बेटी को एतराज नहीं तो तुम्हें क्यों है एतराज?

जबलपुर, नगर प्रतिनिधि। हाईकोर्ट के जस्टिस सुजय पॉल की सिंगल बेंच ने सागर जिला निवासी पिता की पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें फटकार लगाई कि जब शादी के लिए 6 की जगह 2 लाख रुपए के आदेश पर बेटी ने एतराज नहीं किया और शादी भी हो गई तो फिर उन्हें एतराज क्यों है। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। सागर जिले जूना ग्राम निवासी कृष्ण कुमार उर्फ कृष्णकांत जरोलिया ने जिला अदालत सागर के आदेश को पुनरीक्षण याचिका के जरिए हाइकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में बताया गया पत्नी से संबंध विच्छेद होने के बाद वह और बेटी दोनों अलग रहते हैं लेकिन पुत्री अमृता ने सागर जिला अदालत में यह कहते हुए आवेदन पेश किया कि उसका विवाह तय हो गया है। इसमें 6 लाख रु से अधिक खर्च आएगा। लिहाजा कानूनन यह रकम उसके पिता को देनी चाहिए। 28 अप्रैल 2017 को सत्र न्यायालय सागर ने पुत्री के आवेदन का निराकरण करते हुए याचिकाकर्ता को निर्देश दिए कि वह 13 मई 2017 को होने वाले विवाह के खर्च के लिए 2 लाख रु अपनी बेटी को प्रदान करे। अधिवक्ता मनोज तिवारी ने कहा कि निचली अदालत के आदेशानुसार वह शादी के पूर्व 2 लाख रु बेटी को दे चुका है। पुत्री के वकील अमित शर्मा ने यह कहते हुए आपत्ति जताई कि अभी तथाकथित 2 लाख रु के भुगतान की पुष्टि होना बाकी है। कोर्ट ने अंतिम सुनवाई के बाद कहा कि याचिकाकर्ता की पुत्री का विवाह हुए डे? साल से अधिक हो गया। इस दौरान उसने किसी भी उच्च फोरम या न्यायपीठ के सामने शेष 4 लाख रु पाने के लिए अपनी किसी प्रकार की आपत्ति जाहिर नहीं की। कोर्ट ने हैरत जताते हुए कहा कि फिर याचिकाकर्ता पिता के वकील इस राशि के लिए बहस क्यों कर रहे हैं? याचिकाकर्ता की ओर से एक भी ऐसा कारण नही बताया जा सका, जिसकी वजह से जिला अदालत के आदेश में हस्तक्षेप किया जा सके। इसलिए हाईकोर्ट ने पिता को फटकार लगाते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी।