कोर्ट से बरी तो फिर क्यों पूछताछ?

जबलपुर प्रतिनिधि। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एसके सेठ व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने व्यापमं घोटाले के आरोपित को राहत देते हुए कहा कि आवेदक के बयान सीबीआई ने दर्ज कर लिए हैं। इसलिए अब उसे सीबीआई के समक्ष हाजिर होने की जरूरत नहीं है।
भिंड जिला के गोहद गांव निवासी संत कुमार त्रिवेदिया ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि उसे व्यापमं घोटाले के तहत खंडवा जिले से संबंधित मामले में एसटीएफ ने आरोपित बनाया था। अधिवक्ता ब्रजेंद्र मिश्रा ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ खंडवा जिले के मोघाट रोड थाने में भादंवि की धारा 419,420,467,468,120 बी व मान्यता प्राप्त परीक्षा अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। लेकिन 25 जुलाई 2015 को उसे विशेष न्यायाधीश व्यापमं, खंडवा की कोर्ट ने मामले में बरी कर दिया। बावजूद इसके सीबीआई ने नोटिस जारी कर उसे पूछताछ के लिए हाजिर होने कहा है जो अनुचित है। सीबीआई की ओर से असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल जेके जैन ने कहा कि याचिकाकर्ता सिर्फ इसलिए छूट गया कि मामले का मुख्य आरोपी फरार है।