ब्रिटिश कोर्ट ने विजय माल्या को भारत प्रत्यर्पित करने का दिया आदेश

नई दिल्ली। भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यर्पण पर ब्रिटेन की मजिस्ट्रेट अदालत में फैसला। ब्रिटिश कोर्ट ने विजय माल्या को भारत प्रत्यर्पित करने का आदेश दिया। सुनवाई के दौरान सीबीआइ के संयुक्त निदेशक और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दो अधिकारी उपस्थित रही।

धोखाधड़ी और मनी लांडिं्रग के मामले में वांछित माल्या पर भारतीय बैंकों के करीब 9,000 करोड़ रुपये बकाया हैं। ब्रिटेन में पिछले साल अप्रैल में उसकी गिरफ्तारी हुई थी। अभी वह जमानत पर है। माल्या ने मनी लांड्रिंग के आरोपों के बाद देश छोड़ दिया था। वह मार्च, 2016 से लंदन में है।

भारत सरकार लगातार उसके प्रत्यर्पण की कोशिश कर थी। पिछले साल चार दिसंबर को लंदन की मजिस्ट्रेट अदालत में माल्या के खिलाफ सुनवाई शुरू हुई थी। सोमवार को वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट अदालत इस पर फैसला सुनाएगी कि माल्या को भारत प्रत्यर्पित किया जाए या नहीं।

फैसले के बाद दोनों पक्षों को 14 दिन के भीतर अपील करने का मौका मिलेगा। अपील नहीं होने और मजिस्ट्रेट के फैसले से सेक्रेटरी ऑफ स्टेट के सहमत होने की स्थिति में होम सेक्रेटरी के आदेश के 28 दिन के अंदर माल्या को प्रत्यर्पित कर दिया जाएगा।

इस मामले में भारत सरकार की ओर से क्राउन प्रोसीक्यूशन सर्विस (सीपीएस) केस देख रही है। सीपीएस के प्रमुख मार्क समर्स का कहना है कि मानवाधिकारों के आधार पर माल्या के प्रत्यर्पण में कोई बाधा नहीं है।

वहीं माल्या का बचाव पक्ष यह साबित करने के प्रयास में है कि किंगफिशर एयरलाइंस द्वारा बैंकों से लिया गया पैसा कारोबारी विफलता के कारण डूबा। इसमें बेईमानी या धोखाधड़ी नहीं की गई।

सीबीआइ की तरफ से उपस्थित रहे मनोहर

सोमवार की सुनवाई के लिए सीबीआइ की तरफ से संयुक्त निदेशक एस साई मनोहर उपस्थित रहेंगे। मनोहर विशेष निदेशक राकेश अस्थाना की जगह लेंगे। अब तक माल्या से संबंधित सुनवाई में अस्थाना शामिल होते रहे हैं। फिलहाल निदेशक आलोक वर्मा के साथ चल रही तकरार के मामले में सरकार ने अस्थाना से सभी अधिकार छीनते हुए उन्हें छुट्टी पर भेज दिया है।

जारी रहेगी ईडी की जांच

इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को विजय माल्या की वह मांग खारिज कर दी थी, जिसमें उसने ईडी की कार्यवाही पर रोक लगाने की अपील की थी। ईडी ने मुंबई स्थित विशेष अदालत में अर्जी दाखिल कर मांग की है कि माल्या को नए कानून के तहत भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया जाए।

ऐसा होने से ईडी को माल्या की संपत्ति जब्त करने का अधिकार मिल जाएगा। ईडी की इस कार्यवाही पर रोक लगाने के लिए माल्या ने बांबे हाई कोर्ट में याचिका दी थी। पिछले महीने वहां से अर्जी खारिज होने के बाद उसने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।

कर्ज की पूरी रकम चुकाने को तैयार

इस बीच, हर ओर से फंदा कसता देख माल्या ने बैंकों का 100 फीसद कर्ज चुकाने का प्रस्ताव दिया है। उसने बुधवार को इस संबंध में ट्वीट किया था। उसने कहा था कि वह बैंकों का पूरा कर्ज चुकाने को तैयार है। उसका दावा है कि वह 2016 से ही कर्ज चुकाने का प्रस्ताव दे रहा है, लेकिन भारत सरकार ने उसके प्रस्ताव का कोई उत्तर नहीं दिया।