इन पर कब पड़ेगी निगम की नजर

शहर के उद्योगों में भी हो रहा जमकर अमानक पॉलिथीन का उपयोग
जबलपुर प्रतिनिधि। नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे पॉलीथीन अभियान में अब बड़े व्यापारियों पर गाज गिर रही है। इसके पूर्व ये कार्यवाही केवल दुकानों और ठेलों पर ही सिमटकर रह जाती थी। जिससे सवाल खड़ा होता था कि इन मझोले लोगों पर कार्यवाही करने से क्या शहर पॉलीथिन की समस्या से मुक्त हो पाएगा। हालांकि निगम की कार्यवाही एक बार फिर छोटी दुकानों और ठेलों पर ही शुरू हुई थी। लेकिन हुआ ठीक ऐसा कि जाल मछली के लिए डाला गया था और फंस गया मगरमच्छ। हालांकि देर आयद दुरूस्त आए के साथ अब इन बड़े व्यापारियों पर भी गाज गिरनी शुरू हो गयी है। लेकिन प्रश्र अभी भी खड़ा होता है कि दुकानदारों और विक्रेताओं पर कार्यवाही की जगह उन निर्माताओं पर कब कार्रवाई का चाबुक चलेगा। वही शहर में चल रहे उद्योगों में भी भारी मात्रा में अमानक पॉलीथिन का उपयोग धड़ल्ले से जारी है।
शहर के उद्योगों में 10 टन की रोजाना खपत
शहर में चल रहे उद्योगों में लगभग 10 टन अमानक पॉलिथीन का उपयोग रोजाना किया जाता है जिसमें पापुलर फैक्ट्री, नूडल्स, बिस्किट,अगरबत्ती जैसे उत्पादों के निर्माता धड़ल्ले से इन अमानक पॉलीथिन का उपयोग इनकी पैकिंग करने में करते हंै। जो रोजाना ही उपयोग के बाद शहर की सड़कों और नालियों में आ जाया करती है।
मल्टीनेशनल और नेशनल कम्पनियों के ब्रांड भी समस्या
मल्टीनेशनल और नेशनल कम्पनियों के ब्रांड भी शहर में पॉलीथिन कचरा फैलाने में अपना योगदान देते है। हालांकि सभी राज्यों ने पॉलीथिन पर बैन लगा दिया है बावजूद इसके इनके द्वारा इन कम्पनियों पर अभी तक कोई भी निर्णय इन प्रतिबंधों को लेकर नही लिया गया है।
एनजीटी के आदेशों की उड़ रही धज्जियां
नर्मदा तटों पर पॉलिथीन मुक्त बनाने के एनजीटी के आदेशों के जबलपुर प्रशासन के लिए कोई मायने नजर नहीं आते। आदेश के बावजूद नर्मदा घाटों पर न केवल जमकर पोलिथीन और प्लास्टिक उत्पादों का प्रयोग किया जा रहा है बल्कि धड़ल्ले से इसकी बिक्री भी हो रही है। एनजीटी ने अपने पूर्व आदेश में साफ कर दिया था कि अब प्रशासन को पॉलिथीन पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाने पड़ेंगे और सुनिश्चित करना होगा की पॉलिथीन का प्रयोग किसी भी रूप में न हो। स्थानीय लोगों का कहना है की प्रशासनिक अधिकारी महज दिखावा करते हैं। कहीं कोई कार्रवाई नहीं होती। रोजाना शहर के नर्मदा घाटों पर गंदगी और प्लास्टिक बिखरी रहती है. उसमे अधिकारियों को सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए. जहां पर यह प्लास्टिक उत्पाद बन रहे हैं वहीँ पर कार्रवाई की जानी चाहिए।