स्क्रैप शाम 6बजे के बाद निकला ही क्यों।

खमरिया नेताओं का आरोप की बड़े अधिकारी संलिप्त हैं
जबलपुर विशेष प्रतिनिधि ।खमरिया फैक्ट्री में कल शाम 6:00 बजे के बाद स्क्रैप की निकासी के दौरान चोरी किए जा रहे पीतल की धातु के पकड़े जाने के बाद खमरिया में हड़कंप की स्थिति है। नेताओं का सीधे-सीधे आरोप है कि खमरिया फैक्ट्री में लगातार हो रही चोरियों में सुरक्षा विभाग के बड़े अधिकारियों के साथ प्रबंधन के अधिकारियों और बंदूक धारी जवानोंकी मिलीभगत है ।जिसके चलते सुरक्षा को खतरा पैदा हो रहा है । संलिप्तता का संदेश तब और बढ़ जाता है, जब जानकारी लेने पहुंचने वाले नेताओं को इससे दूर रखा जाता है ।
नेताओं का आरोप है कि जब नियम है कि शाम 4:30 बजे के पहले स्क्रैप ले जाने वाले वाहनों को हर हाल में संस्थान से बाहर हो जाना चाहिए। तब फैक्ट्री की छुट्टी हो जाने और अंधेरा होने के बाद शाम 6:00 बजे स्क्रैप लदे वाहन बाहर क्यों ले जाए जा रहे थे। यदि स्क्रैप लादने में विलंब हो गया था ,तो नियमानुसार वाहनों को फैक्ट्री के अंदर ही रखा जाना था ।वाहन दूसरे कार्य दिवस मे दिन के उजाले में निकाले जाने थे ।ऐसा भी नहीं है कि दूसरे दिन निर्माणी का अवकाश हो ।जिसके कारण वाहन अनावश्यक फैक्ट्री में खड़े रहते ।नियमानुसार स्क्रेप लादते समय एक राजपत्रित अधिकारी के साथ बंदूकधारी डीएससी जवानों की तैनाती रहती है ।लेकिन उनकी आंखों में धूल झोंक कर स्क्रैप भर लिया गया हो। यह संभव नहीं है ।
नेताओं का कहना है कि जहां आम कर्मचारियों को फैक्ट्री में सुरक्षा और संवेदनशीलता के मद्देनजर मोबाइल प्रतिबंधित है वही ठेकेदार,कवाडिय़ों के एक साथ7 मोबाइल कैसे फैक्ट्री के अंदर पहुंच गए। क्या सुरक्षा विभाग ने ड्राइवर ,ट्रक के लेबर और कबाड़ी ठेकेदार की जांच अंदर जाते समय नहीं की ।मालूम हो कि फैक्ट्री में पेट्रोल से भी ज्यादा ज्वलनशील पदार्थ और धातुएं बम बनाने में उपयोग किया जाता है। ऐसे में मोबाइल से निकलने वाली अदृश्य किरणें जिन्हें रेडिएशन भी कहा जाता है ।कितनी घातक हो सकती है। इसका सहज अंदाज लगाया जा सकता है ।बहरहाल नेताओं का कहना है कि जहां फैक्ट्री कर्मचारियों को चाहे जब चोरी के झूठे आरोपों में फंसाने का काम सुरक्षा विभाग के कर्मचारी अधिकारी कर रहे हैं। वही देश की सुरक्षा के लिए घातक गतिविधियों में संलग्न कबाडिय़ों और निजी कंपनियों के प्रतिनिधियों से अधिकारी याराना संबंध निभा रहे हैं ।ऐसे मामले की जांच बाहर की स्वतंत्र एजेंसी से होना आवश्यक है।