सांसद की आस अब पूर्व महापौर से

मंडल अध्यक्षों के निष्कासन से कार्यकर्ता हैरान
जबलपुर नगर प्रतिनिधि। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा संगठन फिर से तैयारियों में जुटा दिखाई दे रहा है। इसी के चलते चुनाव को लेकर संगठन में बड़ी सर्जरी होती दिख रही है जिसमें भाजपा प्रदेश अध्यक्ष लोकसभा के चुनाव के लिए पूर्व महापौर प्रभात साहू को प्रभार सौंपना चाहते हैं, परंतु विभिन्न प्रकार की समीकरणों के चलते इन पदों की घोषणा नहीं हो पा रही है। सनद रहे कि यश भारत ने ही सर्वप्रथम इस बात को सामने लाया था कि प्रभात साहू को आने वाले समय में संगठन द्वारा एक बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।
पूर्व मंत्री की नहीं है सहमति
जबकि उत्तर मध्य के विधायक शरद जैन नहीं चाहते कि प्रभात साहू को यह जवाबदारी मिले, जिसके चलते उनके द्वारा संगठन मंत्रियों के सामने अपनी आपत्ति भी दर्ज की थी। परंतु उत्तर मध्य विधानसभा में प्रभात साहू की अच्छी पकड़ के चलते प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह उन्हें संगठन का प्रभार सौंपना चाहते हैं।
पश्चिम उत्तर विधानसभा में है अच्छी पकड़
विधानसभा चुनाव में पार्टी को शहरी क्षेत्र में अधिक नुकसान हुआ। इसमें पश्चिम, उत्तर और पूर्व विधानसभा से बड़ा अंतर दिखाई दिया। प्रभात साहू की पश्चिम और उत्तर विधानसभा क्षेत्र में अच्छी पकड़ है। विधानसभा चुनाव प्रत्याशी ने उनके खिलाफ काम करने की लिखित में शिकायत की। बावजूद इसके संगठन ने उन्हें जिले की कमान सौंपी जा रही है। सभी कार्यकर्ताओं से आपसी सामंजस्य बैठाने की पूर्व महापौर में अच्छी कला है।
पूर्व महापौर है संशय की स्थिति में
वही जिस प्रकार से सांसद पूर्व महापौर को संगठन का प्रभार सौंपने चाहते हैं वहीं सूत्र बताते हैं कि पूर्व महापौर स्वयं यह निर्धारित नहीं कर पा रहे हैं कि उन्हें इस पद पर कार्य करना चाहिए कि नहीं जिसके चलते लगातार संशय की स्थिति बनी हुई है।
निष्कासित मंडल अध्यक्षों ने खोला मोर्चा
वहीं संगठन में जैसे ही मंडल अध्यक्षों का निष्कासन हुआ है , वैसे ही मंडल अध्यक्षों ने अपने बागी तेवर दिखा दिए हैं निष्कासित मंडल अध्यक्ष का आरोप है कि संगठन द्वारा बिना किसी सूचना के चलते उन्हें निष्कासित कर दिया गया। बिना किसी सूचना के पद से अलग किया। नोटिस भी नहीं दिया। गलती थी तो निष्कासन किया जाना था। कांग्रेस के नेता को चुनाव के वक्त पार्टी में शामिल किया। काम किया, उसका नतीजा एकतरफा कार्रवाई हुई। दूसरे मंडल में जहां बड़े अंतर से हार हुई, वहां क्यों कोई बदलाव नहीं हुआ। हमने विधानसभा चुनाव में जमकर मेहनत भी की। संगठन में लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।