कांग्रेस नेता अनर्गल आरोप लगा रहे है – राकेश सिंह

जबलपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद राकेश सिंह ने कांग्रेस द्वारा ईवीएम को लेकर किए जा रहे बेबुनियाद के आरोप पर आपत्ति व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस अपनी संभावित हार से भयभीत है उन्हें पता है कि प्रदेश की जनता ने चौथी बार भी उन्हें नकार दिया है और अपनी हार का ठीकरा कहीं न कहीं तो फोडऩा है इसीलिए कांग्रेस के नेता इस तरह के अनर्गल आरोप लगा रहे है। मध्यप्रदेश में कांग्रेस के नेताओं को पता है कि वह बुरी तरह हार का सामना करने वाले हैं, इसलिए कांग्रेस के लोगों ने मतदान के दिन से ही ईवीएम को लेकर प्रलाप करना शुरु कर दिया है।
राकेश सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि कांग्रेस हार से भयभीत है और हार का ठीकरा अपनी कार्यप्रणाली और नीतियों की बजाय चुनाव आयोग और उसकी प्रक्रिया पर फोडऩा चाहती है। संवैधानिक संस्थाओं पर उंगली उठाना कांग्रेस की परंपरा का हिस्सा है। कांग्रेस का यह इतिहास रहा है कि वह संवैधानिक संस्थाओं पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष आरोप लगाकर उनकी गरिमा को भंग करती रहती है।
श्री सिंह ने प्रश्न किया है कि यदि ईवीएम कांग्रेस के विरुद्ध ही चलती है तो पंजाब में कांग्रेस की सरकार कैसे बनी ? यदि ईवीएम भारतीय जनता पार्टी के समर्थन में ही काम करती है तो फिर भारतीय जनता पार्टी को किसी भी चुनाव क्षेत्र में पराजित नहीं होना चाहिए। सच्चाई यह है कि कांग्रेसी घपले घोटालों के अपने काले अध्याय से बाहर नहीं आना चाहते है। आज वह जिस प्रकार से चुनाव प्रक्रिया को लांछित करने पर उतारू है, इससे स्पष्ट है कि चुनाव पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से होने के कारण कांग्रेस के पेट में मरोड़ हो रही है। यह इस बात का भी संकेत है पांच-छह दशकों तक लगातार सरकारों ने रहने वाली कांग्रेसी शायद चुनाव में गड़बडिय़ां कराकर ही सत्ता प्राप्त करती रही होगी।
श्री सिंह ने कहा कि कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चुनाव आयोग से मिलकर जो मांग रखी है, हमारा ऐसा मानना है कि यह बेतुकी मांग संवैधानिक संस्था पर अतिरिक्त और अनुचित दबाव बनाने का प्रयास है। प्रतिनिधिमंडल में नामचीन वकील शामिल थे जिन्हें यह अच्छी तरह पता है की मतगणना के समय आंकड़ों को एक एक राउंड के बाद संबंधित विधानसभा क्षेत्र के रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा उसकी फोटो कॉपी राजनीतिक दलों को दी जाती है। इसके स्थान पर कांग्रेस ने मांग की है कि मतगणना के प्रत्येक राउंड का सर्टिफिकेट जिला निर्वाचन अधिकारी अर्थात कलेक्टर द्वारा प्रमाणित कर दिया जाए। दरअसल इस प्रकार का कोई प्रावधान चुनाव आयोग के नियमावली में नहीं है। इसलिए मुख्य चुनाव आयुक्त ने कांग्रेस की इस मांग को एक सिरे से नकार दिया है । अपनी यह चाल भी नाकाम होने से कांग्रेस बौखला गई।
श्री सिंह ने कहा चुनाव से पूर्व ही कांग्रेस ने चुनाव आयोग के विरुद्ध वातावरण बनाना शुरू कर दिया था। चुनाव आयोग पर फर्जी मतदाता सूची जैसे गंभीर आरोप लगाए गए, लेकिन आयोग ने जब पूरी सतर्कता और परिश्रम के साथ इस मतदाता सूची का परीक्षण निरीक्षण कराया तो फर्जी मतदाता नाम का कोई व्यक्ति प्राप्त नहीं हुआ। कांग्रेस ने इस मोर्चे पर भी बुरी तरह मुंह की खाई, लेकिन बेशर्मी की पराकाष्ठा देखिए कि कांग्रेस नए-नए विषय रोज लेकर आती है।
श्री सिंह ने कहा जहां तक ईवीएम के लेट पहुंचने का या समय पर पहुंचने का विषय है तो इसका भारतीय जनता पार्टी या सरकार से क्या लेना देना है। सारी व्यवस्थाएं चुनाव आयोग के अधीन होने के कारण चुनाव आयोग लापरवाही के विरुद्ध जो कार्यवाही करना चाहिए और करता ही है और कर भी रहा है। चुनाव से पूर्व ही कांग्रेस ने चुनाव आयोग के विरुद्ध वातावरण बनाना शुरू कर दिया था। चुनाव आयोग पर फर्जी मतदाता सूची जैसे गंभीर आरोप लगाए गए, लेकिन आयोग ने जब पूरी सतर्कता और परिश्रम के साथ इस मतदाता सूची का परीक्षण निरीक्षण कराया तो फर्जी मतदाता नाम का कोई व्यक्ति प्राप्त नहीं हुआ। श्री सिंह ने कहा कांग्रेस बुरी तरह पराजय की ओर बढ़ गई है, इसलिए चुनाव परिणाम के बाद अपनी कमियों को छुपाने के लिए ईवीएम पर ठीकरा फोडऩे की भूमिका तैयार कर रही है। कांग्रेस हार के बाद यही बयान देने वाली है कि ईवीएम में गड़बड़ी के कारण कांग्रेस पराजित हुई है। कांग्रेस के नेता जो जनता के हित में कार्य करने में पूरी तरह नाकाम है वे जनहित के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए मध्य प्रदेश के वातावरण को विषाक्त और दूषित करना चाहते हैं।
कांग्रेस यही सब करके वर्षों तक देश पर राज करती रही है लेकिन अब उसको समझ लेना चाहिए कि भारत में अब पारदर्शिता शुचिता और ईमानदारी का युग आ गया है इसलिए उसकी इस प्रकार की कोई भी चाल अब कामयाब नहीं होगी।