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प्याज 50 पैसे प्रति किलो, तब भी रो रहे लोग !

बिजनेस डेस्‍क। एक बार फिर से प्याज और किसान सुर्खियों में हैं. प्याज के गिरते भाव से किसान बर्बादी के कगार पर है. मंडी में किसान लुट रहा है लेकिन बाज़ार में उपभोक्ता को कोई राहत नहीं है. चांदी काट रहे हैं व्यापारी और बिचौलिए. जब तक नयी सरकार नहीं बन जाती तब तक बर्बादी का ये दौर जारी रहेगा.

किसानों के मुताबिक भाड़ा, ढ़ुलाई और भराई मिलाकर गिरी से गिरी हालत में प्याज की लागत करीब 6 रुपए किलो आती है. लेकिन मंडी में प्याज 50 पैसे से लेकर 1 रुपए तक में बिक रहा है. इसकी वजह ये है प्याज की बंपर क्रॉप हुई है. और मंडी में व्यापारियों की दादागिरी है. वो सब मिलकर जो भाव तय कर देते हैं प्याज उसी दर पर बिकता है. अब प्याज कहीं 50 पैसे प्रति किलो तो कहीं 1.25 रुपए प्रति किलो के भाव पर बिक रहा है.

नई प्याज ज़रूर 5 रुपए किलो पर बिक रही है, लेकिन वो भी लागत और ढुलाई से कम भाव है. इसलिए किसान यहां भी नुक़सान में हैं. परेशान किसान अब ढुलाई का खर्च भी अपनी जेब से दे रहा है. इसलिए मजबूरी में वो अपनी खून-पसीने से तैयार उपज को ढोर-डंगर को खिलाना ज़्यादा पसंद कर रहा है. व्यापारियों की मनमानी इतनी ज़्यादा है कि वो किसान से तो 50 पैसे और 1 रुपए में प्याज ख़रीद रहा है लेकिन बाज़ार में उपभोक्ता को वही प्याज 10 से 15 रुपए प्रति किलो में बेच रहा है. इस मार्जिन का लाभ किसानों और बिचौलियों को मिल रहा है.

व्यापारियों का कहना है पूरा खेल डिमांड औऱ सप्लाई का है. मंडी में आवक ज़्यादा होने पर फसल का दाम अपने आप गिर जाता है. व्यापारी रेट जान बूझकर नहीं गिराता. अब आवक ज़्यादा है तो व्यापारी क्या करे. सरकार को रास्ता निकालना चाहिए. कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन का कहना है किसानों की परेशानी से सरकार वाकिफ है. लेकिन नयी सरकार बनने पर ही कोई काम हो पाएगा. किसान हर तरफ से परेशान है. उसकी उम्मीद सरकार से है लेकिन जब तक सरकार नहीं बनती तब तक वो फसल के साथ ही बर्बाद हो रहा है.

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