एक माह में दो ट्रांसफर कैसे!

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक माह के भीतर दूसरी बार तबादला किए जाने के रवैये को अनुचित माना। इसी के साथ ट्रांसफर पर रोक लगा दी गई। मामला कलेक्टर-कमिश्नर के अनुमोदन के नियम का पालन किए बिना नए सिरे से ट्रांसफर कर दिए जाने को चुनौती से संबंधित था।
न्यायमूर्ति सुजय पॉल की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता शहपुरा डिंडौरी निवासी गणेश साहू की ओर से अधिवक्ता श्रीमती सुधा गौतम ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता ग्रामीण यांत्रिकी विभाग में सब इंजीनियर है। 2017 में एक सर्कुलर जारी किया गया था, जिसके तहत संविदा और नियमित सब इंजीनियर्स का युक्तियुक्तकरण के तहत स्थानांतरण किए जाने का निर्णय लिया गया था। साथ ही यह शर्त भी जोड़ दी गई थी कि कलेक्टर-कमिश्नर के अनुमोदन के बिना क्लस्टर चेंज नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद याचिकाकर्ता को पहले 25 सितम्बर को शहपुरा डिंडौरी से कठौतिया ट्रांसफर किया गया और बाद में पहला आदेश निरस्त किए बिना 5 अक्टूबर को नए आदेश के जरिए समानापुर ट्रांसफर कर दिया गया। हाईकोर्ट ने पूरे मामले पर गौर करने के बाद तबादले को नियमविरुद्घ पाते हुए रोक लगा दी।