विधायक हराते हराते भाजपा को ही किया सत्ता से बाहर

जबलपुर प्रतिनिध। शहर की तश्वीर बागियों ने बिगाड़ दी, अनुशासन का पाठ पढ़ाने वाली भाजपा के अनुशासनहीन कार्यकर्ताओं ने भाजपा को वनवास की राह दिखा दी। टिकट ना मिलने से बौखलाएं नेताओं ने भाजपा के खिलाफ झण्डा बुलंद किया, जिससे कांग्रेस प्रत्याशियों को जीत की हरी झण्डी मिल गयी। लेकिन बागियों का मुख्य उद्देश्य यहां जमे विधायकों को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाना था लेकिन इनकी बगावत ने प्रदेश में फिर से सत्ता की दावेदारी कर रही भाजपा को ही विपक्ष में बैठने मजबूर कर दिया। कारण कुछ भी रहे हो जनादेश को नतमस्तक हर हाल में करना पड़ेगा यही वक्त की नजाकत और सच्चाई है। लिहाजा, गिनने चले तो मध्यप्रदेश में अफरशाही, लालफिताशाही, गलत टिकट वितरण, कार्यकर्ताओं की उपेक्षा, मनगढ़त मांई के लाल तथा मंत्रियों विधायकों और नेतागिरी की पराकाष्ठा इत्यादि बेरूखी की वजह सतारूढ़ दल के लिए हार का सबब बनी। दूसरी ओर लोक लुभावन वादें, सही उम्मीदवारों का चयन, संगठित चुनावी रणनीति और अन्य दलों का आंतरिक समर्थन कांग्रेस के वास्ते सत्ता वापसी का कारक बना जिसके चलते ये प्रत्याशी जीत के द्वार तक पहुंचेे। उत्तर मध्य में भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य धीरज पटेरिया ने बगावत पार्टी से बगावत कर विनय सक्सेना को विधायक बनाया तो पूर्व विधानसभा क्षेत्र में पार्टी के बड़े नेताओं के सामूहिक प्रयास ने क्षेत्र में अपना गढ़ बना चुकी भाजपा को एक बड़े अंतर से हराया। यहां भाजपा प्रत्याशी की हालत इससे समझी जा सकती है कि सामाजिक लोगों से ही मत हासिल नही हो पाएं। बरगी क्षेत्र में भी कमोबेश यही स्थिति रही यहां भी भाजपा को हराने में उसके अपने गिरेबां में पल रहे आस्तीन के सांप रहे। हालांकि पनागर में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष भरत सिंह यादव ने भी अपने पक्ष में जबरदस्त मत हासिल किए। अंदाजा लगाया जा रहा था कि इस सीट से भी भाजपा सत्ता से बेदखल हो जाएगी लेकिन इंदू तिवारी के चुनावी मैनेजमेंट के चलते इसे बेअसर कर दिया।
अब यह देखना भी लाजिमी होगा कि कि बगावती बयार में अप्रत्याशित जीत हासिल करने वाली नवगठित सरकार अपने वादे-इरादे पर कितनी खरी उतरती है। भाजपा से महज 5 कदम आगे रही कांग्रेस को 50 कदम पीछे रहने में देर नहीं लगेगी क्योंकि जिन लोगों ने कांग्रेस को सत्ता सौंपी वो वापस भी ले सकती है। इसीलिए जनता की भलाई में सर्वस्त्र न्योछावर करने की बारी अब कांगेंस की है वह क्यां कर गुजरती है ये आने वाला वक्त ही बताएगा अभी से इसकी चर्चा करना नागवार है। इसमें एक जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाने की जवाबदारी भाजपा को उठानी पड़ेगी क्योंकि जनता ने इन्हें भी नकारा नहीं है। हां संख्या बल में जरूर थोड़ा सा कम कर दिया है, जिसकी चौकीदारी की जिम्मेदारी शिवाराज सिंह चौहान ने ले रखी है। इन हालातों में प्रदेश की 7.27 करोड़ जनता का भला और सूबे का विकास ही होगा।