सरकारी कर्मचारी तय करेंगे प्रत्याशियों का भविष्य

जबलपुर प्रतिनिधि। पहले मतदाताओं का मौन, फिर एक्जिट पोल में दिख रही कांटे की टक्कर ने दोनों प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के प्रत्याशियों की धड़कनें बढ़ा दीं हैं। किसी भी विधानसभा सीट पर इस बार 30 से 50 हजार के बंपर वोट का अंतर नजर नहीं आ रहा है। ज्यादातर सीटों में फैसला कुछ सैकड़ा वोटों से ही होना है। ऐसे में पार्टियां अब छुटपुट वोट पर भी गौर करने में लगी हैं। सरकारी कर्मचारियों के ये वोट किसी भी सीट के परिणाम को बदलने में अहम साबित हो सकते हैं इसलिए पार्टियों ने अपना पूरा फोकस इन वोटों पर दिया है। चुनाव में लगे सरकारी कर्मचारी 10 दिसंबर तक वोट डाल सकेंगे।
जिले की एक विस सीट पर भाजपा-कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला है। पिछले चुनाव में यहां 923 वोटों ने जीत-हार का फैसला किया था। इस बार भी हालात ऐसे ही बताए जा रहे हैं। हर विधानसभा क्षेत्र में औसत डेढ़ से दो हजार डाक मतपत्र हैं। इस वजह से पार्टियां अब इस मामले को गंभीरता से ले रही है। 2013 में भी एक अन्य सीट पर करीब 1155 वोट का फासला आया था। ऐसे ही ग्रामीण की कई सीट पर भी हार-जीत करीबी होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
बैलेट बॉक्स स्ट्रांग रूम से निकलते और रखे जा रहे हैं। कुछ कर्मचारी डाक मतपत्रों को बॉक्स में रखते हैं। इस प्रक्रिया से राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों और समर्थकों को बाहर रखा जाता है। इससे संदेह बन रहा है। कई सीटों में करीबी मामला है, गड़बड़ी नतीजों को प्रभावित कर सकती है।
परंतु वही कलेक्टर का कहना है कि ज्यादातर कर्मचारियों ने ट्रेनिंग के वक्त ही डाक मतपत्र का प्रयोग किया था। बचे कर्मचारी जो अब कुछ ही शेष है वही मतदान कर रहे हैं। इनकी संख्या कम है, फिर भी हर प्रक्रिया की वीडियोग्राफी हो रही है। मतदान की तरह ही सुरक्षा और सावधानी रखी जा रही है। संदेह की गुंजाइश नहीं।