गुरु अब तो फंस गए, कैसे करें लिस्ट जारी

मेडिकल कॉलेज भर्ती लिस्ट नहीं हुई जारी।
जबलपुर नगर प्रतिनिधि। मेडिकल कॉलेज में फर्जी तरीके से हो रही नियुक्तियों के मामले में एक नया मोड़ सामने आया, जैसे ही यश भारत द्वारा इन नियुक्तियों में धांधली का पर्दाफाश किया इसके बाद विभिन्न पदों में बैक डोर से हो रही भर्तियों को जारी होने वाली लिस्ट अटकका दी गई है। मेडिकल प्रशासन चिंतित है कि जिन से पैसे लिए हैं उन्हें भर्ती करें तो कैसे करें?
नियुक्तियों का कोई मापदंड नहीं
मध्यप्रदेश शासन की रूल बुक के हिसाब से नियुक्तियों को अखबार में प्रकाशन एवं वेबसाइट पर प्रकाशन साथ ही साथ कॉलेज के नोटिस बोर्ड पर पूरी विस्तृत जानकारी के साथ प्रकाशन जरूरी है यहां पर मात्र और मात्र वेबसाइट पर प्रकाशित करते हुए अपने चहेते कैंडीडेट्स को यह बताकर की नियुक्ति निकली हंै आप फॉर्म बस भर दें सेटिंग की जाती है और साथ में जल्दी से जल्दी इंटरव्यू करा कर नियुक्ति कर दी जाती है । यश भारत की पड़ताल में यह सामने आया है कि विगत दिनों जितनी भी नियुक्तियां चाहे वह नए मेडिकल कॉलेज के हो पुराने मेडिकल कॉलेज की हो सभी में किसी ना किसी प्रकार की गड़बड़ी जरूर हुई है या तो रातों रात उनके इंटरव्यू कराए गए हैं
रातों रात हो गए इंटरव्यू
सुबह के 8:00 बजे फॉर्म भरा कर शाम को 5:00 बजे नियुक्ति कर दी गई है या मनपसंद कैंडिडेट ना मिलने पर नियुक्तियां रद्द कर दी गई हैं मेडिकल कॉलेज जबलपुर में लगातार हो रही इन गड़बडि़य़ों के लिए जब हमारी टीम ने ऑफिस में जाकर उनसे इसकी विस्तृत जानकारी मांगी तो उन्होंने कहा कि ऊपर से आदेश आते हैं और उसका पालन किया जाता है । यह कहकर उन्होंने ना तो किसी भी प्रकार का कोई ऑर्डर दिखाया जिससे कि बात यह सिद्ध हो सके ।
आचार संहिता के दौरान फटाफट नियुक्ति
आनन-फानन में यह नियुक्तियां की गई ,जवाब मांगे जाने पर सुप्रीडेंट का कहना है कि एमसीआई की गाइडलाइन के अनुसार नियुक्तियां की गई है और चुनाव आयोग का लेटर भी उनके पास मौजूद है लेकिन यदि एमसीआई की गाइडलाइन के अनुसार नियुक्तियां की जाए तो साल भर से पड़ी इन खाली सीटों को क्या मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया रातों रात हुई इन भर्तियों को देख कर उसे कॉलेज चलाने की परमिशन दे देगा
भोपाल से लेकर जबलपुर तक के सारे अधिकारी लिप्त
यदि ऐसा है तो यह बात स्पष्ट होती है कि दिल्ली से लेकर भोपाल होते हुए जबलपुर तक पूरा अमला इसी कार्य में लिप्त है कि जल्दी से जल्दी इंस्पेक्शन के लिए सालों से खाली पड़ी नियुक्तियां केवल दिखावे मात्र को भर ली जाएं और कैसे भी करके मेडिकल कॉलेज का इंस्पेक्शन पारित किया जाए । अगर इंस्पेक्शन के लिए भर्तियां होना आवश्यक हैं तो यह भर्तियां पिछले साल की जानी चाहिए थी एमसीआई की रूल बुक एवं अन्य संबंधित दस्तावेज यही बात कहते हैं अन्य किसी भी राज्य में आचार संहिता के दौरान भर्तियां नहीं की जाती हैं इससे यह बात साफ होता है कि 5 भर्ती किए गए सीनियर रेसीडेंट दंत चिकित्सक जो कि रातोंरात भर्ती किए गए हैं उनकी नियुक्तियां संदेहास्पद है
उठते सवाल
कितने आवेदन आए कितने लोगों ने इंटरव्यू दिया?
कितना समय था क्या आपने मौखिक लिया या रिटर्न की भी जरूरत पड़ी?
अचानक वेबसाइट में क्यों संशोधन कर दिया गया?
अभ्यर्थियों की सिलेक्टेड लिस्ट अचानक क्यों रोक दी गई?
इन सभी का जवाब मांगे जाने पर सुपरिटेंडेंट साहब डीन साहब का नाम लेकर मुकर गए
यहां पर ऑफिस से एकेडमिक और एकेडमिक से ऑफिस इसी के झोलझाल में जानकारी ना होने के अभाव में या यूं कहें कि जानकारी ना देना की चाह में इस तरह उलझाया जाता है कि व्यक्ति खुद ब खुद हार मान ले । सरकारी काम है यह कहकर मामले को रफा-दफा किया जाता है इसके अलावा अन्य सभी नियुक्तियां शक के घेरे में आ रही हैं जहां एक और आज का युवा दिन रात मेहनत कर र सरकारी नौकरी की एडवर्टाइजमेंट निकलने और ईमानदारी पूर्वक फॉर्म भरने और फिर रिजल्ट आने की उम्मीद रखता है वहीं दूसरी ओर जब यह ,खुलासा हो रहा है कि आवेदन से लेकर नियुक्तियां तक सब कुछ सेट रहती हैं और इसके पीछे एक पूरी गैंग काम करती है तो उनके भविष्य के साथ हो रहे इस खिलवाड़ का जिम्मेदार कौन है?
नई सरकार से उम्मीद है
नई सरकार ने जिस तरह से प्रशासनिक सर्जरी करना चालू किया है उम्मीद है कि सभी मेडिकल एवं डेंटल कॉलेजेस में बैठे इन पुराने स्वयंभू मठाधीश ओं के खिलाफ भी प्रशासनिक कार्यवाही की जानी चाहिए ताकि उन्हें मनमानी करने का अवसर ना मिले और जो सक्षम है जो सभ्य है जो जिस नौकरी के लिए सही उम्मीदवार है उसी को नौकरी मिले!
सख्त कार्रवाई करने के निर्देश जारी
यश भारत की टीम ने जब एमसीआई स्थित दिल्ली ऑफिस को इस बात की जानकारी दी और इसकी विस्तृत रूप से जांच की मांग की तो उन्होंने सख्त कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए हैं अत: इन नियुक्तियों एवं प्रदेश में हो रही इन तमाम फर्जी नियुक्तियों के खिलाफ यश भारत की मुहिम आगे भी जारी रहेगी एवं समाज के स्वास्थ्य के साथ हो रहे हैं खिलवाड़ एवं समाज के स्वास्थ्य के उत्थान के लिए जो भी जरूरी कदम है वह उठाए जाएंगे ।
“हमारे द्वारा लोकायुक्त में इसकी शिकायत भी की जाएगी, जिस प्रकार से दिन नवनीत सक्सैना और न्यूरो सर्जन द वायर यादव इन भर्तियों के घोटाले में लिप्त हैं उनके निष्कासन की मांग कांग्रेस के सभी विधायकों के सामने की जाएगी, से यह बात मुख्यमंत्री कमलनाथ तक पहुंचे। तथा मेडिकल की इस घोटाले का पर्दाफाश हो
-सचिन रजक
एनएसयूआई प्रवक्ता