11 तारीख को नोटा निभा सकता है अहम रोल?

जबलपुर। विधानसभा चुनावों में ‘नोटाÓ को लेकर मतदाताओं से लेकर प्रत्याशियों तक में असमंजस की स्थिति थी। आचार संहिता लागू होने से मतदान के दिन तक मतदाताओं का नोटा के प्रति रुझान नजर नहीं आया। पिछली बार के मुकाबले निर्वाचन आयोग ने भी इसका प्रचार-प्रसार नहीं किया। इससे कयास लग रहे हैं कि इस विधानसभा चुनाव में नोटा का आंकड़ा पिछली चुनावों के मुकाबले कम हो सकता है।
सर्वाधिक सिहोरा, सबसे कम केंट-
पिछले विधानसभा चुनाव में सर्वाधिक नोटा का उपयोग किया गया था। यहां 4697 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया। दूसरे स्थान पर बरगी विधानसभा थी, यहां 3833 मतदाताओं ने इसका उपयोग किया। तीसरे स्थान पर पश्चिम था, जहां 3693 मतदाताओं ने इसका उपयोग किया। सबसे कम केंट विधानसभा के 2545 मतदाताओं ने नोटा दबाया था।
पिछली बार चौथे स्थान पर-
पूर्व और पश्चिम में 2013 के विधानसभा चुनाव में नोटा चौथे स्थान पर रहा, लेकिन इन दोनों विधानसभाओं में नोटा ने चुनाव को प्रभावित किया। यहां भाजपा प्रत्याशी अंचल सोनकर को 67617 मत मिले थे, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी लखन घन्घोरिया को 66012 मत मिले। यहां भाजपा प्रत्याशी की जीत 1155 मतों से हुई। नोटा को 2761 मिले थे। पश्चिम विधानसभा में कांग्रेस प्रत्याशी तरुण भनोत को 62668 व भाजपा प्रत्याशी हरेंद्रजीत सिंह को 61745 मत मिले थे। तरुण ने 914 मतों से चुनाव जीता था। नोटा का आंकड़ा यहां से 3693 पर पहुंच गया था।
नोटा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा है
सुको ने शुक्रवार को उस याचिका को खारिज कर दिया है. जिसमें नोटा को अधिक वोट मिलने पर चुनाव परिणाम को रद्द करने और दोबारा मतदान कराने के लिए निर्वाचन आयोग को निर्देश देने की मांग की गई थी. स्ष्ट ने कहा कि वह निर्वाचन आयोग से नोटा को चुनाव में अधिकतम वोट मिलने पर चुनाव परिणाम रद्द करने के लिए नहीं कहेगा. याचिका में मांग की गई थी कि अगर चुनाव में नोटा का अधिक प्रयोग होता है तो चुनाव दोबारा कराया जाए

क्या है नोटा
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) में नोटा (इनमें से कोई नहीं) का विकल्प दिया गया है. जिससे आप चुनाव में अपने पंसद के प्रत्याशी न होने पर नोटा बटन का प्रयोग कर सकते है. नोटा आने के बाद चुनाव में इसका प्रयोग बढ़ता जा रहा है.
लोकसभा चुनाव में क्क में सबसे अधिक नोटा का प्रयोग
लोकसभा चुनाव में सबसे अधिक नोटा का इस्तेमाल उत्तर प्रदेश में हुआ, जहां करीब छह लाख मतदाताओं ने अपने क्षेत्रों में सभी उम्मीदवारों को नकारते हुए नोटा का बटन दबाया. नोटा का सबसे ज्यादा इस्तेमाल उत्तर प्रदेश में ही हुआ, लेकिन वह कुल करीब आठ करोड़ मतों का 0.6 प्रतिशत ही रहा.