कादर खान का 81 की उम्र में निधन

नए साल का पहला ही दिन बॉलीवुड के लिए बेहद खराब रहा. बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर-राइटर कादर खान का 81 की उम्र में निधन हो गया है. उनके बेटे सरफराज खान ने निधन के खबर की पुष्टि की है. कनाडा के एक अस्पताल में कादर खान ने अंतिम सांस ली. मौत की खबर से बॉलीवुड सदमे में है। कादर खान ने तीन सौ से अधिक फिल्मों में अभिनय किया और लगभग 250 फिल्मों के संवाद लिखें।
हाल ही में कादर खान की बीमारी के बाद मौत की अफवाह भी उड़ी थी. बाद में उनके बेटे सरफराज ने कहा था ये बातें फर्जी हैं और सिर्फ अफवाह भर हैं, मेरे पिता अस्पताल में हैं। कादर खान को सांस लेने में तकलीफ है. डॉक्टर्स ने उन्हें रेगुलर वेंटीलेटर से हटाकर वेंटिलेटर पर रखा गया था। कनाडा में कादर खान का इलाज चल रहा था। उनकी सलामती के लिए अमिताभ बच्चन ने भी ट्वीट किया था. लेकिन लोगों को हंसाने वाला अभिनेता अब नहीं रहा. अमिताभ ने कादर खान के साथ दो और दो पांच, मुकद्दर का सिकंदर, मि. नटवरलाल, सुहाग, कूली और शहंशाह में काम किया है।
हरफनमौला थे कादर खान
कादर खान हरफनमौला कलाकार थे. उनकी और गोविंदा की जोड़ी को परदे पर काफी पसंद किया गया. इनमें दरिया दिल, राजा बाबू, कुली नंबर 1, छोटे सरकार, आंखें, तेरी पायल मेरे गीत, आंटी नंबर 1, हीरो नंबर 1, राजाजी, नसीब, दीवाना मैं दीवाना, दूल्हे राजा, अखियों से गोली मारे आदि फिल्में कीं।
अनुशासन के बेहद सख्त
कादर खान अनुशासन के बेहद सख्त इंसान थे। समय पर शूटिंग में पहुंचने के कारण वे निर्माता निर्देशकों के चहेतें कलाकार रहे। कादर खान यह नही चाहते थे कि उनके बच्चें पढ़ाई छोड़कर फिल्मों में आए इसलिय वे अपने बच्चों को फिल्मी मैगजीन भी पढऩे से रोकते थे।
दशकों लंबें कैरियर में जीते कई अवार्ड
कादर खान ने फिल्म इंडस्टी में करीब चार दशक लंबें कैरिअर में कई यादगार भूमिकाएं अदा की है। इसके लिये उन्हें विभिन्न अवार्ड्स से भी सम्मानित कियाप गया है। कादर खान ने तीन बार बॉलीवुड में सबसे प्रतिष्ठित माना जाने वाला फिल्मफेयर पुरूस्कार जीता है। 1982 में मेरी अवाज सुनो फिल्म के लिये सर्वश्रेष्ठ संवाद 1991 में बाप नंबरी बेटा दस नंबरी के लिये सर्वश्रेष्ठ हास्य कलाकार 1993 में अंगार के लिए सर्वश्रेष्ठ संवाद का पुरूस्कार कादर खान को मिला। इसके अलावा उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार के लिये नौ बार नांमाकित किया गया।
अब कादर खान जैसा कोई न मिलेगा
कादर खान ने खलनायक और तमाम चरित्र भूमिकाएं भी कीं. उन्होंने कई फिल्मों का निर्देशन भी किया। उन्होंने कई फिल्मों के मशहूर संवाद भी लिखे. पिछले कुछ समय से अस्वस्थता के चलते उन्होंने फिल्मों से पूरी तरह दूरी बना ली थी।
मौत की खबर सुन रो दिए अमिताभ
बहुत कम लोग इस बात से परिचित होगें कि बॉलीवुड के शंहशाह अमिताभ बच्चन की संवाद अदायगी में सबसे बड़ा हाथ कादर खान का रहा। अमिताभ बच्चन जहां कादर खान की संवाद अदायगी के दिवाने थे वही उनकी स्क्रिप्ट कला का भी लोहा माना करते थे। मुकद्दर का सिंकदर की स्क्रिप्ट व संवादों को सुनकर अमिताभ ने कहा था कि आप मेरे लिये इसी तरह की स्क्रिप्ट व संवाद लिखा करे ताकि मेरा मन काम में लगा रहे। कादर खान की मौत की खबर जैसे ही अमिताभ के कानों में पड़ी वे रो पड़े।
नाटक के क्षेत्र में थे सक्रिय
व्यस्त फिल्मी जिंदगीं होने के बाद भी अभिनेता कादर खान ने रंगमंच से नाता जोड़े रखा। समय मिलने पर वे रंगकर्मियों के बीच अक्सर पहुंच जाया करते थे और उनका मार्गदर्शन किया करते थे। वही नए रंगकर्मी उनके अनुभवों को सुनकर कुछ ना कुछ हासिल किया करते थे।
फांका मस्ती से हुई थी शुरूआत
कादर खान की शुरूआत रंगकर्म से हुई थी फिल्मों में आने के लिए उन्हें कड़ा संघर्ष करना पड़ा। अभिनेता अशरफ खान ने कादर खान को फिल्म्ेां दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। जब अशरफ खान वामक अजरा नामक में यंग प्रिंस के रोल के लिए ऐसे अभिनेता की तलाश कर रहे थे जो चालीस पन्नों की स्क्रिप्ट याद कर सके।प्ले खत्म होने के बाद लोगों ने मुक्तकंठ से उनके अभिनय की प्रशंसा की।
शुरू में निभाए छोटे लेकिन अहम रोल
1973 में दाग से कैरियर शुरू करने के बाद कादर खान ने दिल दिवाना, गूंज, उम्र कैद,मुक्त, चोर सिपाही, मुकद्दर का सिंकदर और मि.नटवरलाल जैसी फिल्मों में छोटी लेकिन अहम भूमिका अदा की । राजेश खन्ना के साथ काम करके कादर खान को बॉलीवुड में पहचान मिली। इन दोनों ने एक साथ महाचोर, छैलाबाबू , फिफ्टी फिफ्टी, नया कदम और नसीहत जैसी फिल्मों में काम किया।