कांग्रेस ने संकल्प पूरा करने की कि शुरूआत

अवैध उत्खनन में लगे लोगों पर शुरू ताबड़तोड़ कार्रवाई
जबलपुर प्रतिनिधि। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही कांग्रेस ने अपना संकल्प पूरा करते हुए अवैध उत्खनन में लगे लोगों पर कार्रवाई करना शुरू कर दी है। चुनाव पूर्व ही राज्यसभा संासद विवेक तन्खा ने पत्रकारवार्ता में स्पष्ट कर दिया था कि सरकार के संरक्षण में किए जा रहे अवैध उत्खनन पर लगाम कसी जायेगी। जिसकी शुरूआत प्रदेश में कांग्रेस के सत्ता संभालते ही शुरू हो गयी है। कांग्रेस विधायकों को आलाकमान ने स्पष्ट तौर पर आदेश दिया है कि जबलपुर में अवैध उत्खनन में लगे माफियाओं पर कार्रवाई की जाये। इस आदेश का असर जमीनी स्तर पर दिखाई भी देने लगा है।
भेड़ाघाट में 11 हाईवा पकड़े
अवैध रेत व हार्ड मुरुम परिवहन पर अंकुश लगाने की मंशा से शनिवार को आरटीओ ने ताबड़तोड़ कार्रवाई को अंजाम दिया। इसके तहत भेड़ाघाट चौक पर रेत और हार्ड मुरुम से भरे 11 ट्रक पकड़े गए। इस कार्रवाई के तहत 4 लाख 39 हजार 350 रुपए का जुर्माना वसूला गया। कार्रवाई के दौरान ट्रक नंबर एमपी 53 जीए 1066, एमपी 53 जे 0179, एमपी 20 जीए 5667, एमपी 20 एचबी 5527, एमपी 20 एचबी 5733, एमपी 20 एचबी 5980, आरजे 03 जीए 3824, आरजे 03 जीए 3832, आरजे 03 जीए 3828 और आरजे 03 जीए 3845 पकड़े गए। आरटीओ संतोष पाल ने बताया कि पिछले दिनों वित्त मंत्री तरुण भनोत और सामाजिक न्याय व नि:शक्तजन कल्याण विभाग मंत्री लखन घनघोरिया की उपस्थिति में कलेक्ट्रेट में बैठक आयोजित हुई थी। इस दौरान जो निर्णय लिया गया, उसी के परिप्रेक्ष्य में कलेक्टर द्वारा जारी दिशा-निर्देश के परिपालन में यह कार्रवाई शुरू की गई है। यह कार्रवाई इसी तरह अनवरत जारी रहेगी। इसके तहत रेत आदि के अवैध परिवहन पर ठोस अंकुश सुनिश्चित किया जाएगा। निर्धारित से अधिक रेत आदि का परिवहन और मनमाने परिवहन के जरिए खनिज संपदा की चोरी पर लगाम लगाई जाएगी।
गोसलपुर में दो हाईवा पकड़कर किया जुर्माना
गोसलपुर स्थानीय जियोमिन माइन से क्षमता से अधिक ओवरलोडिंग कर खनिज का परिवहन करते दो हाइवा को पकड़कर जुर्माना की कार्रवाई की गई। थाना प्रभारी गोसलपुर एसराम मरावी ने बताया कि एसडीएम सिहोरा, एसडीओपी भावना मरावी द्वारा वाहन क्रमांक एमपी 20, एचबी 52 97 एवं एमपी 21 एच 14 19 पर क्षमता से अधिक खनिज का परिवहन करने पर जब्त कर कर थाना गोसलपुर में खड़ा कराया गया है।
अधिकारियों पर था राजनीतिक दबाव
सत्ता संरक्षण में अवैध उत्खनन में लगे लोगों को किस हद तक मदद की जाती थी इसका उदाहरण इसी बात से देखने को मिलता है कि अधिकारियों द्वारा क्षेत्रीयजनों की बार बार शिकायत के बाद भी कार्रवाई नही की जाती थी। खनिज विभाग के अधिकारी दबे स्वर में यह कहते हुए नजर आते थे कि अगर फलां के उपर कार्रवाई की तो अपनी नौकरी के लाले पड़ जायेगें।