भ्रामक दुष्प्रचार करने वाले अतिथि विद्वानों पर गिरेगी गाज

उच्च शिक्षा विभाग कर रहा है ऐसे शिक्षकों को चिन्हित

जबलपुर, नगर प्रतिनिधि। एमपीपीएससी से चयनित असिस्टेंट प्रोफेसर अभ्यर्थियों ने जिला स्तरों पर बैठक कर झूठी अफवाह फैलाने वालों पर विधिसम्मत कार्यवाही का निर्णय लिया है । इसी बीच उच्च शिक्षा विभाग ने भी प्रदेश के कॉलेजों में कार्यरत ऐसे अतिथि विद्वानों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने के लिए कमर कस ली है जो लगातार आये दिन सोशल मीडिया के माध्यम से पीएससी जैसी संवैधानिक संस्था और सफल अभ्यर्थियों के बारे में बिना किसी साक्ष्य के मनगढ़न्त गलत तथ्य एवं अफवाहें फैलाने के दुष्प्रचार में लगे हुए हैं। गौरतलब है कि प्रदेश में 26 साल बाद कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति के लिए असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा सफलतापूर्वक उच्च शिक्षा विभाग द्वारा सम्पन्न होकर अभ्यर्थियों के त्रिस्तरीय दस्तावेज- सत्यापन का कार्य पूर्ण हो चुका है। अब केवल विभाग द्वारा नियुक्ति आदेश जारी किये जाने हैं। उच्च शिक्षा विभाग के सामने अतिथि विद्वान पिछले कई वर्षों से असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया में बाधा बने हुए हैं क्योंकि ये बिना किसी परीक्षा के यूजीसी द्वारा निर्धारित अहर्ताओं को पूर्ण किये बिना पिछले दरवाजे से अपना नियमितीकरण चाहते हैं। एमपीपीएससी की असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा को रोकने के लिए भी इन्होंने हर सम्भव कोशिश की लेकिन परीक्षा न केवल सम्पन्न हुई बल्कि अब जब प्रदेश के कॉलेजों को योग्य, मेधावी युवा प्रोफेसर मिलने जा रहे हैं तब कुछ अतिथि विद्वान इसे राजनैतिक मुद्दा बनाकर अपनी स्वार्थ-सिद्धि में लगे हैं। पिछले 5 महीनों से नियुक्ति की विधिसम्मत प्रत्याशा में बैठे चयनित अभ्यर्थियों ने न केवल सोशल मीडिया पर भ्रम और दुष्प्रचार का जमकर जवाब देने का अभियान प्रारम्भ कर दिया है बल्कि जिला स्तरों तक अपनी कार्यकारिणी तैयार कर सोशल मीडिया के माध्यम से अफवाहें एवं दुष्प्रचार फैलाने वाले अतिथि विद्वानों के खिलाफ आईटी एक्ट की धारा 66्र के अंतर्गत कानूनी कार्यवाही संस्थित करने की विधिक प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। प्रदेश के डीजीपी के नाम भी पत्र साक्ष्यों सहित ऐसे आरोपियों पर नकेल कसने के लिए दिया जा रहा है।
चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि झूठ के बलबूते पर राजनेताओं और समाज को भ्रमित करने वाले इन अतिथि विद्वानों में से कई उच्च शिक्षा के नाम पर ऐसे सवालिया निशान हैं जो परीक्षा में 28- 30 प्रतिशत तक भी अंक अर्जित नहीं कर सके हैं, कॉलेज में अतिथि विद्वान के रूप में पदस्थ होते हुए भी विधानसभा का चुनाव ल?े हैं और आये दिन खुद को स्वघोषित शिक्षाविद आरटीआई एक्टिविस्ट बताते हुए मीडिया में वक्तव्य जारी करते हैं। सोशल मीडिया पर ऐसे भ्रामक दुष्प्रचार करने वाले
स्वयंभू विद्वानों की मार्कशीट और चुनाव आयोग की वेबसाइट से ली गयी उनके प्राप्त वोटों की अधिकृत सूची इन दिनों ट्विटर, व्हाट्सअप्प और फेसबुक पर
वायरल हो रही है।
जानते हैं क्या भ्रम फैलाये जा रहे हैं और इस भ्रामक दुष्प्रचार पर वस्तुस्थिति क्या है –
1. भ्रम – असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा में ज्यादातर अभ्यर्थी अन्य राज्यों से चयनित हुए हैं।
वस्तुस्थिति – विज्ञापित पदों में एससी, एसटी, ओबीसी तथा किसी भी केटेगरी के महिला पदों पर अन्य राज्यों के अभ्यर्थी चयनित हो ही नहीं सकते क्योंकि ये पद मप्र के मूल निवासी अभ्यर्थियों के लिए ही आरक्षित हैं। केवल अनारक्षित (ओपन) पदों पर ही अन्य राज्यों के अभ्यर्थी चयनित हो सकते हैं, लेकिन इन पदों पर भी विषयवार विश्लेषण करने पर ज्ञात हुआ कि 80प्रश से अधिक अभ्यर्थी मप्र से चयनित हुए हैं।
2. भ्रम – असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा में अतिथि विद्वान चयनित नहीं हो सके, इसलिए उनके साथ अन्याय हुआ है।
वस्तुस्थिति – असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में 1146 अतिथि विद्वान चयनित हुए हैं, जो कि कुल चयन का 43प्रश हैं। केवल वे अतिथि विद्वान चयनित नहीं हुए जो कॉलेजों में नेतागिरी करते हैं, जिनका अध्ययन-अध्यापन से छत्तीस का आंकड़ा है। जो 2014 से लगातार भर्तियों में अवरोध बनकर खड़े हुए हैं। इकोनॉमिक्स, राजनीतिशास्त्र, लॉ, जूलॉजी, बॉटनी, हिस्ट्री जैसे कई विषयों के टॉपर्स अतिथि विद्वान रहे हैं।

वर्जन
जो इस प्रकार का भ्रामक प्रचार कर रहे हैं हम उन अतिथि विद्वानों पर कार्यवाही करेंगे तथा जिन अतिथि विद्वानों की सेवा समाप्त करने की बात की जा रही है ऐसा कुछ भी नहीं होगा। परंतु अगर उनके द्वारा इस प्रकार की झूठी अफवाहें फैलाना पाया जाता है तो उनके खिलाफ जरूर कार्रवाई होगी।
जगदीश जटिया,अपर संचालक
उच्च शिक्षा विभाग