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UP की राजनीति में किस्मत आजमाने वाले थर्ड जेंडर पर एक नजर

प्रयागराज डेस्‍क। हाल के दिनों में सरकार थर्ड जेंडर को लेकर काफी गंभीर नजर आई इसकी बानगी लोकसभा चुनावों में भी देखने को मिली. इस बार के चुनावों में यूपी से 5 किन्नर नेता ऐसे हैं जिन्हें लेकर लोगों में उत्सुकता है.

लोकसभा चुनावों के शुरू होते ही यूपी के सियासी अखड़े में हलचल मच गई है. एक के बाद जहां लगभग सारी राजनीतिक पार्टियां ने अपने उम्मीदवार घोषित कर रही हैं वहीं नेता ऐसी भी हैं जो लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गए हैं. हाल के दिनों में सरकार थर्ड जेंडर को लेकर काफी गंभीर नजर आई इसकी बानगी लोकसभा चुनावों में भी देखने को मिली. इस बार के चुनावों में यूपी से 5 किन्नर नेता ऐसे हैं जिन्हें लेकर लोगों में उत्सुकता है.

यूपी की प्रयागराज लोकसभा सीट से आम आदमी पार्टी ने किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर भवानी नाथ वाल्मीकि (भवानी मां) को टिकट देने की घोषणा की है. भवानी मां कुंभ के दौरान चर्चा में आईं क्योंकि हाल ही में संपन्न हुए कुंभ में पहली बार किन्नर अखाड़े को भी जगह मिली थी. वह, किन्नर अखाड़ा आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी के बाद दूसरे स्थान पर आती हैं.

हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुईं किन्नर गुलशन बिंदु प्रियंका गांधी से काफी प्रभावित हैं. साल 2012 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय के तौर पर गुलशन ने 20 हजार वोट हासिल किए थे. वह ये चुनाव तो नहीं जीत पाईं, लेकिन भाजपा प्रत्याशी लल्लू सिंह की हार का कारण बनीं.

यूपी के दबंग किन्नरों में आशा देवी का नाम लोकप्रिय है. 2001 के नगर निगम चुनाव में गोरखपुर से किन्नर आशा देवी उर्फ अमरनाथ ने जीत हासिल की थी. निर्दलीय आशा देवी ने सपा प्रत्याशी अंजू चौधरी को 60 हजार वोटों से पराजित किया

2002 के विधानसभा चुनाव में किन्नर पायल ने लखनऊ पश्चिम की सीट से भाजपा के धुरंधर नेता लालजी टंडन को चुनौती दी थी.


राजनीति में रायबरेली की पहचान कांग्रेस के गढ़ के तौर पर है. साल 2017 में हुए रायबरेली नगर पालिका चुनाव में जन अधिकार पार्टी से किन्नर पूनम चुनाव लड़ चुकी हैं. इस दौरान पूनम ने नगर पालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई थी.

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