विलय के विरोध में आज फिर बैंक हड़ताल

चेक क्लीयरेंस ड्राफ्ट सहित लेनदेन ठप
जबलपुर,यभाप्र। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारी बुधवार को फिर हड़ताल पर चले गए हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारियों की यूनियन ने बैंक ऑफ बड़ौदा में विजया बैंक और देना बैंक के प्रस्तावित विलय के विरोध में देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। इससे बैंकों का काजकाज प्रभावित हुआ है हालांकि, निजी क्षेत्र के बैंकों में कामकाज सामान्य चल रहा है। एक सप्ताह से भी कम समय में यह दूसरी बैंक हड़ताल है। बैंक अधिकारियों की यूनियन ने प्रस्तावित विलय और वेतन संशोधन पर बातचीत को जल्दी निष्कर्ष पर पहुंचाने को लेकर पिछले 21 दिसंबर को भी हड़ताल की थी। अधिकतर बैंकों ने पहले ही ग्राहकों को हड़ताल के बारे में सूचना दे दी थी । शहर की राष्ट्रीयकृत बैंकों में चेक क्लीयरेंस ड्राफ्ट सहित लेनदेन ठप हैं।हड़ताल में शामिल कर्मचारी अधिकारी बुधवार को सुबह 10:30 बजे सिविक सेंटर में एकत्रित हुए। यहां सभी यूनियनों के पदाधिकारी व कर्मचारी मिलकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान यूएफबीए के संयोजक एवं उपसचिव अधिकारी संघ के श्रीवर्धन नेमा, एसबीआई एम्पलाइज यूनियन के उपमहासचिव राजेश कठल, बीएस परिहार, जितिन्दर सिंह, ममता टेंभूर्णने, विनोद जोशी, सुधीर मेहता, भूपेन्द्र सिंह बरकड़े, आशीष सेन, श्रीकांत नाइक, राकेश इंदुरख्या, पीयूष मिश्रा समेत बड़ी संख्या में बैंक कर्मी मौजूद रहे।
आज लोगों को एटीएम पर निर्भर रहना होगा। यदि एटीएम भी धोखा दे गए तो नकद मिलना मुश्किल हो जाएगा। अधिकांश नेशनल बैंक के एटीएम में नकद जमा करने की जिम्मेदारी निजी कंपनियों के सौंपी जा चुकी है। सिर्फ एसबीआई ने अपने एटीएम व कियोस्क की मॉनिटरिंग का सिस्टम बनाया है। बावजूद इसके एसबीआई ने भी निजी कंपनियों को करंसी जमा करने का ठेका दे रखा है। यही वजह है कि एटीएम में नकद समाप्त होने की स्थिति में निजी कंपनी वाले ही जिम्मेदार माने जाते हैं।