कैसे दे दे जमानत?

जबलपुर। हाईकोर्ट जस्टिस राजीव दुबे की एकलपीठ ने कहा कि आवेदक के खिलाफ किशोर न्याय बोर्ड सीहोर व अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने इस बात के स्पष्ट सबूत पाए हैं कि वह मृतका के साथ अंतिम बार देखा गया था। उसके कब्जे से वे पायल भी मिली थी, जो मृतका ने पहन रखी थीं। इसलिए निचली अदालत द्वारा आवेदक को दी गई सजा उचित है उसे जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता है।
जनवरी 2012 में सीहोर जिले के रेहटी थाना क्षेत्र निवासी ताराबाई नामक महिला की हत्या हो गई थी पुलिस ने जांच के बाद 14 जनवरी 2014 को नसरूल्लागंज निवासी किशोर को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार आरोपी ने जेवर लूटने के इरादे से ताराबाई की हत्या की थी। किशोर न्याय बोर्ड सीहोर ने 27 फरवरी 2016 को मामले का फैसला सुनाते हुए उसे दोषी पाया। बोर्ड ने उसे विधि विवादित किशोर को 3 साल विशेष होम्स में रखने के निर्देश दिए। इसके खिलाफ विधि विवादित किशोर ने जिला अदालत सीहोर के समक्ष अपील की। एडीजे सीहोर ने इसे 25 जनवरी 2018 को खारिज कर दिया। उक्त दोनों आदेशों के खिलाफ स्वयं को निर्दोष बताते हुए विधि विवादित किशोर ने यह अर्जी दायर की थी। अंतिम सुनवाई के बाद कोर्ट ने अर्जी निरस्त कर दी