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जिंदा गर्भवती को भेजा पोस्टमार्टम रूम में

बड़नगर। शासकीय अस्पताल में इलाज के लिए आई एक गर्भवती महिला को इलाज के दौरान मृत घोषित कर पोस्टमार्टम रूप में भेजने के मामले में बुधवार शाम हंगामा खड़ा हो गया। परिजन का आरोप है कि महिला को जिंदा ही पीएम रूम में भेज दिया। परिजन व अन्य लोगों द्वारा एक घंटा तक एक घंटे हंगामे को पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शांत करवाया। मिली जानकारी के मुताबिक मृतका 20 वर्षीय किरण पति पवन माली निवासी किला दरवाजा, बड़नगर है। जेठानी दुर्गाबाई माली ने बताया किरण पांच माह की गर्भवती थी।

वह मतदान कर घर लौटी तो पर घबराहट होने पर परिजन शासकीय चिकित्सालय ले गए। यहां डॉ. बबीता माथुर ने जांच के बाद खून की कमी होने पर ब्लड लगाया। आधी बोतल खून चढ़ा ही था कि शाम को अचानक घबराहट के साथ पेट दर्द व उल्टियां होने लगी। चिकित्सको द्वारा तत्काल तीन इंजेक्शन लगाए फिर तबीयत ज्यादा बिगड़ने लगी व हाथ पैर हिलना बंद हो गए थे। शाम 6।30 बजे डॉ। सुयश श्रीवास्तव ने किरण को चेक किया तो मृत घोषित कर पोस्टमार्टम रूम में भेज दिया गया। इसकी सूचना मिलते ही किरण की सास घबराते हुए पीएम रूम में पहुंची तो देखा किरण हाथ-पैर चला रही है। आवाज देने पर बोलने की कोशिश कर रही है।

इसकी सूचना तत्काल परिजनो को दी गई सभी हड़बड़ाते हुए चिकित्सालय पहुंचे और डॉक्टर को सूचित किया। इस पर डॉ. देवेंद्र स्वामी, डॉ. सुयश श्रीवास्तव, डॉ. वर्मा ने वहां पहुंचकर हार्ट को पंपिंग की और जांच की तो देखा किरण की मृत्यु पूर्व में हो चुकी है। इस घटना से नाराज परिवार जन, मोहल्लावासी व नगरवासियों ने हंगामा किया जिन्हे शांत करने के लिए चिकित्सकों द्वारा पुलिस प्रशासन का सहारा लिया। अब गुरुवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद ही पता लगेगा वास्तविकता क्या है।

गर्भवती महिला के शरीर में हीमोग्लोबिन 5 प्रतिशत ही था। ऐसे में महिला के हृदय ने काम करना बंद कर दिया। इससे उसकी मृत्यु हो गई है। पीएम रूम में भेजने से पहले डॉ. सुयश श्रीवास्तव ने अच्छे से चेकअप किया है। मृत्यु इलाज के दौरान हो चुकी थी। पीएम रूम में जिंदा होने के जो आरोप लगाए जा रहे हैं वे सरासर गलत हैं। – डॉ. देवेंद्र स्वामी, प्रभारी, शासकीय चिकित्सालय, बड़नगर

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