्टों से भितरघात का खतरा बना हुआ है।

रीति पाठक का विरोध

सीधी में सांसद रीति पाठक को दोबारा टिकट दिए जाने के खिलाफ समूचे संसदीय क्षेत्र में नाराजगी है। सिंगरौली के जिलाध्यक्ष कांतिदेव सिंह, सिंगरौली विकास प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष गिरीश द्विवेदी, जिला पंचायत के अध्यक्ष अजय पाठक नाराज हैं। सीधी के पूर्व जिलाध्यक्ष लालचंद गुप्ता ने तो पार्टी छोड़ कांग्रेस का दामन थाम लिया है। पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष देवेंद्र सिंह चौहान ने भी भाजपा छोड़ कांग्रेस ज्वाइन कर ली। सीधी के जिलाध्यक्ष डॉ. राजेश मिश्रा भी पाठक से खुश नहीं हैं। इसी संसदीय क्षेत्र के पूर्व सांसद गोविंद मिश्रा पार्टी छोड़ने का एलान कर चुके हैं। वरिष्ठ विधायक केदार शुक्ला भी रीति की नामांकन रैली में शामिल नहीं हुए। वजह कुछ भी बताई जाए लेकिन इन नेताओं को प्रत्याशी पसंद नहीं है।

सतना में ओबीसी, सवर्ण दोनों नाराज

सतना में सांसद गणेश सिंह का विरोध हो रहा है। यहां का ओबीसी वोटबैंक भी सिंह से नाराज है। इसकी वजह है कि सिंह के भाई उमेश प्रताप सिंह जिला पंचायत के सदस्य हैं और इनकी पत्नी सुधा सिंह जिला पंचायत की अध्यक्ष हैं। गणेश सिंह पर परिवारवाद का आरोप है। सुभाष शर्मा, बम बम महाराज, धीरज पांडे सहित कई नेता नाराज चल रहे हैं। वहीं दो विधायक नारायण त्रिपाठी और विक्रम सिंह, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष गगनेंद्र सिंह भी मन से साथ नहीं हैं। इसी नाराजगी को लेकर रश्मि पटेल ने भी भाजपा छोड़ी।

डेमेज कंट्रोल टीम निष्क्रिय

भाजपा ने लोकसभा चुनाव में डेमेज कंट्रोल के लिए चार नेताओं की टीम बनाई है, जिसे असंतुष्टों से बातचीत करने की बागडोर सौंपी गई थी। इनमें वरिष्ठ नेता और प्रदेशाध्यक्ष रहे विक्रम वर्मा, प्रदेश संगठन महामंत्री रहे कृष्णमुरारी मोघे, माखन सिंह और भगवत शरण माथुर को शामिल किया गया था। पर पार्टी में टिकट से वंचित नेता और असंतुष्टों ने विरोध शुरू कर दिया है। पार्टी ने शहडोल सांसद ज्ञानसिंह को मनाने की जिम्मेदारी पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को सौंपी लेकिन चौहान ज्ञान सिंह को मनाने में सफल नहीं रहे। संगठन महामंत्री सुहास भगत से लेकर नरोत्तम मिश्रा और प्रभात झा ने बालाघाट सांसद बोध सिंह को मनाने की कोशिश की पर कामयाब नहीं रहे।

विधानसभा चुनाव में भी मुसीबत बने थे बागी

भाजपा ने कार्यकर्ताओं की नाराजगी भांपकर विधानसभा चुनाव से पहले 23 बड़े नेताओं की टीम सारे जिलों में भेजी थी। इन नेताओं ने कार्यकर्ताओं से बातचीत की और संगठन को रिपोर्ट भी सौंपी पर उस रिपोर्ट पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। नतीजा ये हुआ कि विधानसभा चुनाव में कई बागी होकर चुनाव लड़े। कई ने पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ काम किया। संगठन स्तर पर अंत तक कोई कारगर उपाए नहीं निकाले गए।

इनका कहना है

भाजपा नेतृत्व द्वारा पार्टी की निधारित प्रक्रिया के तहत सभी से लगातार बातचीत की जा रही है। पार्टी अभी भी संभावनावान है कि हमारे लोग व्यक्तिगत आग्रह छोड़कर संगठन के निर्णय को स्वीकार कर नरेंद्र मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाने के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे।

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