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दिल्ली में किसानों का ‘आक्रोश मार्च’, ट्रैफिक और भीड़ नियंत्रण के लिए पुलिस तैयार

दिल्ली। दिल्ली पुलिस देश भर के किसान एक बार फिर राजधानी दिल्ली कूच कर रहे हैं। पूरे देश में पदयात्रा के बाद बड़ी संख्या में किसान 29 और 30 नवंबर को दिल्ली आने वाले आठ प्रमुख रास्तों से दाखिल होने वाले हैं, जिसे लेकर दिल्ली पुलिस ने एडवाइजरी जारी की है। आंदोलन के पहले दिन गुरुवार को किसानों के साथ डॉक्टर, वकील, पूर्व सैनिक, पेशेवर और छात्रों सहित समाज के तमाम वर्गों के लोगों के समूह रामलीला मैदान में एकत्र हो गए। आज किसान रामलीला मैदान से संसद मार्ग तक पैदल मार्च निकालने वाले हैं।
उन्हें ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर दिल्ली में घुसने नहीं दिया जाएगा। असल में कोर्ट के आदेश के चलते दिल्ली में ट्रैक्टर-ट्रॉली पर रोक है। किसान मुक्ति मार्च के मद्देजनर जिन मार्गों से बचने की सलाह दी गई है, उनमें महिपालपुर, धौलाकुआं, 11 मूर्ति, ताल कटोरा, कनॉट प्लेस, रंजीत सिंह फ्लाइओवर व आसपास के मार्ग शामिल हैं।
राजधानी दिल्ली में गुरुवार को किसान मुक्ति मार्च और 30 नवंबर को संसद घेराव कार्यक्रम को देखते हुए पुलिस ने कमर कस ली है। दिल्ली में किसानों का गुरुवार को जहां महिपालपुर से रामलीला ग्राउंड पहुंचने का कार्यक्रम है, वहीं शुक्रवार को रामलीला ग्राउंड से संसद कूच करने का कार्यक्रम है। इसे देखते हुए जहां कानून व्यवस्था के मद्देनजर दस अतिरिक्त कंपनी पुलिस बल की व्यवस्था की गई है, वहीं ट्रैफिक के अतिरिक्त जवानों को भी महत्वपूर्ण मार्गों पर तैनात किया गया है।
किसान मुक्ति मार्च व किसानों के संसद घेराव में बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, केरल, राजस्थान, मध्य प्रदेश हरियाणा समेत अलग-अलग राज्यों से किसान पहुंच रहे है। 29 नवंबर को किसान मुक्ति मार्च के बाद रामलीला मैदान में ही रात को रुकेंगे। वहीं, किसानों के लिए सांस्कृतिक संख्या का आयोजन किया जाएगा। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्यवय समिति व किसान मुक्ति मार्च से जुड़े अभिक साहा के मुताबिक किसान आंदोलन में देशभर के अलग-अलग राज्यों के 201 किसान संगठन पहली बार पहली बार एकता कायम की है। ऐसा पहली बार है कि देश के किसान संगठन इतनी बड़ी संख्या में एकजुट हुए हैं।

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