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मिसाल: 100 साल उम्र में राजवती दूसरों के काम के लिए करती हैं संघर्ष


उज्जैन। सौ साल की उम्र में लोग खटिया पकड़ लेते हैं और स्वभाव भी चिढ़चिढ़ा हो जाता है, लेकिन एक फौजी की बीवी की बात ही अलग है। 100 साल की उम्र में भी वे न केवल जिंदादिल और खुशरंग हैं, बल्कि दूसरों के काम के लिए प्रशासन के अफसरों के चक्कर लगाती हैं और काम कराने के लिए संघर्ष भी करती हैं। हर शख्स से वे इतने अपनेपन से मिलती हैं कि हर कोई प्रभावित हुए बिना नहीं रहता।

ये हैं राजवती जाट, जो अपनी उम्र 102 साल होने का दावा करती हैं। उनके पति नवाबसिंह फौज में थे। उनकी मृत्यु के बाद वे स्थानीय रामीनगर में अकेली ही रहती हैं। वे बताती हैं सन्‌ 1947 में 11वीं कक्षा पास कर चुकी थीं। इस उम्र में भी दूसरों के काम के लिए प्रशासन के अफसर हो या कोई और उनसे मिलती हैं और उन कामों को कराती हैं।

वे बिना किसी सहारे के चलती हैं और कलेक्टोरेट के दफ्तरों में अफसरों तक पहुंचकर जरूरतमंदों के काम कराती हैं। हाल ही में वे अपने पड़ोसी के बीपीएल कार्ड को बनवाने आईं और एसडीएम जीएस वर्मा और तहसीलदार अनिरूद्घ मिश्रा से इस काम को पूरा करने को कहा। इस दौरान वे अपनी जिंदादिली से अफसरों से लेकर कर्मचारियों के दिल भी जीत लेती हैं।

एसडीएम हो या तहसीलदार, फटकारती हैं तो आशीर्वाद भी देतीं

राजवती का मिजाज कुछ अलग है। वे अधिकारियों से खुशरंग होकर मिलती हैं। कोई काम न हो तो वे हास-परिहास में उन्हें प्यारी फटकार लगाती हैं और फिर सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद देती हैं। इससे अधिकारी भी चकित हो जाते हैं। तहसीलदार मिश्रा कहते हैं इस उम्र में राजवती जी की जिंदादिली की बात ही अलग है। वृद्घावस्था में लोग घर से बाहर नहीं निकलते और ये हंसी-खुशी के साथ ऐसे मिलती हैं मानो अकेलापन कोई समस्या ही नहीं।

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