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विवाहू मुहूर्त : इस वर्ष विवाह के लिए अब सिर्फ तीन मुहूर्त शेष

इंदौर। इस बार देवशयनी एकादशी से मांगलिक आयोजनों पर लगा विराम पांच माह बाद हटेगा। 7 दिसंबर को गुरु के तारे के उदय के साथ ही वैवाहिक आयोजन शुरू होंगे लेकिन इस वर्ष अब मत-मतांतर के साथ सिर्फ तीन मुहूर्त शेष हैं। यह मुहूर्त 11, 12 और 13 दिसंबर को हैं। इसके बाद 16 दिसंबर से धनु मलमास के लगने से एक बार फिर वैवाहिक आयोजनों पर रोक लग जाएगी।

ज्योर्तिविद् पं. ओम वशिष्ठ के अनुसार हर वर्ष देव उठनी ग्यारस के साथ वैवाहिक आयोजनों का दौर शुरू हो जाता है लेकिन इस बार देव उठनी ग्यारस के छह दिन पहले 12 नवंबर को विवाह के लिए आवश्यक गुरु के तारे के अस्त होने से वैवाहिक आयोजन शुरू नहीं हो पाए। हालांकि मत-मतांतर के साथ कुछ वैवाहिक आयोजन अबूझ मुहूर्त में से एक माने जाने वाले देव उठनी ग्यारस पर 19 नवंबर को किए गए थे।

हालांकि इनकी संख्या काफी कम थी। 7 से 16 दिसंबर के मध्य विवाह के तीन मुहूर्त कुछ पंचांगों में दिए गए हैं। उन दिनों में विवाह किए जा सकते हैं। इसके बाद 16 दिसंबर को धनु मलमास लगेगा, जो मकर संक्रांति तक रहेगा। इस दौरान भी मांगलिक कार्य निषेध रहेंगे।

मलमास के समाप्त होने के बाद जनवरी 2019 में 17, 18, 22, 23, 25, 26, 29, 30 और फरवरी में 8, 9, 10, 14, 19, 20, 21 को विवाह मुहूर्त हैं। मार्च में 7, 8, 9 और 12 तारीख को विवाह हो सकेंगे। इसके बाद 13 मार्च से 9 अप्रैल 2019 तक खरमास होने से वैवाहिक आयोजनों पर रोक लग जाएगी।

गुरु-शुक्र का तारा अस्त पर विवाह की अनुमति नहीं

ज्योर्तिविद् देवेंद्र कुशवाह के अनुसार विवाह मुहूर्त देखते समय त्रिबल शुद्धि के साथ गुरु और शुक्र के तारे पर भी विचार करना आवश्यक है। इसका कारण है कि शुक्र भोग-विलास का नैसर्गिक कारक होने से दांपत्य सुख का प्रतिनिधि है। गुरु कन्या के लिए पति कारक होता है। इन दोनों ग्रहों का अस्त होना दांपत्य जीवन के लिए हानिकारक माना जाता है। इसके चलते सामान्यतः इन दोनों ग्रहों में से कोई भी अस्त होने पर विवाह नहीं किया जाता है। इस बात की अनुमति शास्त्र नहीं देते हैं।

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