Upper caste reservation: जानिए किनको मिलेगा 10 फीसदी आरक्षण का लाभ

वेब डेस्‍क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने सोमवार को बड़ा फैसला लेते हुए गरीब सवर्णों को शिक्षा तथा रोजगार में 10 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया। इस पर तत्काल प्रतिक्रियाएं शुरू हो गई हैं। सत्ता पक्षा जहां इसे एतिहासिक फैसला बता रहा है, वहीं विपक्ष की नजर में यह लोकसभा चुनाव से पहले लॉलीपोप है। कुल मिलाकर अब देश्‍ में सभी जातियों को आरक्षण मिलेगा किसी को कम तो किसी को शर्तों के साथ ज्‍यादा। बहरहाल, यह जानना जरूरी है कि सरकार के इस फैसला का फायदा किनको मिलेगा। पढ़िए इससे जुड़ी अहम बातें –

ब्राहमण, राजपूत, भूमिहार, बनिया, जाट, गुर्जर को इस श्रेणी में आरक्षण मिलेगा।
जिन लोगों की सालाना आय 8 लाख रुपए या इससे कम है।
जिसके पास 5 एकड़ या उससे कम खेती जमीन है।
जिनके मकान 1000 वर्ग फुट से कम जमीन पर बने हैं, उन्हें भी इसका लाभ मिलेगा।
आरक्षण शिक्षा (सरकार या प्राइवेट), सार्वजनिक रोजगार में इसका लाभ मिलेगा।
इसके लिए संविधान के अनुच्‍छेद 15 और 16 में संशोधन होगा।
आरक्षण आर्थिक रूप से पिछड़े ऐसे गरीब लोगों को दिया जाएगा जिन्हें अभी आरक्षण का फायदा नहीं मिल रहा है।
प्रस्ताव के मुताबिक, सवर्णों को आरक्षण के लिए ये हो सकती हैं शर्तें
जिस परिवार की सालाना आमदनी 8 लाख रुपए से कम है
जिनके पास पांच एकड़ से कम खेती योग्य जमीन है
जिनके पास 1 हजार वर्ग फीट से छोटा घर है
जिनके पास शहरी क्षेत्रों के अधिसूचित नगरीय निकायों में 100 गज से छोटा आवासीय प्लॉट हो
या गैर-अधिसूचित नगरीय निकायों में 200 गज से छोटा आवासीय प्लॉट हो

सवर्णों को आरक्षण चुनावी नौटंकी- कांग्रेससुप्रीम कोर्ट द्वारा 50% आरक्षण के प्रावधान का जिक्र करते हुए कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने मोदी सरकार के इस कदम को चुनावी नौटंकी बताया। उन्होंने ट्वीट किया, क्या आपने चार साल और आठ महीनों की सरकार में इसके बारे में नहीं सोचा? इसलिए आचार संहिता लगने से तीन महीने पहले ये चुनावी नौटंकी की। जबकि आपको पता है कि इसे 50% से ज्यादा नहीं बढ़ाया जा सकता।

वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि हम गरीबों के समर्थन में उठने वाले हर कदम का स्वागत करते हैं। लेकिन कहीं ये भी भाजपा का चुनावी जुमला न बन जाए। कांग्रेस प्रवक्ता ने रोजगार को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार न तो रोटी दे पाई है, न रोजगार।
केजरीवाल ने कहा- हम समर्थन के लिए तैयारदिल्ली के मुख्यमंत्री और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ट्वीट किया, “चुनाव के पहले भाजपा सरकार संसद में संविधान संशोधन करे। हम सरकार का साथ देंगे। नहीं तो, साफ हो जाएगा कि ये मात्र भाजपा का चुनाव के पहले का स्टंट है।”

यह मोदी का मास्ट स्‍टोक : अठावलेकेंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने मोदी सरकार के फैसले का स्वागत किया। इसे मास्टर स्टॉक बताते हुए अठावले ने कहा कि मोदी के पास और भी स्टॉक हैं। मोदी मजबूत बल्लेबाज हैं, उनके पास अभी और भी चौके-छक्के हैं। जब यह बिल संसद में रखा जाएगा, विपक्षी पार्टियों को इस बिल का विरोध नहीं करना चाहिए।

सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?

पहली वजह: विधानसभा चुनावों से पहले हुआ था सवर्णों का आंदोलनपिछले साल मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव से पहले सवर्ण आंदोलन शुरू हुआ था। इसका सबसे ज्यादा असर मध्यप्रदेश में देखा गया था। तीनों राज्यों में कांग्रेस को जीत मिली थी। अनुसूचित जाति-जनजाति संशोधन अधिनियम के खिलाफ सवर्ण संगठनों ने सितंबर में भारत बंद भी रखा था।
दूसरी वजह: देश की हिंदू आबादी में 31% सवर्ण, 125 लोकसभा सीटों पर सवर्ण जीतते हैं1931 के बाद देश में सरकार की तरफ से कभी जातिगत जनगणना नहीं हुई। हालांकि, नब्बे के दशक में गठित किए गए मंडल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में पिछड़े वर्ग की आबादी 50% से ज्यादा बताई गई थी। 2007 में सांख्यिकी मंत्रालय के एक सर्वे में कहा गया था कि हिंदू आबादी में पिछड़ा वर्ग की संख्या 41% और सवर्णों की संख्या 31% है। 2014 के एक अनुमान के मुताबिक, 125 लोकसभा सीटें ऐसी हैं जहां हर जातिगत समीकरणों पर सवर्ण उम्मीदवार भारी पड़ते हैं और जीतते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- 50% से अधिक नहीं होना चाहिए आरक्षण
सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में साफ किया था कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग या इनके अलावा किसी भी अन्य विशेष श्रेणी में दिए जाने वाले आरक्षण का कुल आंकड़ा 50% से ज्यादा नहीं होना चाहिए। हालांकि, जुलाई 2010 के अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ठोस वजह होने पर राज्य सरकार इसे बढ़ा सकती है। मौजूदा समय में तमिलनाडु में 69% (50% ओबीसी और 18% एसटी) आरक्षण है।

संविधान के अनुच्छेद 16 (4) में देश के पिछड़े नागरिकों को आरक्षण देने का जिक्र है। केंद्र सरकार के कार्मिक मंत्रालय ने जुलाई 2016 में बताया था कि देश में अभी जातिगत आधार पर 49.5% आरक्षण दिया जा रहा है।
किस वर्ग को कितना आरक्षण?वर्गआरक्षणओबीसी27%एससी15%एसटी7.5%कुल49.5%