गक्कड़ भर्ता पार्टी के क्या है मायने ?

जबलपुर यभाप्र। मध्यप्रदेश में चुनाव हारने के बाद भाजपा अब बिखराव की ओर नजर आ रही है। पार्टी के नेता अब खींचतान में लगे नजर आ रहे है।इसका ताजा उदाहरण उस समय देखने को मिला जब एमआईसी सदस्य ने अपने फॉर्म हाउस में गक्कड़ भर्ता पार्टी का आयोजन की घोषणा की। ये गक्कड़भर्ता पार्टी रविवार को आयोजित की गई है जिसमें शहर के कई भाजपा नेता सम्मिलित होने जा रहे है। एमआईसी सदस्य द्वारा किए जा रहे इस आयोजन को लोग अब भाजपा में फूट पडने के नजरिये से देख रहे है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस पार्टी के माध्यम से अब नेता अपनी दलबंदी में लग चुके है।
कहा होगा आयोजन
सूत्र बताते है कि इस गक्कड़ भर्ता पार्टी का आयोजन एमआईसी सदस्य के लम्हेटाघाट स्थित फॉर्म हाउस में रविवार को होने जा रहा है।और इसके लिए बकायदा न्योता भी दिया जा रहा है।
कार्यालय का क्यूं नही हो रहा उपयोग
विदित हो कि करोड़ो रूपए की लागत से रानीताल में बने भाजपा कार्यालय का उपयोग इन नेताओं द्वारा नही किया जा रहा है। पार्टी के लोगों का कहना है कि अगर इस तरह का आयोजन पार्टी कार्यालय में किया जाता तो लोकसभा चुनाव को लेकर शहर में एकजुटता का संदेश भी जाता।
पूंजीपतियों की गिरफ्त में दल
पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाते हुए बताया कि अब पार्टी में समान्य कार्यकर्ताओं के लिए कोई जगह नही है। भाजपा में पूंजीपतियों को भरपूर संरक्षण दिया जा रहा है और जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है।
एक गुट सक्रिय दूसरा निष्क्रिय
चुनाव पूर्व ही भाजपा दो गुटों में बंटी नजर आ रही थी विधानसभा चुनाव हारने के बाद ये गुटबाजी स्पष्ट तौर पर नजर आने लगी है प्राय देखा जा रहा है िक भाजपा के इन दोनों गुटों में एक तो अधिक सक्रिय नजर आ रहा है वही दूसरा गुट निष्क्रिय दिखाई पड़ता है।
कब होगी नये नगर अध्यक्ष की ताजपोशी
गौरतलब है कि वर्तमान भाजपा अध्यक्ष जीएस ठाकुर का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। और नए भाजपा नगर अध्यक्ष की ताजपोशी की घोषणा नही होने से अब लोगों में बेकरारी देखी जा रही है। अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह गुटबाजी नगर अध्यक्ष के पद के लिए भी हो सकती है।
लोकसभा चुनाव के लिए खतरें की घंटी
विधानसभा चुनाव में जबलपुर जिलें की दुर्गति के पीछे संगठन मंत्री और प्रदेश अध्यक्ष की खींचतान किसी से भी छुपी नही है। इसी खींचतान का परिणाम है कि जबलपुर जिलें में तीस सालों के बाद कांग्रेस ने एक बार फिर जिलें की चार सीटों पर कब्जा कर लिया। वही भाजपा नेताओं की जारी ये गुटबाजी एक बार फिर लोकसभा चुनाव में भाजपा की लुटिया डुबो सकती है।