हम तो जीतेंगे, तो क्या 18 विधायक होंगे?

जबलपुर,प्रतिनिधि। मतगणना की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। 72 घंटे बचे हैं। विभिन्न प्रकार के राजनैतिकआर्यभट्ट रूपी गणितज्ञ अपने समीकरण देने में लगे हुए हैं चौंकाने वाली बात तो यह है कि सभी प्रत्याशियों के गणितज्ञ अपने प्रत्याशियों को विजेता घोषित करने में लगे हुए हैं। मजे की तो बात यह है कि कुछ निर्दलीय क्षेत्रीय पार्टियों के नेताओं ने भी अपने आप को विजेता घोषित कर दिया है । शहर में अगर किसी भी कांग्रेस या भाजपा प्रतिनिधि से उसकी हार या जीत को लेकर प्रश्न किया जाए तो उनका उत्तर यही होता है कि जीत तो शत-प्रतिशत हमारी ही होगी तथा उनके व्यक्तिगत समर्थक एवं गणितज्ञ बैठकर इन प्रत्याशियों के मन में यही भरते रहते हैं कि जीत तो सिर्फ आपकी ही हो रही है देखा जाए तो जबलपुर शहर में 8 विधानसभा है और जिस प्रकार से प्रत्याशी अपने आप को विजेता घोषित कर रहे हैं उस हिसाब से क्या 8 विधानसभा में तो 16 विधायक आएंगे?

निर्दलीय भी लाइन में
चौंकाने वाली बात तो यह है कि यहां पर सिर्फ पार्टी गत प्रत्याशी ही अपनी जीत की बात नहीं कर रहा है । कुछ निर्दलीय प्रत्याशी एवं कुछ क्षेत्रीय पार्टी के नेता भी अपने आप को विजेता घोषित कर चुके हैं इनका आत्मविश्वास देखने लायक है जहां एक प्रकार से इनके पास पार्टी का कोई सिंबाल नहीं है वहीं दूसरी तरफ यह कम से कम अपने आप को 40 से 50 हजार मतों से जीता हुआ बता रहे हैं ।

जीतेंगे तो हमारे भैया
कुछ पार्टी के नेता तो अपने समर्थकों के द्वारा किए जा रहे हैं महिमामंडन में फंसे हुए हैं यह समर्थक अपने भैया प्रेम में इस कदर डूबे हैं कि इन भैया रूपी भक्तों ने ठान रखा है की जिताना भैया को ही है। और हर 5 मिनट में बस भैया को याद दिलाते रहते हैं कि भैया आप कम से कम 25000 से ज्यादा वोटों से जीत रहे हो बस फिर क्या है भैया इन बातों से खुश हो जाते हैं आज तुरंत अपने भक्तों को 500 की एक पत्ती दे देते हैं बस इसके बाद तो समर्थक अपने भैया को 50000 से भी ज्यादा वोटों से जिताने की बात करने लगते हैं

एक बोतल पिला दो मरते दम तक आपके साथ
कहानी तो सिर्फ एक बोतल की ही है रात में मिल जाए तो अपने नेता को हर चौराहे में जिता देंगे, हर दिन जिताएं डे । क्या करें हमारे नेता ने ने रात में इतनी बड़ी व्यवस्था जोकरा दी है। विधायक तो हमारा नेता ही बनेगा।
वोटर से ज्यादा तो हो गए हैं नेता
चुनाव के दौरान शहर में एक अलग माहौल देखने को मिलता है प्रचार-प्रसार के वक्त प्रत्याशी तो अपने चरित्र में होती हैं उनसे ज्यादा उनके समर्थक अपने आप को विधायक या विधायक का खास समझने लगते हैं और शहर में कई प्रकार के स्वयं घोषित एवं मठाधीश नेता पैदा हो जाते हैं जिनके मन में सिर्फ एक ही इच्छा होती है यार आज नहीं तो कल विधायक तो हम ही बनेंगे

असली विधायक कौन ,पता चलेगा 11 को
लाख गणित लगा लो, कई कंसल्टेंसी कंपनी हायर कर लो, लाख दारू पिला दो और कई करोड़ों पैसा खर्च कर दो पर लोकतंत्र में जनता जनार्दन का फैसला सर्वोपरि होता है कितने भी छुटभईये नेता और जितने भी प्रत्याशी हो भले ही अपने आप को अभी से विधायक बता रहे हो परंतु फैसला तो 11 तारीख को आ ही जाएगा और इन तथाकथित विधायकों को यह भी पता चल जाएगा कि सिर्फ चुनाव लडऩे से आप विधायक नहीं बनते, जनता का एक बहुत बड़ा वर्ग भी आपके साथ होना चाहिए।