कॉलेजों की जमापूंजी का ऑडिट कराएगा उच्च शिक्षा विभाग

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भोपाल। उच्च शिक्षा विभाग मध्यप्रदेश के 457 सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के ऑडिट की तैयारी कर रहा है। इसके लिए 25 नवंबर के बाद अभियान शुरू होगा। अलग-अलग ऑडिट टीमें बनाई जाएंगी, जो पिछले तीन से चार साल के आय-व्यय का ऑडिट करने के साथ खरीदारी और जमापूंजी में गड़बड़ी का पता लगाएंगी।

सरकार पहली बार कॉलेजों की जमापूंजी का ऑडिट करा रही है। प्रदेश के बड़े कॉलेजों में जनभागीदारी से इकठ्ठी हुई राशि करोड़ों में पहुंच गई है। विभाग इस राशि का उपयोग नहीं कर पा रहा है और कॉलेज स्तर पर होने वाली खरीदारी में गड़बड़ी के आरोप लग रहे हैं।

इसे देखते हुए विभाग ने ‘ऑडिट अभियान” चलाने का फैसला लिया है। ऑडिट टीमों में विभाग, कोषालय और लोकल ऑडिटर भी रखे जाएंगे। अभियान की योजना बना ली गई है। बस छात्रसंघ चुनाव और अर्द्धवार्षिक एवं सेमेस्टर परीक्षाएं खत्म होने का इंतजार है।

कॉलेजों में पड़े हैं करोड़ों रुपए

विभाग के अफसर बताते हैं कि कॉलेजों को जनभागीदारी से हर साल अच्छी खासी रकम मिलती है। छोटे कॉलेजों में इस मद में कम राशि है, लेकिन बड़े कॉलेजों में करोड़ों रुपए इकठ्ठे हो गए हैं। जिन्हें कॉलेज और विवि प्रबंधन अपने तरीके से उपयोग में ले रहा है। ऑडिट में ये सारी स्थिति सामने आ जाएगी। यदि इस मद की राशि को खर्च करने में गड़बड़ी हुई है तो वह भी पता चल जाएगी।

दूसरे कार्यों में होगा उपयोग

सूत्र बताते हैं कि कॉलेजों की जमापूंजी का ऑडिट कराने का एक मकसद ये पता लगाना भी है कि कॉलेजों के पास कितनी धनराशि है। वर्तमान में सरकार विकास कार्यों के लिए राशि उपलब्ध नहीं करा पा रही है। इस कारण विभाग के कई कार्य अधूरे पड़े हैं। इस ऑडिट से कॉलेजों में जमापूंजी की वास्तविक स्थिति पता चल जाएगी। तब विभाग उस राशि का उपयोग दूसरे कार्यों में करने की योजना बनाएगा।

जमापूंजी पता कर रहे

कॉलेजों के पास काफी जमापूंजी है। जिसका ऑडिट करा रहे हैं। छात्रसंघ चुनाव और परीक्षाओं के बाद इसे अभियान की तरह चलाएंगे। राशि खर्च करने में गड़बड़ी हुई है या नहीं। ये तो ऑडिट में ही पता चलेगा। यदि ऐसा सामने आएगा, तो कार्रवाई करेंगे।

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