अभी हम जिंदा हैं

जबलपुर। मझौली, ग्राम देवरी निवासी दयाराम सोनी को हार्टअटैक आने पर उसे नेपियर टाउन स्थित हॉस्पिटल में भर्ती किया गया। जांच के बाद उसे डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया। दयाराम के भाई का कहना है कि डॉक्टरों ने उसे मृत बता दिया था लेकिन रास्ते में सांस चलती देख मेडिकल अस्पताल में भर्ती किया। वहां मरीज की स्थिति स्थिर है।
निजी अस्पताल में भर्ती एक मरीज को ब्रेन डेड बताए जाने पर परिजन ने उसे मृत समझा। लेकिन जब रास्ते में मरीज की सांस पर परिजन का ध्यान गया तो उन्हें लगा कि वह तो जिंदा है। इससे वह उसे मेडिकल अस्पताल ले गए। वहां उनको बताया कि मरीज मृत नहीं था बल्कि उसकी दिमाग मृत हुआ है इसलिए सांस चल रही है।
क्या है मामला
मेडिकल अस्पताल के ड्यूटी डॉक्टरों के अनुसार मरीज का ब्रेन डेड होने पर सांस चल रही है। इस तरह के केस में यही होता है। इससे कई बार मरीज के परिजन भ्रमित हो जाते हैं।
चिकित्सकों का कहना है
ब्रेन डेड केस में मरीज के हार्ट और फेफडे ठीक रहते हैं केवल दिमाग मृत होता है। इससे मरीज के परिजन को लगता है कि उनके मरीज की मौत हो गई लेकिन यह कोमा की स्थिति है। इस स्थिति में मरीज मृत नहीं होता, केवल ब्रेन डेड होता है।