2019, नये संकल्प में विकल्प की तलाश

सी का नूतन वर्ष हो तो किसी का नया साल, हर नये वर्ष में एक संकल्प होता है। इस संकल्प को कैसे पूर्ण किया जाए इसके लिए विकल्प की तलाश भी होती है। हालांकि कहा जाता है कि संकल्प में विकल्प नहीं होना चाहिए, लेकिन आज के सामाजिक या फिर राजनीतिक परिवेश में हर संकल्प विकल्प की बुनियाद पर टिका होता है। संकल्प से समझौते कभी-कभी नुकसान दायक होते हैं, तो कभी-कभी फायदेमंद भी होते हैं। एक नये वर्ष की बुनियाद नवीन संकल्पों पर टिकी हो तो निश्वित ही उसके विकल्प भी लाभदायी होते हैं। यहां यह भी समझना होगा कि संकल्प कभी भी भावनाओं में नहीं लिए जाने चाहिए। भावनाओं के संकल्प सुनने में भले ही बेहतर लगें, किन्तु इन्हें पूरा करने में हानि की भी गुंजाइश बनी रहती है। लिहाजा व्यक्ति हो या फिर समाज, अथवा सरकार, किसी भी संकल्प को तब तक नहीं लेना चाहिए जब तक उसे पूरा करने की मंशा और उसके रास्तों का विकल्प न तैयार हो। वर्तमान में कई ऐसे संकल्प सामने हैं जिन्हें पूरा करने में तमाम विकल्पों का खोजने की विवसता है। अति उत्साहित संकल्पों का ही यह परिणाम है कि अब संकल्प के लिए विकल्प की तलाश है। व्यक्ति के जीवन में तमाम संकल्प जीवन को नई राह की ओर ले जाते हैं, तब निश्वित तौर पर व्यक्ति के जीवन में यही संकल्प नई उंचाईयों की ओर जाते दिखते हैं, लेकिन यहीं संकल्प कभी-कभी गले भी पड़ जाते हैं। जिन्हें पूरा करने के लिए विकल्प के रास्ते पर ही चलना पड़ता है, और फिर यह विकल्प इस संकल्प को एक नया रूप ही दे देते हैं। बहरहाल एक चुनाव बीते तो दूसरे अब सामने खड़े हैं। फिर से नये संकल्प की लम्बी फेहरीस्त सुनाई देने वाली है। फिर से इन्हीं संकल्पों के भरोसे सत्ता की सीढ़ी पर कदमताल करने की बारी है। संकल्पों के साथ हर राजनीतिक दल विकल्प पर भी विचारार्थ चल रहा है। अब जिसे भी संकल्पों को पूरा करने की जिम्मेदारी मिलती है वह इसे पूर्ण करने में विकल्प को तलाशने में जुट जाता है। कुछ संकल्प ऐसे भी होते हैं जिन्हें लेता कोई और है और पूरा कोई और करता है। जनता जनार्दन संकल्पों से काफी प्रभावित दिखती है। संकल्प लेते ही उस सपने को पूरा होने का विश्वास सा जागता है, पर समय के अनुसार फिर वही जनता इस संकल्प में विकल्प को लागू करने की बात सुनती है। ऐसा ही चलता आया है। कुछ संकल्प पूर्ण होते हैं, कुछ संकल्प विकल्प की जद्दोजहद में गुम हो जाते हैं। कुछ संकल्प विकल्पों के साथ पूरे होते भी दिखते हैं। यह तो तय है कि संकल्पों को अच्छे विकल्पों के साथ भी पूरा किया जाए तो इसमें कोई बुराई नहीं। तभी तो अब जनता भी संकल्प के साथ विकल्प में भी खुश रहती है। दरअसल संकल्प ही ऐसे होने चाहिए जिसमें या जो पूर्ण करने की क्षमता हो या फिर विकल्प के साथ पूरी होने की उम्मीद। वरना संकल्प न ही हों तो क्या हर्ज। खैर नये वर्ष में हम भी इसी संकल्प के साथ हैं कि जनता के लिए लिए गये संकल्पों को पूरा करने हेतु इसके लिए जिम्मेदार भी निश्चित तौर पर कृत संकल्पित रहेंग….।