हनुमान मंदिर तोडऩे को लेकर सेना और सिविलियन आमने सामने

जबलपुर प्रतिनिधि। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद हनुमान मंदिर तोडऩे पहुंची सेना को गोराबाजार क्षेत्र में शुक्रवार की सुबह उस समय जबर्दस्त हंगामा व विरोध का सामना करना पड़ा जब सेना के जवान बड़ी संख्या में वहां स्थित लगभग 200 साल पुराने बजरंगबली के मंदिर को तोडऩे पहुंच गए। सेना की इस कार्रवाई की खबर लगते ही सैकड़ों की संख्या में क्षेत्रीय जन मौके पर पहुंच गये और विरोध शुरू कर दिया। मौके पर केेंट क्षेत्र के विधायक, केंट बोर्ड के उपाध्यक्ष सहित जनप्रतिनिधि, पुलिस अधिकारी पहुंच ये, जिन्होंने मामले में हस्तक्षेप करते हुए मंदिर तोडऩे की योजना को स्थगित करवाया, जिसके बाद मामला शांत हो सका।
बताया जाता है कि सेना के लिए आरक्षित भूमि ए-1 में वर्षों से स्थित हनुमान मंदिर को हटाने के लिए आर्मी के जवान पहुंच गए, उनकी इस कार्रवाई का जबर्दस्त विरोध शुरू हो गया. लोगों का कहना था कि दो सौ साल पुराना मंदिर हमारी आस्था का प्रतीक है, इसलिए इसे किसी भी कीमत पर हटाने नहीं देंगे. लोगों के आक्रोश व विवाद की आशंका को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल भी मौके पर पहुंच गया. घटना की जानकारी लगने पर क्षेत्रीय विधायक अशोक रोहाणी, केंट बोर्ड उपाध्यक्ष अभिषेक चौकसे, पार्षद सुंदर अग्रवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंच गये.
प्रशासनिक-सैन्य-जनप्रतिनिधियों की होगी बैठक, लेंगे निर्णय
इस घटना के संबंध में क्षेत्रीय विधायक अशोक रोहाणी का कहना है कि इस मामले में एक बैठक प्रशासनिक व सैन्यधिकारियों की बुलाई जाएगी, जिसें सर्वसम्मति से कोई निर्णय लिया जाएगा। बताया जाता है कि सैन्य प्रशासन व मंदिर समिति के बीच इस भूमि के मालिकाना हक को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है, जो सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया, जहां पर पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने सेना के पक्ष में निर्णय दिया, जिसके बाद सेना कब्जा लेने मौके पर पहुंची थी।