दिलचस्प: अब राहुल भी वर्धा से करेंगे चुनाव प्रचार की शुरुआत! आखिर क्यों?


कांग्रेस ने यहां पर अब अपनी जमीन लगभग खो दी है. यहां पर 1998 में कांग्रेस को विजय मिली थी जब उसके उम्मीदवार दत्ता मेघे चुनाव जीते थे.

प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने महाराष्ट्र में अपने चुनावी अभियान की शुरुआत 1 अप्रैल को वर्धा से की और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी 5 अप्रैल को वर्धा से ही महाराष्ट्र में अपने चुनावी अभियान की शुरुआत करने वाले हैं. क्यों इतना महत्त्वपूर्ण है वर्धा शहर और क्यों यह सीट माना जाता है दोनों ही राष्ट्रीय पार्टियों का गढ़?

वर्धा पश्चिम विदर्भ क्षेत्र का एक छोटा और शांत सा रहने वाला शहर है जो स्वतंत्रता से पूर्व गतिविधियों का केंद्र था. गांधी के आंदोलन का यह केंद्र रहा और उनका सेवाग्राम भी यहीं है. आज़ादी के बाद वर्षों तक यह संसदीय क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ रहा है. पर यह सब 1991 में बदल गया जब कांग्रेस को पहली बार यहां हार का सामना करना पड़ा. सीपीआई के रामचंद्र घांगरे ने इस सीट पर विजय पाई. पर 1996 में बीजेपी के विजय मुंडे चुनाव जीतने में सफल रहे. इसके बाद इस संसदीय क्षेत्र के बारे में कोई भी अन्दाज़ लगाना मुश्किल हो गया कि यह किस पार्टी को जिता कर संसद में भेजेगी. यहां की सीट बीजेपी और कांग्रेस को जाती रही. तो क्या हुआ 2014 में?

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी के रामदास तादस ने इस सीट से 2.15 लाख वोटों के अंतर से जीत दर्ज की. उन्होंने कांग्रेस के सागर मेघे को हराया जो कि कांग्रेस के कभी क़द्दावर नेता रहे दत्ता मेघे के पुत्र हैं. पर अपने पिता के काफ़ी प्रयासों के बावजूद वे नहीं जीत पाए. बाद में मेघे बीजेपी में शामिल हो गए.

यह जानना दिलचस्प है कि मेघे को रामदास तादस के हाथों हार का मुंह देखना पड़ा. तादस उस समय राकांपा में शामिल हो चुके थे. पर वह वहां भी नहीं रहे और 2009 में उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया.

अब दूसरी पीढ़ी सक्रिय

कांग्रेस ने यहां पर अब अपनी जमीन लगभग खो दी है. यहां पर 1998 में कांग्रेस को विजय मिली थी जब उसके उम्मीदवार दत्ता मेघे चुनाव जीते थे. मेघे को उस चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार सुरेश वाघमारे के मुक़ाबले 95000 वोट ज़्यादा मिले थे.

कांग्रेस की राज्य इकाई की अध्यक्ष प्रभा राव यहां 1999 में चुनाव लड़ीं और वह जीतीं. अब उनकी बेटी इस क्षेत्र से चुनाव लड़ रही हैं जबकि मेघे परिवार विरोधी कैम्प से मिल चुका है. प्रभा राव की बेटी चारुलता टोकस इस बार वर्धा सीट से कांग्रेस की उम्मीदवार हैं. बीजेपी की ओर से यहां से दत्ता मेघे के बेटे सागर मेघे को टिकट देने पर विचार हो रहा था पर बीजेपी ने अंततः रामदास तादस को दुबारा आज़माने का ख़तरा उठाया है. तो इस बार तादस और टोकस के बीच मुक़ाबला है.

वर्धा संसदीय क्षेत्र में छह विधानसभा सीट हैं– धमनगाँव रेलवे, मोरशी, अरवी, देओली, हिंगनघाट और वर्धा

अब तक किसकी जीत हुई इस सीट से

1991: रामचंद्र घांगरे, सीपीआई

1996: विजय मुंडे, बीजेपी

1998: दत्ता मेघे, कांग्रेस

1999: प्रभा राव, कांग्रेस

2004: सुरेश वाघमारे, बीजेपी

2009: दत्ता मेघे, कांग्रेस

2014: रामदास तादस, बीजेपी

नरेंद्र मोदी ने 1 अप्रैल को कपास क्षेत्र के इस महत्त्वपूर्ण शहर से अपने चुनावी अभियान का आग़ाज़ किया. अब राहुल गांधी यहाँ 5 अप्रैल को अपनी चुनावी सभा से महाराष्ट्र में चुनावी अभियान की शुरुआत करने वाल हैं. 2014 में भी राहुल और मोदी दोनों ने वर्धा में चुनावी सभा को संबोधित किया था. वर्धा की तुलना में विदर्भ क्षेत्र के अन्य सीट भी राजनीतिक रूप से काफ़ी महत्त्वपूर्ण हैं. पर इसके बावजूद इस संसदीय क्षेत्र से अपने चुनाव अभियान की शुरुआत करने का कारण यह है कि यह सीट सुरक्षित है और इसके साथ ही यह किस तरह का परिणाम देगी इसके बारे में कुछ भी निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता।